डेस्क: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि सर्दियों में इस्तेमाल होने वाले कंबल और रजाई से कैंसर हो सकता है। वीडियो में यह भी कहा जा रहा है कि खास तरह के सिंथेटिक कंबल या रजाई में मौजूद केमिकल्स शरीर के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। ऐसे दावों ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या सच में कंबल या रजाई से कैंसर होने का खतरा है? डॉक्टर इस बारे में क्या कहते हैं? आइए, इस वायरल दावे की सच्चाई को विस्तार से समझते हैं।
वायरल वीडियो में क्या किया जा रहा है दावा?
वायरल वीडियो में यह बताया जा रहा है कि बाजार में मिलने वाले कई कंबल और रजाई सिंथेटिक फाइबर से बने होते हैं। इन फाइबर को बनाने और रंगने में कुछ केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो लंबे समय तक त्वचा के संपर्क में रहने से कैंसर का कारण बन सकते हैं। वीडियो में यह भी कहा गया है कि सर्दियों में लोग घंटों तक कंबल या रजाई ओढ़े रहते हैं, जिससे ये हानिकारक तत्व शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
डॉक्टर क्या कहते हैं इस दावे पर?
मेडिकल एक्सपर्ट्स और ऑन्कोलॉजिस्ट इस दावे को भ्रामक बताते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि सामान्य तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले कंबल या रजाई सीधे तौर पर कैंसर का कारण बनते हैं। कैंसर एक जटिल बीमारी है, जो कई कारणों जैसे जेनेटिक फैक्टर, लाइफस्टाइल, धूम्रपान, शराब, प्रदूषण और कुछ खास केमिकल एक्सपोजर से जुड़ी हो सकती है, लेकिन सिर्फ कंबल ओढ़ने से कैंसर होना वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है।
सिंथेटिक कंबल और केमिकल्स की सच्चाई
यह सच है कि कुछ सस्ते या खराब क्वालिटी के सिंथेटिक प्रोडक्ट्स में केमिकल डाई, फॉर्मलडिहाइड या फ्लेम रिटार्डेंट जैसे पदार्थ इस्तेमाल हो सकते हैं। ये केमिकल्स त्वचा में जलन, एलर्जी या सांस से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकते हैं, खासकर उन लोगों में जिनकी त्वचा संवेदनशील होती है। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार, इनसे कैंसर का खतरा बहुत ही कम या नगण्य होता है, वह भी तब जब एक्सपोजर लंबे समय तक और बहुत ज्यादा मात्रा में हो।
प्राकृतिक कंबल और रजाई कितने सुरक्षित?
ऊन, कॉटन या रजाई में इस्तेमाल होने वाला कपास जैसे प्राकृतिक मटीरियल आमतौर पर ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं। ये त्वचा के लिए फ्रेंडली होते हैं और इनमें केमिकल ट्रीटमेंट कम होता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर किसी को एलर्जी, अस्थमा या स्किन प्रॉब्लम है, तो प्राकृतिक फाइबर से बने कंबल और रजाई का इस्तेमाल करना बेहतर होता है। इससे जलन, खुजली या सांस की दिक्कत का खतरा कम हो जाता है।
क्या लंबे समय तक इस्तेमाल से खतरा बढ़ता है?
वायरल वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि सालों तक एक ही कंबल या रजाई इस्तेमाल करने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इस पर डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक गंदे या ठीक से साफ न किए गए कंबल-रजाई में धूल, फंगस और डस्ट माइट्स जमा हो सकते हैं। ये एलर्जी, खांसी, त्वचा रोग और अस्थमा जैसी समस्याएं जरूर बढ़ा सकते हैं, लेकिन कैंसर से इसका सीधा संबंध नहीं है।
कैंसर किन कारणों से होता है, समझना जरूरी
डॉक्टर बताते हैं कि कैंसर होने के मुख्य कारणों में तंबाकू का सेवन, शराब, मोटापा, खराब डाइट, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, प्रदूषण और कुछ इंफेक्शन शामिल हैं। इसके अलावा, कुछ इंडस्ट्रियल केमिकल्स या रेडिएशन के लंबे और सीधे संपर्क से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। रोजमर्रा के घरेलू सामान, जैसे कंबल या रजाई, आमतौर पर इस कैटेगरी में नहीं आते।
कंबल–रजाई इस्तेमाल करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
हालांकि कैंसर का खतरा न के बराबर है, फिर भी कुछ सावधानियां बरतना फायदेमंद हो सकता है।
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नया कंबल या रजाई खरीदने के बाद एक-दो बार धोकर इस्तेमाल करें।
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बहुत ज्यादा तेज गंध वाले या बेहद सस्ते सिंथेटिक कंबल से बचें।
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समय-समय पर कंबल और रजाई को धूप में सुखाएं और साफ रखें।
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अगर स्किन एलर्जी या सांस की समस्या हो, तो कॉटन या ऊन के प्रोडक्ट्स चुनें।
निष्कर्ष:
कुल मिलाकर, वायरल वीडियो में किया गया यह दावा कि कंबल या रजाई से कैंसर हो जाएगा, वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, इससे कैंसर होने का कोई ठोस सबूत नहीं है। हां, खराब क्वालिटी या गंदे कंबल से एलर्जी और दूसरी समस्याएं जरूर हो सकती हैं। इसलिए डरने के बजाय सही जानकारी रखना और अच्छी क्वालिटी के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना ही समझदारी है। सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी दावे पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय, विशेषज्ञों की राय और वैज्ञानिक तथ्यों को प्राथमिकता देना जरूरी है।



