Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर घर घर गणपति बप्पा की स्थापना होती है। कोई डेढ़ दिन रखता है तो कोई तीन, पांच, सात या पूरे दस दिन। दस दिनों की यह परंपरा आखिर बनी कैसे, यह सवाल हर साल पूजा से पहले उठता है। पंडित कौशल पांडेय के अनुसार इसके पीछे महाभारत से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता है। कहा जाता है कि महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखवाई और लेखन भगवान गणेश ने स्वीकार किया।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू काम करीब दस दिन चला और अनंत चतुर्दशी पर पूरा हुआ। धार्मिक मान्यता में इन्हीं दिनों को स्थापना और विसर्जन से जोड़ा जाता है। इस वर्ष गणेश स्थापना 14 सितंबर 2026 को बताई गई है। शुभ समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक कहा गया है। मुख्य विसर्जन अनंत चतुर्दशी यानी 25 सितंबर को होगा। पूजा में दूर्वा चढ़ाने और तुलसी न चढ़ाने की सलाह दी गई है।
Ganesh Chaturthi 2026: महाभारत लिखने के लिए गणेश जी बनी लेखनी
पंडित कौशल पांडेय बताते हैं कि वेदव्यास को ऐसा लेखक चाहिए था जो लगातार लिख सके। उन्होंने गणेश जी की आराधना की। गणपति ने दिन रात लेखन स्वीकार कर लिया। यह प्रसंग लोक मान्यता के रूप में सुनाया जाता है।
शरीर पर मिट्टी का लेप लगाने की कथा
लगातार लिखने से थकान और गर्मी न बढ़े, इसके लिए वेदव्यास ने गणेश जी के शरीर पर मिट्टी का लेप लगाया। ऐसा कहा जाता है। लेखन भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से चला। करीब दस दिन यह क्रम रहा।
Ganesh Chaturthi 2026: अनंत चतुर्दशी पर पूरा हुआ लेखन
दसवें दिन अनंत चतुर्दशी पर महाभारत का लेखन पूरा माना जाता है। तब शरीर तप रहा था और मिट्टी का लेप सूखकर झड़ने लगा। ठंडक के लिए वेदव्यास ने गणेश जी को पवित्र जल में स्नान कराया।
दस दिन की स्थापना इसी प्रसंग से जुड़ी
धार्मिक मान्यता में चतुर्थी से चतुर्दशी तक के दस दिन इसी लेखन और स्नान की कथा से जोड़े जाते हैं। घर में गणपति रखना और फिर जल में विसर्जन करना उसी भाव की याद बताया जाता है। कितने दिन रखें, यह परिवार की रीति पर निर्भर करता है।
Ganesh Chaturthi 2026: इस साल स्थापना और विसर्जन की तारीख
पंडित पांडेय के अनुसार 2026 में गणेश स्थापना 14 सितंबर को होगी। शुभ समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है। मुख्य विसर्जन अनंत चतुर्दशी यानी 25 सितंबर को किया जाएगा। पूजा और भोग इन दिनों अर्पित करने की परंपरा है।
पूजा में दूर्वा चढ़ाएं, तुलसी नहीं
गणेश जी की पूजा में दूर्वा चढ़ाने की परंपरा है। तीन या पांच पत्तियों वाली दूर्वा शुभ मानी जाती है। तुलसी अर्पित नहीं करनी चाहिए, ऐसा पंडित ने बताया। रोली, चंदन, अक्षत, फूल, धूप और दीप चढ़ाए जा सकते हैं।
इको फ्रेंडली मूर्ति का सुझाव
पर्यावरण और मूर्ति के सम्मान को ध्यान में रखते हुए इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। विसर्जन के बाद नदी तालाब पर बोझ न बढ़े, यही भाव है। मिट्टी या घुलनशील मूर्ति कई परिवार चुनते हैं।
Ganesh Chaturthi 2026: कितने दिन रखें, यह श्रद्धा पर है
कुछ घर डेढ़ दिन में विसर्जन करते हैं। कुछ तीन, पांच या सात दिन रखते हैं। दस दिन वाली परंपरा महाभारत प्रसंग से जोड़ी जाती है। कोई अवधि अनिवार्य कानून नहीं, रीति और सुविधा देखकर निर्णय होता है।
गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक बप्पा को घर में बिठाने की दस दिन वाली परंपरा पंडित कौशल पांडेय महाभारत लेखन की मान्यता से जोड़ते हैं। वेदव्यास के अनुरोध पर गणेश जी ने लिखा, शरीर पर मिट्टी का लेप हुआ और दसवें दिन जल स्नान कराया गया। इसी स्नान को विसर्जन का रूप माना जाता है। 2026 में स्थापना 14 सितंबर को 11:02 से 1:31 बजे के बीच और मुख्य विसर्जन 25 सितंबर को बताया गया है। पूजा में दूर्वा चढ़ाएं, तुलसी न चढ़ाएं और इको फ्रेंडली मूर्ति का ध्यान रखें। यह कथा श्रद्धा की है, ऐतिहासिक दस्तावेज का दावा नहीं। भक्त अपनी परंपरा के अनुसार दिन तय कर सकते हैं।
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