Sugarcane FRP 2026-27: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश के करोड़ों गन्ना किसानों के हित में एक बहुत बड़ा फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार ने आगामी चीनी सत्र 2026-27 के लिए गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी में 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब गन्ने का नया भाव 365 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। सरकार के इस कदम से न केवल उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों के किसानों को लाभ होगा बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सरकार लगातार किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें खेती की बढ़ती लागत से राहत दिलाने का प्रयास कर रही है।
Sugarcane FRP 2026-27: गन्ने के नए एफआरपी का पूरा गणित और रिकवरी दर का फायदा
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने चीनी सत्र 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत की बुनियादी रिकवरी दर को आधार मानते हुए 365 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत तय की है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर गन्ने से चीनी निकलने की दर 10.25 प्रतिशत रहती है तो किसानों को न्यूनतम 365 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलेगा। इतना ही नहीं सरकार ने किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाला गन्ना उगाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक विशेष बोनस की भी व्यवस्था की है। यदि गन्ने की रिकवरी दर 10.25 प्रतिशत से ऊपर जाती है तो प्रत्येक 0.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी पर किसानों को 3.56 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। इस नीति से उन प्रगतिशील किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो आधुनिक बीजों और उन्नत खेती की तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
एक करोड़ किसानों और लाखों मजदूरों की झोली में आएंगे एक लाख करोड़ रुपये

सरकार का अनुमान है कि एफआरपी में की गई इस बढ़ोतरी से देशभर के लगभग एक करोड़ गन्ना किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो इस वृद्धि के बाद गन्ना किसानों की कुल आय में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी होने की संभावना है। गन्ने की खेती केवल किसानों तक ही सीमित नहीं है बल्कि इससे लगभग पांच लाख खेतिहर मजदूर और लाखों अन्य लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। चीनी मिलों के सुचारू संचालन और गन्ने की अच्छी कीमत मिलने से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसानों के हाथ में ज्यादा पैसा आएगा तो बाजार में मांग बढ़ेगी जिससे पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और हरियाणा जैसे राज्यों में जहां गन्ना मुख्य नकदी फसल है वहां इस फैसले का व्यापक असर देखने को मिलेगा।
पिछले एक दशक में गन्ने के समर्थन मूल्य में लगातार बढ़ोतरी
कैबिनेट के इस फैसले के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान हर साल गन्ने के एफआरपी में निरंतर वृद्धि की है। यह लगातार बढ़ोतरी इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लेकर गंभीर है। सरकार का मुख्य उद्देश्य कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए किसानों को उनकी लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत का मुनाफा देना है। वर्तमान में जो 365 रुपये की कीमत तय की गई है वह उत्पादन की अनुमानित लागत से लगभग 200 प्रतिशत से भी अधिक है। इस निरंतरता ने किसानों के भीतर भविष्य को लेकर एक सुरक्षा का भाव पैदा किया है जिससे अधिक से अधिक युवा अब गन्ने की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
एथनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम और भविष्य की आत्मनिर्भर ऊर्जा नीति
गन्ने की कीमत बढ़ाने का यह फैसला केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं है बल्कि इसका एक बड़ा सिरा भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता से भी जुड़ा हुआ है। सरकार गन्ने के रस और शीरे से एथनॉल बनाने के काम को तेजी से बढ़ावा दे रही है। भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने का एक बड़ा लक्ष्य रखा है जिसे हासिल करने में गन्ना किसान सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। जब चीनी की वैश्विक कीमतें कम होती हैं या मिलों के पास स्टॉक ज्यादा हो जाता है तब एथनॉल उत्पादन किसानों के भुगतान को सुनिश्चित करने का एक वैकल्पिक रास्ता बनता है। इससे न केवल पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है बल्कि पर्यावरण को भी प्रदूषण से बचाने में मदद मिल रही है। नई एफआरपी दरें लागू होने के बाद चीनी मिलों के पास पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध होगा जिससे एथनॉल उत्पादन की गति और तेज होगी।
रेलवे की बड़ी परियोजनाओं को भी मिली कैबिनेट की हरी झंडी
केंद्रीय मंत्रिमंडल की इस बैठक में केवल कृषि ही नहीं बल्कि बुनियादी ढांचे के विकास पर भी जोर दिया गया है। कैबिनेट ने रेल मंत्रालय की तीन प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी है जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग 23,437 करोड़ रुपये बताई गई है। इन परियोजनाओं के तहत नागदा-मथुरा, गुंतकल-वाडी और बुरहवाल-सीतापुर रेल खंडों पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी। इन नई रेल लाइनों के निर्माण से न केवल यात्री ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी बल्कि मालगाड़ियों की आवाजाही भी सुगम होगी। इसका सीधा लाभ छह राज्यों के 19 जिलों को मिलेगा जिससे वहां के स्थानीय व्यापार और उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी। रेलवे की ये परियोजनाएं कनेक्टिविटी में सुधार करने के साथ-साथ भविष्य की लॉजिस्टिक्स जरूरतों को पूरा करने के लिए मील का पत्थर साबित होंगी।
Sugarcane FRP 2026-27: किसानों के लिए चुनौतियां और सरकार द्वारा तकनीकी समाधान
हालांकि एफआरपी में बढ़ोतरी एक बड़ा सकारात्मक कदम है लेकिन गन्ना किसान आज भी कई पुरानी समस्याओं से जूझ रहे हैं। चीनी मिलों द्वारा समय पर भुगतान न करना और जल संकट जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार डिजिटल पेमेंट सिस्टम और एथनॉल नीति के जरिए मिलों की तरलता बढ़ा रही है ताकि किसानों का बकाया समय पर मिल सके। इसके साथ ही सरकार किसानों को सूक्ष्म सिंचाई यानी ड्रिप इरिगेशन अपनाने की सलाह दे रही है ताकि कम पानी में अधिक उत्पादन लिया जा सके। गन्ने की उन्नत किस्मों के विकास के लिए भी अनुसंधान संस्थानों को ज्यादा फंड दिया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करते हैं और अपनी रिकवरी दर में सुधार लाते हैं तो वे इस नई एफआरपी का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं।
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