Weather Alert March 2026: मार्च का महीना खत्म होने को है लेकिन मौसम अभी भी चैन से बैठने का नाम नहीं ले रहा। इस पूरे महीने में कभी तेज गर्मी ने लोगों को परेशान किया तो कभी अचानक बारिश और ओलावृष्टि ने माहौल बदल दिया। अब एक बार फिर एक नए पश्चिमी विक्षोभ के आने से उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम में बड़ा बदलाव होने वाला है। भारतीय मौसम विभाग यानी IMD ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है। अगले चार दिनों तक आंधी, बारिश और ओले गिरने की संभावना बनी हुई है।
क्या होता है पश्चिमी विक्षोभ और इसका कैसे पड़ता है असर?
पश्चिमी विक्षोभ एक तरह का मौसमी तंत्र है जो भूमध्य सागर और उसके आसपास के इलाकों से आता है और अफगानिस्तान, पाकिस्तान होते हुए उत्तर भारत तक पहुंचता है। जब भी यह विक्षोभ आता है तो अपने साथ नमी लेकर आता है, जिसकी वजह से पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होती है।
मार्च के महीने में ऐसे कई पश्चिमी विक्षोभ आए हैं और अब एक नया विक्षोभ फिर दस्तक दे रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक इसकी वजह से अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत के बड़े हिस्से में मौसम बदला-बदला रहेगा।
दिल्ली में येलो अलर्ट, तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। इसका मतलब यह है कि लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। सोमवार को शहर में हल्की बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कभी-कभी हवा की गति झोंकों में 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक भी पहुंच सकती है।
मौसम विभाग ने खास तौर पर दिल्ली के कुछ इलाकों का जिक्र किया है जहां बारिश की ज्यादा संभावना है। पंजाबी बाग, राजौरी गार्डन, पटेल नगर और बुद्धा जयंती पार्क जैसे इलाकों में रविवार शाम के बाद से ही हल्की बारिश शुरू हो सकती है। सोमवार को शाम से रात तक बूंदाबांदी जारी रहने और 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।
अगर आप दिल्ली में रहते हैं और आने वाले दिनों में बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं, तो छाता साथ रखें और दोपहिया वाहन चलाते समय थोड़ी सावधानी बरतें।
तापमान में भी आएगी गिरावट, मिलेगी गर्मी से राहत
बारिश और आंधी के साथ-साथ एक और राहत भरी खबर यह है कि अगले 48 घंटों में दिल्ली और आसपास के इलाकों में तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है। आने वाले दो दिनों में अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान करीब 17 डिग्री सेल्सियस तक नीचे जा सकता है।
मार्च के आखिरी हफ्ते में जब पारा चढ़ने लगा था और लोग गर्मी से परेशान होने लगे थे, तब इस बारिश और ठंडी हवाओं से उन्हें काफी राहत मिलेगी। हालांकि आंधी और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
पहाड़ों में बारिश और बर्फबारी का दौर
पश्चिमी विक्षोभ का सबसे ज्यादा असर पहाड़ी राज्यों पर पड़ता है। इस बार भी कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड तक के पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू होने वाला है।
30 मार्च को उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। हिमाचल और उत्तराखंड के कई जिलों में मूसलाधार बारिश हो सकती है। उत्तराखंड में कुछ जगहों पर ओले भी गिर सकते हैं। पहाड़ों पर जाने की योजना बना रहे पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय प्रशासन की सूचनाओं पर नजर रखें और मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करें।
ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना है जिससे रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं। इसलिए इन दिनों में पहाड़ी इलाकों की यात्रा करते समय खास सावधानी बरतना जरूरी है।
पूर्वोत्तर भारत में भी बदलेगा मौसम
इस बार मौसम का असर सिर्फ उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत तक सीमित नहीं रहेगा। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी इस हफ्ते मौसम बदला-बदला रहेगा। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा और मिजोरम में 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच कई जगहों पर मध्यम से तेज बारिश हो सकती है।
पूर्वोत्तर के लोगों के लिए यह मौसम नया नहीं है क्योंकि इस हिस्से में पहले से ही अच्छी बारिश होती है। लेकिन अचानक तेज बारिश और तूफानी हवाओं से बचाव के लिए सतर्क रहना जरूरी होगा।
बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी अलर्ट
पूर्वी भारत के राज्यों में भी मौसम विभाग ने आगाह किया है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान है। 31 मार्च को बिहार और तटीय पश्चिम बंगाल में तूफानी हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में भी 2 अप्रैल तक मध्यम बारिश की संभावना है। यानी इस बार मौसम का बदलाव देश के एक बड़े हिस्से को प्रभावित करने वाला है।
किसानों के लिए चिंता की बात, फसलों को हो सकता है नुकसान
जहां एक तरफ यह बारिश आम लोगों को गर्मी से राहत देगी, वहीं दूसरी तरफ किसानों के लिए यह मौसम परेशानी लेकर आ सकता है। मार्च और अप्रैल के महीने में रबी की फसल तैयार होती है और किसान गेहूं समेत अन्य फसलों की कटाई की तैयारी में होते हैं।
ऐसे में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान होने की आशंका है। खासकर ओले गिरने से गेहूं और सरसों की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि अगर फसल कटाई के लिए तैयार है तो मौसम की अनुमति होते ही जल्द से जल्द कटाई कर लें और फसल को सुरक्षित जगह रखें।
अप्रैल में गर्मी का क्या होगा हाल?
मौसम जानकारों का कहना है कि बार-बार आने वाले पश्चिमी विक्षोभों की वजह से अप्रैल महीने में तापमान सामान्य से दो से तीन डिग्री कम रह सकता है। यानी अप्रैल की शुरुआत में भी लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलती रहेगी।
हालांकि 20 अप्रैल के बाद से गर्मी धीरे-धीरे बढ़ने लगेगी। मई आते-आते तापमान सामान्य स्तर पर आ जाएगा और मैदानी इलाकों में लू चलने की आशंका भी रहेगी। इसलिए जब तक ठंडा मौसम है तब तक इसका आनंद लें और आने वाली गर्मी के लिए खुद को तैयार रखें।
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