Kerala High Court Judges Pahalgam: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में केरल हाईकोर्ट के तीन जज जस्टिस अनिल के नरेंद्रन, जस्टिस जी गिरीश और जस्टिस पीजी अजित कुमार बाल-बाल बच गए। तीनों जज अपने परिवार के साथ जम्मू-कश्मीर में छुट्टियां मना रहे थे। जस्टिस नरेंद्रन की डल झील में नाव की सवारी के लिए श्रीनगर लौटने की जिद ने सबकी जान बचाई, क्योंकि पूरा दल हमले से कुछ घंटे पहले ही पहलगाम छोड़ चुका था।
Insistence on a boat ride in Dal Lake saved the lives of three judges: सुबह छोड़ दिया था पहलगाम
मुख्य बातें
- 17 अप्रैल को पहुंचा था आठ सदस्यीय दल
- डल झील में नाव की सवारी की जिद
- कानूनी हलकों में फैली थी चिंता
- पहलगाम हमला: एक नजर

17 अप्रैल को पहुंचा था आठ सदस्यीय दल
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, जजों और उनके परिवारों का आठ सदस्यीय दल 17 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर पहुंचा था। दल ने पहले जिले के कई इलाकों का दौरा किया और सोमवार, 21 अप्रैल को पहलगाम पहुंचा। इलाके का दौरा करने और कुछ मंदिरों सहित प्रमुख पर्यटन स्थल घूमने के बाद ये लोग दिनभर पहलगाम में रुके।
मंगलवार, 22 अप्रैल को सुबह करीब 9:30 बजे, यानी हमले से कुछ घंटे पहले, पूरा दल पहलगाम से श्रीनगर के लिए निकल गया। रिपोर्टों के अनुसार पहलगाम से श्रीनगर की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है।
डल झील में नाव की सवारी की जिद
जस्टिस नरेंद्रन ने द हिंदू को बताया कि सोमवार को मौसम सुहावना था और उन्होंने उसी दिन ज्यादातर पर्यटन स्थल देख लिए थे। उन्हें घुमाने वाले वाहन चालक ने आसपास के और पर्यटन स्थल दिखाने की पेशकश की थी। लेकिन उन्होंने डल झील में नाव की सवारी के लिए उसी दिन श्रीनगर लौटने पर जोर दिया, क्योंकि वे पहले भी इस इलाके में आ चुके थे। इसी फैसले की वजह से पूरा दल सुरक्षित श्रीनगर पहुंच गया।
जस्टिस अजित कुमार ने बताया कि आतंकी हमला दोपहर के आसपास हुआ और तब तक वे सुरक्षित श्रीनगर पहुंच चुके थे। उनके अनुसार दल करीब 2 बजे श्रीनगर पहुंचा था। जस्टिस नरेंद्रन ने यह भी बताया कि श्रीनगर के होटल में उनकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जो हमले में बाल-बाल बचा था और बुरी तरह सहमा हुआ था।
कानूनी हलकों में फैली थी चिंता
जजों के हमले के समय जम्मू-कश्मीर में होने की खबर से केरल के कानूनी हलकों में चिंता फैल गई थी। लाइव लॉ और बार एंड बेंच ने भी पुष्टि की कि तीनों जज हमले से कुछ घंटे पहले पहलगाम छोड़ चुके थे। यह जानकारी सामने आने के बाद उनके दोस्तों और शुभचिंतकों ने राहत की सांस ली। जजों ने बताया था कि वे जल्द ही केरल लौटेंगे।
पहलगाम हमला: एक नजर
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन इलाके में आतंकियों ने पर्यटकों पर गोलीबारी की थी। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इसे मुंबई 26/11 हमले के बाद देश में आम नागरिकों पर हुआ सबसे बड़ा आतंकी हमला बताया गया। हमले के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए, जिनमें सिंधु जल संधि को स्थगित करना और पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना शामिल था।
बैसरन घास का मैदान पहलगाम के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है, जहां पर्यटक बड़ी संख्या में घुड़सवारी और सैर के लिए पहुंचते हैं। हमले के समय वहां मौजूद कई परिवारों की कहानियां बाद में सामने आईं, जिनमें कुछ लोग संयोग से बच गए। केरल हाईकोर्ट के तीनों जजों का बचना भी ऐसा ही एक संयोग रहा, जिसमें छोटे से फैसले ने पूरे परिवार को खतरे से दूर कर दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
पहलगाम हमले में कौन से जज बाल-बाल बचे?
केरल हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल के नरेंद्रन, जस्टिस जी गिरीश और जस्टिस पीजी अजित कुमार अपने परिवारों के साथ बाल-बाल बच गए।
जजों ने पहलगाम कब छोड़ा था?
दल ने 22 अप्रैल 2025 की सुबह करीब 9:30 बजे पहलगाम छोड़ा था, जो हमले से कुछ घंटे पहले था।
उनकी जान कैसे बची?
जस्टिस नरेंद्रन ने डल झील में नाव की सवारी के लिए उसी दिन श्रीनगर लौटने की जिद की थी, जिसकी वजह से पूरा दल हमले से पहले पहलगाम से निकल गया।
पहलगाम आतंकी हमले में कितने लोगों की मौत हुई?
इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे।

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