New Delhi। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 25 सितंबर को एक प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने के मामले पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने गंभीर चिंता जताई है। प्रेस क्लब ने 26 सितंबर 2026 को जारी बयान में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पत्रकारों को सुरक्षित माहौल में काम करने देने की मांग की है।
प्रेस क्लब के अनुसार, द फ्रंटलाइन के पत्रकार वेदांत लखेड़ा और द वायर के मोहम्मद इरफान प्रदर्शन की कवरेज कर रहे थे और दोनों के पास प्रेस आईडी मौजूद थी। बयान में कहा गया है कि लखेड़ा को उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह पुलिसकर्मियों से उनके नाम-पट्टे नहीं होने को लेकर सवाल कर रहे थे।
प्रेस क्लब के मुताबिक, लखेड़ा को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने ले जाया गया और उनसे एक तस्वीर डिलीट करने के लिए कहा गया, जिसे उन्होंने डिलीट नहीं किया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। वहीं, इरफान को द्वारका के एक पुलिस थाने ले जाया गया, जहां उन्हें प्रदर्शनकारियों के साथ कई घंटों तक हिरासत में रखा गया और बाद में रिहा किया गया।
बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि जंतर-मंतर पर एक पुलिसकर्मी ने इरफान का माइक्रोफोन छीनकर अलग रख दिया। प्रेस क्लब के अनुसार, माइक्रोफोन पर संबंधित मीडिया संगठन का लोगो लगा था और बाद में वह नहीं मिला। प्रदर्शन की कवरेज कर रहे अन्य पत्रकारों ने भी पुलिस के व्यवहार को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं। प्रेस क्लब ने कहा कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में कुछ पत्रकारों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने दिल्ली पुलिस से घटना को लेकर संबंधित पत्रकारों से माफी मांगने की अपील की है। साथ ही, भविष्य में पत्रकारों को अपना काम करने से इस तरह बाधित नहीं करने की मांग की गई है। बयान पर प्रेस क्लब की अध्यक्ष संगीता बरुआ पिशारोती और महासचिव अफजल इमाम के नाम हैं।

