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Jharkhand News: सरकारी दफ्तर ही निकले सबसे बड़े बकायेदार, मेदिनीनगर नगर निगम का 6 करोड़ रुपये दबाए बैठे, विकास कार्य ठप

Jharkhand News: झारखंड के पलामू जिले का मेदिनीनगर नगर निगम इन दिनों खुद भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इस संकट का कारण आम जनता नहीं, बल्कि खुद सरकारी विभाग हैं। एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि शहर में स्थित विभिन्न सरकारी विभागों पर नगर निगम का लगभग 6 करोड़ रुपये का होल्डिंग टैक्स बकाया है। जिन विभागों पर नियम-कानून लागू कराने की जिम्मेदारी है, वही सालों से टैक्स न देकर निगम के खजाने को खाली कर रहे हैं।

विकास कार्यों पर लगा ब्रेक

इस भारी-भरकम बकाये का सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर पड़ रहा है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि राजस्व की कमी के कारण वे शहर में सड़क, नाली, और स्ट्रीट लाइट जैसे बुनियादी कामों को भी ठीक से नहीं करा पा रहे हैं। एक तरफ निगम आम जनता से टैक्स देने की अपील करता है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी कार्यालयों से ही उन्हें सहयोग नहीं मिल रहा है, जिससे निगम की वित्तीय स्थिति चरमरा गई है।

कलेक्ट्रेट से लेकर पुलिस लाइन तक, सब हैं बकायेदार

बकायेदारों की इस लिस्ट में लगभग सभी प्रमुख सरकारी दफ्तर शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, सबसे बड़े बकायेदारों में समाहरणालय (कलेक्ट्रेट), एसपी कार्यालय, पुलिस लाइन, ब्लॉक कार्यालय और शहर में स्थित सैकड़ों सरकारी आवास शामिल हैं। इन विभागों ने कई सालों से अपना होल्डिंग टैक्स जमा नहीं किया है। यह बकाया राशि धीरे-धीरे बढ़कर अब 6 करोड़ रुपये के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है।

नोटिस का भी नहीं हो रहा कोई असर

मेदिनीनगर नगर निगम के अनुसार, इन सभी बकायेदार सरकारी विभागों को कई बार नोटिस भेजा जा चुका है। निगम ने पत्र लिखकर विभाग प्रमुखों से बकाया चुकाने का अनुरोध किया है, लेकिन इन नोटिसों का कोई खास असर नहीं हो रहा है। बड़े सरकारी दफ्तरों से टैक्स वसूली निगम के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि कोई भी विभाग इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहा है।

आम जनता पर कैसे पड़ रहा है असर?

यह विडंबना ही है कि जो सरकारी दफ्तर आम जनता से समय पर टैक्स और बिल चुकाने की उम्मीद करते हैं, वे खुद अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं। इस 6 करोड़ रुपये के बकाये के कारण निगम के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक का संकट खड़ा हो गया है। अगर ये विभाग अपना बकाया चुका दें, तो शहर में रुके हुए कई विकास कार्यों को फिर से शुरू किया जा सकता है और आम जनता को बेहतर सुविधाएं दी जा सकती हैं।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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