Jharkhand News: झारखंड में शनिवार (20 सितंबर) का दिन रेल यात्रियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। कुर्मी समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर किए गए ‘रेल टेका’ (रेल रोको) आंदोलन ने राज्य भर में रेलवे नेटवर्क को ठप कर दिया। राज्य के 40 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर प्रदर्शनकारियों ने पटरियों पर कब्जा जमा लिया, जिससे 83 से अधिक ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं और 2 लाख से अधिक यात्री जहां-तहां फंसे रह गए। इस आंदोलन का सबसे बुरा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ा, जो कई घंटों तक बिना पानी और भोजन के परेशान होते रहे।
एसटी दर्जे की मांग को लेकर पटरियों पर उतरे प्रदर्शनकारी
यह ‘रेल टेका’ आंदोलन आदिवासी कुर्मी समाज के बैनर तले आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग कुर्मी (कुड़मी) जाति को फिर से अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल करना और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह देना है। शनिवार सुबह 4 बजे से ही हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी ढोल-नगाड़ों के साथ रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने लगे और पटरियों पर बैठ गए। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से रांची, धनबाद और खड़गपुर रेल मंडलों के Muri, Pradhankhanta, Parasnath, Rai, और Tatisilwai जैसे स्टेशनों पर केंद्रित रहा।
वंदे भारत और राजधानी समेत 83 से अधिक ट्रेनें रद्द
इस आंदोलन का सीधा असर हावड़ा-नई दिल्ली ग्रैंड कॉर्ड लाइन और रांची-हावड़ा रूट पर पड़ा। रेलवे को मजबूरन 83 से अधिक ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, जबकि 100 से ज्यादा ट्रेनों को या तो डायवर्ट किया गया या फिर गंतव्य से पहले ही शॉर्ट-टर्मिनेट कर दिया गया। रद्द होने वाली ट्रेनों में टाटा-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस और राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनें भी शामिल थीं। वंदे भारत एक्सप्रेस को मुरी स्टेशन पर ही रोक दिया गया, जिसके बाद यात्रियों ने वहां हंगामा भी किया।
2 लाख से अधिक यात्री परेशान, बच्चे-बुजुर्ग भूखे-प्यासे
इस अचानक हुए चक्का जाम से 2 लाख से अधिक यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। विभिन्न स्टेशनों पर फंसे यात्रियों का हाल बेहाल था। सबसे ज्यादा दिक्कतें बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को हुईं, जो घंटों तक ट्रेनों या स्टेशनों पर बिना भोजन और पानी के फंसे रहे। पुणे जा रही एक महिला यात्री ने बताया कि वह अपनी बीमार बेटी से मिलने जा रही थीं, लेकिन ट्रेन रद्द होने से वह घाटशिला में फंस गईं। कई यात्रियों की कनेक्टिंग ट्रेनें छूट गईं, जिससे उनकी पूरी यात्रा योजना चौपट हो गई।
देर रात खत्म हुआ आंदोलन, आज भी कई ट्रेनें प्रभावित
इस आंदोलन को आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश महतो समेत कई राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिला, जो खुद मुरी स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों के साथ बैठे। दिन भर प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत चलती रही। आखिरकार, देर रात (लगभग 10:30 बजे) केंद्र सरकार से बातचीत का आश्वासन मिलने के बाद ज्यादातर जगहों से पटरियों को खाली कर दिया गया और आंदोलन समाप्त हुआ। हालांकि, इस 12 घंटे से अधिक के चक्का जाम के कारण रेलवे का टाइम-टेबल पूरी तरह बिगड़ गया है, जिसका असर आज, रविवार 21 सितंबर को भी देखने को मिल रहा है और कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से चल रही हैं।



