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Jharkhand News: मां ने ‘हड़िया’ बेचकर बेटी को बनाया एथलीट, पाकिस्तान में देश के लिए दौड़ेगी झारखंड की बसंती

Jharkhand News: यह कहानी है दृढ़ संकल्प और एक मां के त्याग की। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सुदूर गुवा इलाके की रहने वाली बसंती हेंब्रम (Basanti Hembrom) ने गरीबी, सामाजिक तानों और पिता को खोने के दर्द को मात देते हुए भारतीय एथलेटिक्स टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है। बसंती का चयन 26 से 30 अक्टूबर तक पाकिस्तान के लाहौर में होने वाली सैफ सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए हुआ है। वह 25 अक्टूबर को दिल्ली से टीम के साथ पाकिस्तान के लिए उड़ान भरेंगी।

Jharkhand News: पिता की मौत के बाद मां बनीं सहारा

बसंती का सफर कांटों भरा रहा है। वह एक बेहद गरीब परिवार से आती हैं। उनके पिता चंद्र मोहन हेंब्रम, सेल (SAIL) की गुवा खदान में एक ठेका मजदूर थे। 2021 में, बीमारी के कारण उनका निधन हो गया, जिससे पूरा परिवार (मां, तीन बहनें और एक भाई) पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में कमाने वाला कोई नहीं था, लेकिन बसंती की मां, जयबाला हेंब्रम, ने हार नहीं मानी।

परिवार का पेट पालने और बसंती के सपनों को जिंदा रखने के लिए मां ने वह काम शुरू किया जिसे समाज अच्छी नजर से नहीं देखता। उन्होंने पारंपरिक पेय ‘हड़िया’ (स्थानीय शराब) बेचना शुरू कर दिया। इसी से होने वाली छोटी सी आमदनी से उन्होंने परिवार को पाला और बसंती की ट्रेनिंग और डाइट का खर्च उठाया।

सहे गांव और रिश्तेदारों के ताने

एक तरफ आर्थिक तंगी थी, तो दूसरी तरफ समाज के ताने। जब बसंती ने एथलीट बनने के लिए शॉर्ट्स पहनकर दौड़ना शुरू किया, तो गांव वालों और रिश्तेदारों ने तरह-तरह की बातें बनाईं। लोगों ने उनकी मां को ताने दिए कि “लड़की को दौड़ाकर क्या मिलेगा?” लेकिन बसंती और उनकी मां ने इन तानों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया।

मेहनत लाई रंग, गोल्ड मेडल्स का अंबार

कोच एस.के. तोमर के मार्गदर्शन में बसंती ने अपनी प्रतिभा को निखारा और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

  • 2018: राज्य स्तरीय स्कूल गेम्स में 1500 मीटर और 800 मीटर में गोल्ड मेडल।
  • 2019: सैफ एथलेटिक्स में 1500 मीटर में गोल्ड मेडल।
  • 2019: इंटर-डिस्ट्रिक्ट एथलेटिक्स में 1500 मीटर में गोल्ड मेडल।
  • 2019: जूनियर नेशनल एथलेटिक्स में 1500 मीटर में गोल्ड मेडल।
  • 2019: खेलो इंडिया में 1500 मीटर में कांस्य पदक।
  • 2025: नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 1500 मीटर में रजत पदक (इसी प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन पाकिस्तान के लिए हुआ)।

DMFT और SAIL ने बढ़ाया मदद का हाथ

बसंती की इस असाधारण प्रतिभा और संघर्ष को देखते हुए, अब उन्हें जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) से मदद मिल रही है। इसके अलावा, सेल (SAIL) की गुवा खदान प्रबंधन ने भी अपनी सीएसआर (CSR) पहल के तहत बसंती को 50,000 रुपये का चेक सौंपा है, ताकि वह अपनी ट्रेनिंग और किट का खर्च उठा सकें।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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