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सुशांत सिंह राजपूत केस: CBI ने दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट, रिया चक्रवर्ती को क्लीन चिट; परिवार ने लगाए आरोप

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी मौत के चार साल बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कोर्ट में अपनी क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी है। इस रिपोर्ट में सुशांत की मौत को साफ-साफ आत्महत्या बताया गया है, जबकि उनकी पूर्व गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार को किसी भी गलत काम से पूरी तरह बरी कर दिया गया है। CBI ने सुशांत के पिता केके सिंह द्वारा रिया व उनके परिवार पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों वाली FIR के जवाब में पटना कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। वहीं, रिया द्वारा सुशांत की बहनों और परिवार पर लगाए गए आरोपों वाली FIR के लिए मुंबई कोर्ट में भी ऐसी ही रिपोर्ट सौंपी गई है। पटना कोर्ट में इस क्लोजर रिपोर्ट पर 20 दिसंबर को सुनवाई तय है। इस फैसले से सुशांत का परिवार नाराज है और उन्होंने इसे ‘अधूरी जांच’ करार देते हुए कोर्ट में विरोध दर्ज कराने का ऐलान किया है।

CBI क्लोजर रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु क्लोजर रिपोर्ट के अनुसार, सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून 2020 को मुंबई के बांद्रा स्थित फ्लैट में खुद फंदा लगाकर आत्महत्या की। जांच में किसी भी आरोपी द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाने, धमकाने या दबाव डालने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:

  • जांच से पता चला कि 8 जून से 14 जून 2020 (जिस दिन सुशांत का शव पंखे से लटका मिला) के बीच रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शौविक या कोई अन्य आरोपी सुशांत के फ्लैट पर मौजूद नहीं था। रिया और शौविक ने 8 जून को ही सुशांत का घर छोड़ दिया था और उसके बाद वे कभी लौटे नहीं।
  • सुशांत ने 10 जून को शौविक से व्हाट्सएप पर 1,441 शब्दों की लंबी बातचीत की, लेकिन रिया से 8 से 14 जून के बीच कोई कॉल, चैट या संवाद नहीं हुआ। रिया या उनके परिवार से सुशांत की किसी भी मीटिंग का कोई प्रमाण नहीं मिला।
  • सुशांत की मैनेजर श्रुति मोदी फरवरी 2020 से फ्लैट पर नहीं आ रही थीं, क्योंकि उन्हें पैर में फ्रैक्चर हो गया था। वहीं, सुशांत की बहन मीतू सिंह 8 से 12 जून तक उनके साथ फ्लैट में रहीं। इससे साफ है कि घटना के आसपास कोई बाहरी दबाव नहीं था।
  • जांच एजेंसी को किसी भी आरोपी द्वारा सुशांत को आत्महत्या के लिए भड़काने या मजबूर करने का कोई प्रमाण नहीं हाथ लगा। AIIMS की मेडिको-लीगल रिपोर्ट में भी जहर या गला घोंटने जैसे हत्या के कोई निशान नहीं पाए गए।

वित्तीय पहलू की जांच: धोखाधड़ी के आरोप खारिज क्लोजर रिपोर्ट में वित्तीय कोण को भी साफ किया गया है। रिया पर सुशांत की संपत्ति से बिना बताए सामान ले जाने या धोखा देने के आरोप लगे थे, लेकिन जांच में ये बेबुनियाद साबित हुए।

8 जून को रिया जब फ्लैट छोड़ रही थीं, तो उन्होंने अपना एप्पल लैपटॉप और सुशांत द्वारा गिफ्ट की गई एप्पल वॉच अपने साथ ले ली। जांच में पाया गया कि ये चीजें उनकी अपनी थीं या सुशांत की सहमति से ली गईं। कोई चोरी या बिना बताए ले जाने का सबूत नहीं मिला।

सुशांत और रिया अप्रैल 2019 से जून 2020 तक लिव-इन रिलेशनशिप में थे। सुशांत ने अपने फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिटानी से कहा था कि ‘रिया परिवार का हिस्सा है’। इसलिए, रिया पर हुए खर्चे (जैसे अक्टूबर 2019 में सुशांत के मैनेजर द्वारा बुक कराई यूरोप ट्रिप की टिकटें) को IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।

रिया या उनके परिवार द्वारा सुशांत को धमकाने या आत्महत्या के लिए मजबूर करने का कोई प्रमाण नहीं। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि सुशांत को अवैध रूप से कैद करने या रोकने का भी कोई केस नहीं बनता।

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यह क्लोजर रिपोर्ट CBI की लंबी जांच का नतीजा है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2020 में शुरू हुई थी। सुशांत का परिवार इसे ‘आंखों में धूल झोंकने’ वाला बता रहा है, क्योंकि इसमें चैट्स, मेडिकल रिकॉर्ड्स, बैंक स्टेटमेंट्स जैसे दस्तावेज शामिल नहीं हैं। उनका वकील वरुण सिंह कहते हैं कि यह ‘फ्लिम्सी रिपोर्ट’ कोर्ट में टिक नहीं पाएगी। अब कोर्ट का फैसला तय करेगा कि केस बंद होता है या आगे जांच। सुशांत की मौत ने न सिर्फ बॉलीवुड को झकझोरा, बल्कि मीडिया ट्रायल और साजिश सिद्धांतों की भरमार भी पैदा की, जो आज भी बहस का विषय बनी हुई है।

Vaibhav tiwari
Author: Vaibhav tiwari

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