Jharkhand News: झारखंड पुलिस अपनी संचार व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए 893 अत्याधुनिक वायरलेस उपकरण खरीदने जा रही है। ये उपकरण राज्य भर के थानों और आउटपोस्ट में वितरित किए जाएंगे ताकि सूचना के आदान-प्रदान में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर किया जा सके। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाना और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। इन उपकरणों की खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और तकनीकी मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए एडीजी आधुनिकीकरण की अध्यक्षता में एक छह सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति उपकरणों की गुणवत्ता, उपयोगिता और तकनीकी मानकों की विस्तृत जांच के बाद खरीद को अंतिम रूप देगी।
विशेष समिति का गठन और जिम्मेदारियां

झारखंड पुलिस द्वारा वायरलेस उपकरणों की खरीद को पारदर्शी और मानक प्रक्रिया के अनुरूप बनाने के लिए एक विशेष छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता एडीजी आधुनिकीकरण करेंगे। समिति के अन्य सदस्यों में आईजी अभियान, डीआईजी कार्मिक, वित्त विभाग के अवर सचिव, उद्योग विभाग के अवर सचिव तथा मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग के सहायक अभियंता शामिल हैं। यह विविध विभागों से लिए गए सदस्यों की समिति है जो यह सुनिश्चित करेगी कि खरीद प्रक्रिया में सभी पहलुओं का ध्यान रखा जाए। समिति की जिम्मेदारी केवल खरीद को मंजूरी देना नहीं है, बल्कि उपकरणों की गुणवत्ता, उपयोगिता और तकनीकी विशिष्टताओं की विस्तृत जांच करना भी है। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि खरीदे जाने वाले उपकरण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों और झारखंड की भौगोलिक परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
वर्तमान संचार व्यवस्था की समस्याएं
झारखंड पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में कई स्थानों पर पुराने एनालॉग संचार सिस्टम के कारण गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। ये पुराने उपकरण न केवल तकनीकी रूप से पुराने हो चुके हैं बल्कि इनकी मरम्मत और रखरखाव भी मुश्किल हो गया है। एनालॉग सिस्टम में संदेशों के प्रसारण में अक्सर बाधा आती है, जिससे महत्वपूर्ण सूचनाएं समय पर नहीं पहुंच पातीं। संचार में आ रही इन बाधाओं के कारण आपातकालीन स्थितियों में पुलिस की प्रतिक्रिया का समय प्रभावित हो रहा है। जब किसी घटना की सूचना मिलती है तो त्वरित कार्रवाई के लिए प्रभावी संचार अत्यंत आवश्यक है। पुराने उपकरणों के कारण कई बार संदेश स्पष्ट नहीं होते, कनेक्टिविटी टूट जाती है या फिर संदेश देरी से पहुंचते हैं। यह स्थिति विशेष रूप से दूरदराज के इलाकों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अधिक गंभीर है जहां प्रभावी संचार जीवन-मरण का प्रश्न हो सकता है।
आधुनिक डिजिटल प्रणाली के लाभ
नए अत्याधुनिक डिजिटल वायरलेस उपकरणों के लागू होने से झारखंड पुलिस की संचार व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार होने की उम्मीद है। डिजिटल सिस्टम एनालॉग की तुलना में कई गुना अधिक प्रभावी और विश्वसनीय होते हैं। सबसे पहला और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि संचार अधिक स्पष्ट होगा। डिजिटल तकनीक में ध्वनि की गुणवत्ता बेहतर होती है और पृष्ठभूमि का शोर कम होता है। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सुरक्षा है – डिजिटल संचार को एन्क्रिप्ट किया जा सकता है जिससे संवेदनशील पुलिस संचार को अनाधिकृत व्यक्तियों द्वारा सुने जाने से रोका जा सकता है। तीसरा लाभ गति है – डिजिटल सिस्टम में संदेश तेजी से प्रसारित होते हैं। इसके अलावा डिजिटल उपकरणों में डेटा ट्रांसमिशन, जीपीएस ट्रैकिंग और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होती हैं जो पुलिस कार्य को अधिक कुशल बनाती हैं।
खरीदे जाने वाले उपकरणों का विवरण
झारखंड पुलिस द्वारा खरीदे जाने वाले 893 वायरलेस उपकरणों में विभिन्न प्रकार के आधुनिक संचार उपकरण शामिल हैं। इनमें 164 वायरलेस इंटरसेप्टर उपकरण हैं जो संचार को मॉनिटर करने और आवश्यकता पड़ने पर इंटरसेप्ट करने में सहायक होंगे। 134 डिजिटल वैरी हाई फ्रीक्वेंसी बेस सेट खरीदे जाएंगे जो थानों और प्रमुख पुलिस स्टेशनों में स्थापित किए जाएंगे और एक केंद्रीय संचार हब के रूप में काम करेंगे। सबसे अधिक संख्या में 405 डिजिटल हैंड सेट खरीदे जाएंगे जो व्यक्तिगत पुलिस कर्मियों को दिए जाएंगे ताकि वे मोबाइल रहते हुए भी संपर्क में रह सकें। इसके अतिरिक्त 10 स्टैटिक हाई फ्रीक्वेंसी ट्रांसीवर भी खरीदे जाएंगे जो दूरस्थ संचार के लिए उपयोगी होंगे। ये विभिन्न प्रकार के उपकरण मिलकर एक समग्र और बहुस्तरीय संचार नेटवर्क बनाएंगे।
थानों और आउटपोस्ट में वितरण
खरीदे गए 893 वायरलेस उपकरणों को झारखंड के विभिन्न जिलों में स्थित थानों और आउटपोस्ट में वितरित किया जाएगा। इस वितरण की योजना इस प्रकार बनाई जाएगी कि जिन क्षेत्रों में संचार की समस्या सबसे अधिक गंभीर है, वहां पहले उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। विशेष ध्यान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों और दूरदराज के स्थानों पर दिया जाएगा जहां प्रभावी संचार जीवन रक्षक सिद्ध हो सकता है। प्रत्येक थाने को उसकी आवश्यकता और कार्यभार के अनुसार उपकरण आवंटित किए जाएंगे। बड़े थानों को अधिक हैंडसेट और बेस स्टेशन मिलेंगे जबकि छोटे आउटपोस्ट को बुनियादी संचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पूरे राज्य में एक एकीकृत संचार नेटवर्क स्थापित हो जिससे सभी पुलिस इकाइयां आपस में और मुख्यालय से निर्बाध रूप से जुड़ी रहें।
प्रशिक्षण और रखरखाव की व्यवस्था
नए डिजिटल उपकरणों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए पुलिस कर्मियों को उचित प्रशिक्षण देना आवश्यक होगा। एनालॉग से डिजिटल सिस्टम में संक्रमण के लिए तकनीकी समझ और नए प्रोटोकॉल की जानकारी जरूरी है। झारखंड पुलिस इन उपकरणों की आपूर्ति के साथ-साथ व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। प्रत्येक जिले में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे जहां पुलिस कर्मियों को नए उपकरणों का उपयोग, समस्या निवारण और रखरखाव सिखाया जाएगा। इसके अलावा तकनीकी सहायता के लिए विशेष टीमें भी गठित की जाएंगी जो उपकरणों की नियमित जांच और आवश्यक मरम्मत सुनिश्चित करेंगी। उचित रखरखाव से इन उपकरणों का जीवनकाल बढ़ेगा और वे लंबे समय तक कुशलता से काम करते रहेंगे।
Jharkhand News: पारदर्शी खरीद प्रक्रिया
झारखंड सरकार ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि इस महत्वपूर्ण खरीद में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए। इसीलिए विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों वाली समिति का गठन किया गया है। वित्त विभाग की उपस्थिति यह सुनिश्चित करेगी कि बजट का उचित उपयोग हो और कोई वित्तीय अनियमितता न हो। उद्योग विभाग के प्रतिनिधि यह देखेंगे कि आपूर्तिकर्ता विश्वसनीय हों और उनके पास आवश्यक प्रमाणपत्र हों। तकनीकी विशेषज्ञ उपकरणों की गुणवत्ता और विशिष्टताओं की जांच करेंगे। खरीद प्रक्रिया खुली टेंडर प्रणाली के माध्यम से की जाएगी जिससे प्रतिस्पर्धी दरें मिल सकें और सर्वोत्तम उपकरण खरीदे जा सकें।
यह पहल झारखंड पुलिस के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रभावी संचार किसी भी पुलिस बल की रीढ़ होता है और इन आधुनिक उपकरणों से झारखंड पुलिस की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।



