कोलकाता- पूर्वी कोलकाता के कंकुरगाछी इलाके में एक मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर गोदाम में बुधवार देर रात भीषण आग लग गई। इस हादसे में कई सिलेंडर फट गए, जिससे जोरदार धमाकों की आवाजें दूर-दूर तक सुनाई दीं। आसपास के लोग दहशत में घर छोड़कर सड़कों पर आ गए। गनीमत रही कि इस घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन कई घरों के शीशे टूट गए और संपत्ति का बड़ा नुकसान हुआ।
आग कैसे लगी और क्या हुआ?
घटना बुधवार रात करीब 2:30 बजे की है। कंकुरगाछी के लोहापट्टी इलाके में घोषबागान लेन नंबर 150 पर स्थित एक मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर गोदाम में अचानक आग भड़क उठी। पहले एक बड़ा धमाका हुआ, फिर एक के बाद एक कई सिलेंडर फटने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि 20-25 मिनट तक लगातार 100 से ज्यादा सिलेंडर फटे। धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि 2-3 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। कुछ लोगों ने इसे बम या मिसाइल हमले जैसा बताया।धमाकों से गोदाम के सिलेंडर उड़कर दूर तक जा गिरे। एक सिलेंडर तो सैकड़ों मीटर दूर एक आवासीय इमारत के पास गिरा। आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि आसपास के प्लास्टिक और लोहे के गोदामों में भी फैल गईं। एक जलता सिलेंडर पास की धागा फैक्ट्री में गिरा, जिससे वहां भी आग लग गई। पूरी सड़क पर मलबा बिखर गया और धुएं का गुबार छा गया।
लोगों में दहशत का माहौल
धमाकों की आवाज सुनकर आसपास के लोग नींद से जाग गए। माणिकतला और कंकुरगाछी के रहने वाले घरों से बाहर भागे। एक स्थानीय निवासी दिलीप कुमार गुप्ता ने कहा, “हमारे घर के बगल में ही गैस फैक्ट्री है। रात 2:30 बजे बड़ा धमाका हुआ। हम सब इमारत छोड़कर भागे। आवाज और झटका इतना तेज था कि लगा हम मर जाएंगे।” कई घरों के शीशे टूट गए, दीवारें हिल गईं। लोग सड़कों पर इकट्ठा हो गए और डर के मारे रात भर बाहर ही रहे।
दमकल विभाग की मेहनत
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। करीब 15 से ज्यादा फायर टेंडर ने रात भर मेहनत करके आग पर काबू पाया। धमाकों के खतरे के कारण दमकलकर्मियों को काफी सावधानी बरतनी पड़ी। सुबह तक आग पूरी तरह बुझा दी गई। कोई हताहत नहीं हुआ, जो बड़ी राहत की बात है।
आग फैलने के कारण
गोदाम में सैकड़ों मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर रखे थे। ऑक्सीजन गैस होने से आग तेजी से फैली और सिलेंडर फटते गए। पास में प्लास्टिक स्क्रैप और लोहे का सामान होने से आग और भयानक हो गई। एक जलता सिलेंडर उड़कर दूसरे गोदाम में गिरने से वहां भी आग लगी।
जांच और सुरक्षा के सवाल
अब इस हादसे की जांच शुरू हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि घनी आबादी वाले इलाके में इतने खतरनाक सिलेंडर गोदाम कैसे चल रहा था? क्या वहां फायर सेफ्टी के नियमों का पालन हो रहा था? स्थानीय विधायक सुप्ति पांडे ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों का कहना है कि गोदाम में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं, इसकी जांच होगी।
नुकसान का आकलन
हादसे से गोदाम पूरी तरह जल गया। आसपास के गोदामों और फैक्ट्री को भी बड़ा नुकसान हुआ। कई घरों के शीशे और दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं। सड़क पर बिखरा मलबा साफ करने में समय लगा। लाखों रुपये की संपत्ति जलकर राख हो गई।
निष्कर्ष :
यह हादसा एक बार फिर हमें चेतावनी देता है कि घनी बस्तियों में खतरनाक सामान के गोदाम रखना कितना जोखिम भरा होता है। अगर समय पर दमकल नहीं पहुंचती तो बड़ा हादसा हो सकता था। अच्छी बात यह है कि कोई जान नहीं गई। लेकिन अब जरूरत है सख्त नियमों की और जांच की। ऐसे गोदामों को शहर से बाहर शिफ्ट करना चाहिए ताकि लोगों की जान सुरक्षित रहे। सरकार और प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। उम्मीद है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में ऐसे हादसे न हों।


