महाराष्ट्र – महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब राज्य के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री माणिकराव कोकाटे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा एक पुराने धोखाधड़ी मामले में अदालत द्वारा दो साल की सजा बरकरार रखे जाने के बाद आया है। एनसीपी (अजित पवार गुट) के नेता कोकाटे पर 30 साल पुराने मामले में दोषी ठहराया गया, जिसके बाद उनकी मंत्री पद और विधायकी दोनों पर संकट आ गया।
मामला क्या है?
यह मामला 1995 का है। उस समय माणिकराव कोकाटे और उनके भाई विजय कोकाटे पर आरोप लगा कि उन्होंने नासिक में सरकारी कोटे के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित फ्लैट हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज जमा किए। उन्होंने अपनी आय कम दिखाकर और अन्य गलत जानकारी देकर मुख्यमंत्री कोटे के 10 प्रतिशत आरक्षण का फायदा उठाया।पूर्व मंत्री तुकाराम दिघोले ने इसकी शिकायत की थी, जिसके बाद 1997 में सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज हुआ। आरोप था कि कोकाटे भाइयों ने राज्य सरकार को धोखा देकर दो फ्लैट हासिल किए। इस साल फरवरी में निचली अदालत ने उन्हें दो साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना सुनाया था।
अदालत का हालिया फैसला
16 दिसंबर 2025 को नासिक की सत्र अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि कोकाटे एक समृद्ध किसान थे, फिर भी उन्होंने कम आय दिखाकर सरकार को गुमराह किया। सजा को तुरंत लागू करने का आदेश दिया गया।17 दिसंबर को अदालत ने कोकाटे भाइयों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिया। कोकाटे ने तुरंत बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की और सजा पर रोक लगाने की मांग की। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 19 दिसंबर के लिए तय की है। इस बीच कोकाटे स्वास्थ्य कारणों से मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती हो गए, जिससे गिरफ्तारी टल गई।
इस्तीफे का कारण और राजनीतिक प्रभाव
सजा बरकरार रहने के बाद महायुति गठबंधन में दबाव बढ़ गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (शिंदे गुट) ने कोकाटे के इस्तीफे पर जोर दिया। सूत्रों के मुताबिक, गठबंधन सहयोगी नहीं चाहते थे कि दोषी ठहराए गए मंत्री पद पर बने रहें।17 दिसंबर की शाम को कोकाटे ने इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री ने उनके खेल, युवा कल्याण और अल्पसंख्यक विकास विभाग उपमुख्यमंत्री अजित पवार को सौंप दिए। राज्यपाल ने इसकी मंजूरी दे दी। कानून के अनुसार, दो साल या उससे ज्यादा सजा होने पर विधायक की सदस्यता भी स्वतः समाप्त हो सकती है, जब तक हाईकोर्ट सजा पर रोक न लगा दे।
कोकाटे का राजनीतिक सफर
माणिकराव कोकाटे नासिक जिले की सिन्नर सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं। वे अलग-अलग दलों में रहे और राजनीतिक दल बदलते रहे। महायुति सरकार बनने के बाद उन्हें पहले कृषि, फिर खेल मंत्री बनाया गया।इस साल वे विवादों में भी रहे। विधानसभा सत्र में मोबाइल पर रमी खेलते पकड़े गए, जिसे ‘रमी मंत्री’ का नाम मिला। किसानों पर टिप्पणी और गठबंधन सहयोगी बीजेपी पर बयान देने से भी सुर्खियां बनीं। अब यह इस्तीफा अजित पवार गुट के लिए झटका माना जा रहा है। पहले धनंजय मुंडे को भी इस्तीफा देना पड़ा था।
आगे क्या होगा?
कोकाटे की अपील पर हाईकोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण होगा। अगर सजा पर रोक लग गई तो वे मंत्री पद बचाने या वापसी की कोशिश कर सकते हैं। नहीं तो उनकी विधायकी भी जा सकती है। गठबंधन में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें लग रही हैं, जिसमें धनंजय मुंडे की वापसी की बात हो रही है।
निष्कर्ष :
यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति में नैतिकता और जवाबदेही का सवाल उठाती है। एक पुराना मामला मंत्री पद तक पहुंचकर खत्म हुआ, जो दिखाता है कि कानून सबके लिए बराबर है। कोकाटे जैसे अनुभवी नेता के लिए यह बड़ा झटका है, लेकिन न्याय प्रक्रिया जारी है। जनता उम्मीद करती है कि नेता स्वच्छ छवि वाले हों और पुराने मामलों का जल्द निपटारा हो। यह घटना राजनीतिक दलों को भी सोचने पर मजबूर करेगी कि विवादास्पद नेताओं को महत्वपूर्ण पद देने से पहले सावधानी बरतें। अंत में, कानून का सम्मान ही लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।



