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MP News: भोपाल के सरकारी आयुर्वेद अस्पताल में एआई से होगा इलाज, जड़ी-बूटी और काढ़ा भी तय करेगी टेक्नोलॉजी

22 अक्टूबर 2026
MP News
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MP News: प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी आयुर्वेद अस्पताल में इलाज का तरीका बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से मरीजों का इलाज किया जाएगा। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि यह सरकारी क्षेत्र में देश का पहला ऐसा प्रयोग है। रोजाना 800 से ज्यादा मरीजों की ओपीडी वाले इस अस्पताल में एआई मरीज के लक्षणों, रिपोर्ट और प्रकृति के आधार पर जड़ी-बूटी, काढ़ा, भस्म और पंचकर्म की सलाह देगा।

MP News: एआई कैसे तय करेगा इलाज?

अस्पताल के आईटी सेल ने एक खास सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इसमें मरीज की पूरी जानकारी फीड की जाएगी। इसमें लक्षण, ब्लड रिपोर्ट, पुरानी बीमारी का इतिहास, नाड़ी परीक्षण और अन्य विवरण शामिल होंगे। एआई इन आंकड़ों का विश्लेषण करके बताएगा कि उस मरीज के लिए कौन सा काढ़ा सबसे फायदेमंद रहेगा, कौन सी भस्म असर करेगी, कौन सी पंचकर्म विधि जरूरी है और कौन सा योग करना चाहिए। यानी हर मरीज को उसकी प्रकृति के हिसाब से पर्सनलाइज्ड इलाज मिलेगा। पारंपरिक आयुर्वेद और आधुनिक तकनीक का यह संगम इलाज को ज्यादा सटीक बनाने की कोशिश है।

अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। कई बार पुरानी रिपोर्ट और लक्षण समझने में समय लग जाता है। डॉक्टरों पर भी दबाव रहता है। एआई की मदद से यह प्रक्रिया तेज और व्यवस्थित हो सकती है। फिलहाल दो सिस्टम पर ट्रायल चल रहा है। मशीनों की खरीदी प्रक्रिया भी जारी है। ट्रायल के नतीजे संतोषजनक रहे तो इसे नियमित ओपीडी में लागू किया जाएगा।

मरीजों और डॉक्टरों को क्या फायदा

इस पहल से दो बड़े फायदे होने की उम्मीद जताई जा रही है। मरीजों को उनकी प्रकृति के अनुसार इलाज मिलने से दवा का असर बेहतर हो सकता है और रिकवरी जल्दी हो सकती है। डॉक्टरों का समय बचेगा और वे ज्यादा मरीजों को ध्यान से देख पाएंगे। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि एआई डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी मदद करेगा। अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के साथ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा।

प्राचार्य डॉ. उमेश शुक्ला के अनुसार, ट्रायल के दौरान एआई द्वारा सुझाई गई दवा और डॉक्टरों के अनुभव में कितना अंतर है, यह देखा जा रहा है। अगर नतीजे अच्छे रहे तो इसे जल्द ओपीडी में नियमित रूप से शुरू किया जाएगा। मकसद आयुर्वेद को नई तकनीक से जोड़कर मरीजों को सटीक और जल्दी इलाज देना है।

50 एकड़ कैंपस में तीन बड़े प्रोजेक्ट

अस्पताल का कैंपस करीब 50 एकड़ में फैला है। यहां फिलहाल तीन बड़े प्रोजेक्ट पर एक साथ काम चल रहा है। आयुर्वेदिक फार्मेसी, पंचकर्म वेलनेस सेंटर और एआई लैब। प्रबंधन का दावा है कि अगर यह प्रयोग सफल रहा तो प्रदेश के अन्य आयुर्वेद अस्पतालों में भी इसे लागू किया जा सकता है। इससे आयुर्वेद को नई पहचान मिलने और युवाओं में भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।

सरकारी आयुर्वेद अस्पताल में ऐसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल अब तक कम ही देखा गया है। ज्यादातर जगहों पर पारंपरिक तरीके से ही इलाज चलता है। भोपाल का यह प्रयोग अगर सफल रहा तो यह अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। आयुर्वेद में पहले से नाड़ी परीक्षण, प्रकृति निर्धारण और पर्सनलाइज्ड इलाज की बात की जाती है। एआई उसी को डेटा और विश्लेषण के आधार पर और व्यवस्थित बनाने की कोशिश कर रहा है।

आगे का रास्ता

अभी ट्रायल चल रहा है। मशीनें आने और सिस्टम पूरी तरह तैयार होने के बाद नियमित इस्तेमाल शुरू होगा। अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि वे धीरे-धीरे इसे लागू करेंगे। मरीजों को इसकी जानकारी भी दी जाएगी। आयुर्वेद और एआई का यह संगम कितना प्रभावी साबित होता है, यह ट्रायल के नतीजों और मरीजों के फीडबैक पर निर्भर करेगा।

फिलहाल भोपाल का यह सरकारी आयुर्वेद अस्पताल देश में इस तरह के प्रयोग का नेतृत्व कर रहा है। आने वाले महीनों में अगर यह मॉडल कामयाब रहा तो आयुर्वेदिक इलाज के क्षेत्र में एक नई दिशा खुल सकती है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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कवरेज: Netsha Singh, News Media Kiran

Netsha Singh

News Media Kiran के लिए लिखते हैं।

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