Juvenile Arthritis: चिकित्सा जगत और आम जनमानस में गठिया अर्थात आर्थराइटिस को अक्सर वृद्धावस्था या ढलती उम्र की बीमारी समझा जाता है। यही कारण है कि जब कोई नन्हा बच्चा पैरों में दर्द, चलने में लंगड़ाहट या सुबह उठने पर भारी जकड़न की शिकायत करता है, तो माता-पिता इसे आमतौर पर सामान्य खेलकूद की थकान, खेलते समय लगी मामूली चोट या बढ़ती उम्र का ‘ग्रोइंग पेन’ मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। बाल रोग और रूमेटोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, यह असावधानी बच्चों के भविष्य और उनके शारीरिक विकास के लिए गंभीर संकट खड़ी कर सकती है। गठिया केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है; यह छोटे बच्चों और किशोरों को भी अपनी चपेट में ले सकता है। इस चिकित्सकीय स्थिति को ‘जुवेनाइल आर्थराइटिस’ कहा जाता है। इसके प्रारंभिक लक्षणों को समय रहते पहचानना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि उपचार में देरी होने पर जोड़ों की स्थायी विकृति और विकास अवरुद्ध होने का गंभीर जोखिम रहता है।
क्या है जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (JIA) और इसका जैविक तंत्र?
बाल चिकित्सा विज्ञान में बच्चों में होने वाले इस दीर्घकालिक गठिया को ‘जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस’ (JIA) के नाम से जाना जाता है। यह बीमारी मुख्य रूप से 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों और किशोरों को प्रभावित करती है। मूल रूप से यह एक ऑटोइम्यून और ऑटोइन्फ्लेमेटरी विकार है, जिसमें शरीर की अपनी ही रोग प्रतिरोधक प्रणाली भ्रमित होकर बाहरी विषाणुओं से लड़ने के बजाय शरीर के अपने स्वस्थ ऊतकों—विशेष रूप से जोड़ों की आंतरिक झिल्ली (साइनोवियम)—पर हमला करने लगती है।
इसके परिणामस्वरूप साइनोवियल द्रव की मात्रा अनियंत्रित रूप से बढ़ जाती है और जोड़ों में निरंतर सूजन, अत्यधिक गर्मी, असहनीय दर्द और चलने-फिरने में भारी अवरोध उत्पन्न हो जाता है। चिकित्सा शब्दावली में ‘इडियोपैथिक’ शब्द का अर्थ यह है कि इस बीमारी के सटीक कारण का अभी तक कोई एक ठोस प्रमाण नहीं मिला है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके पीछे विशिष्ट आनुवंशिक संवेदनशीलता और कुछ अज्ञात पर्यावरणीय विषाणु संक्रमणों का जटिल अंतर्संबंध जिम्मेदार हो सकता है। यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि परिवार में गठिया का कोई पूर्व इतिहास न होने पर भी बच्चा इस विकार की चपेट में आ सकता है।
प्रातःकालीन जकड़न और अन्य प्रारंभिक लक्षण: कैसे पहचानें खतरे की घंटी?
जुवेनाइल आर्थराइटिस का सबसे प्रमुख और विशिष्ट नैदानिक लक्षण है ‘मॉर्निंग स्टिफनेस’ यानी सुबह सोकर उठने के बाद जोड़ों में होने वाली असामान्य अकड़न। सामान्य थकान या चोट का दर्द आराम करने के बाद ठीक हो जाता है, किंतु ऑटोइम्यून गठिया का दर्द रातभर विश्राम करने के बाद सुबह के समय सबसे अधिक तीव्र होता है। सुबह जागने पर बच्चे के हाथ-पैरों की उंगलियां, घुटने या टखने पूरी तरह मुड़ नहीं पाते और बच्चे को बिस्तर से उठकर सामान्य रूप से चलने में आधे से एक घंटे तक का समय लग जाता है।
इसके अतिरिक्त, यदि बच्चा बिना किसी चोट या मोच के अचानक लंगड़ाकर चलने लगे, सीढ़ियां चढ़ने से कतराने लगे, जमीन पर पालथी मारकर बैठने में असमर्थता जताए अथवा पेन पकड़ने व बोतल का ढक्कन खोलने जैसे बारीक मोटर कौशल में कठिनाई महसूस करे, तो यह जोड़ों की गंभीर सूजन का संकेत हो सकता है। कुछ बच्चों में जोड़ बाहर से सूजे हुए, लाल और छूने पर गर्म महसूस होते हैं। बीमारी के सिस्टमिक स्वरूप में जोड़ों के दर्द के साथ-साथ कई हफ्तों तक रहने वाला तेज बुखार, शरीर पर हल्के गुलाबी रंग के चकत्ते (रैशेज), भूख में भारी कमी और हर समय सुस्ती व चिड़चिड़ापन भी देखा जा सकता है।
शारीरिक विकास और आंखों पर दुष्प्रभाव: अनदेखी के गंभीर खतरे
बचपन मनुष्य के जीवन का वह नाजुक दौर होता है जब हड्डियां, उपास्थि (कार्टिलेज) और मांसपेशियां अपनी चरम विकास दर पर होती हैं। हड्डियों के सिरों पर स्थित ‘ग्रोथ प्लेट्स’ जोड़ों के अत्यधिक निकट होती हैं। जब किसी जोड़ में महीनों तक सूजन बनी रहती है, तो वहां अनियंत्रित रक्त प्रवाह और प्रदाहक साइटोकाइन्स के कारण विकास पट्टिकाएं या तो समय से पहले जुड़ जाती हैं या उनका विस्तार असमान हो जाता है। इसके चलते बच्चे के एक पैर का दूसरे पैर से छोटा रह जाना या उंगलियों की हड्डियों का टेढ़ा हो जाना जैसी अपरिवर्तनीय विकृतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
इसके अलावा, जुवेनाइल आर्थराइटिस का एक अत्यंत घातक और छिपा हुआ पहलू है आंखों में होने वाली आंतरिक सूजन, जिसे ‘यूवाइटिस’ (Uveitis) कहा जाता है। ओलिगोआर्थराइटिस से पीड़ित बच्चों में यह समस्या बिना किसी बाहरी दर्द या लालिमा के चुपचाप विकसित होती है। यदि नियमित रूप से नेत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा स्लिट-लैंप परीक्षण न कराया जाए, तो यह सूजन धीरे-धीरे मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और अंततः स्थायी अंधापन का कारण बन सकती है। इसलिए बच्चों के जोड़ों के दर्द को कभी भी सामान्य समझकर टालने की भूल नहीं करनी चाहिए।
Read More Here
Numerology: 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है जन्म? जानें किस दिन शुभ काम करने से बचने की है मान्यता
महिंद्रा बोलेरो बोल्ड एडिशन लॉन्च, ब्रॉन्ज लुक और नए इंटीरियर के साथ बदला अंदाज
भारत-पोलैंड की दोस्ती होगी और मजबूत! पीएम मोदी बोले- ‘साझा विरासत हमारी सबसे बड़ी ताकत’
