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Parenting Tips: बच्चों की सुबह की ये 7 आदतें बदल देंगी पूरी जिंदगी, पेरेंट्स जरूर अपनाएं

Parenting Tips: आज के दौर में जब बच्चे स्क्रीन और देर रात जागने की आदत में फंस गए हैं, तब उनकी सुबह की दिनचर्या पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चे की सुबह जैसी होती है, उसका पूरा दिन वैसा ही बीतता है। अगर सुबह की शुरुआत सही तरीके से हो तो बच्चा न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत बनता है। पढ़ाई में मन लगता है, खेल में जोश रहता है और दिनभर एक अलग किस्म की ताजगी महसूस होती है।

बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जो बच्चे नियमित और सही सुबह की दिनचर्या का पालन करते हैं, वो बड़े होकर ज्यादा अनुशासित, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बनते हैं। यह छोटी-छोटी आदतें बचपन में ही उनके व्यक्तित्व की नींव रखती हैं।

Parenting Tips: सुबह जल्दी उठना-  दिन की सबसे पहली जीत

बच्चों को रोज सुबह 6 से 7 बजे के बीच उठने की आदत डालनी चाहिए। जल्दी उठना सुनने में भले ही आसान लगे लेकिन यह एक बच्चे के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है। जो बच्चे सुबह जल्दी उठते हैं उनके पास दिन की शुरुआत से पहले खुद के लिए समय होता है। वो बिना भागदौड़ के तैयार हो सकते हैं, नाश्ता आराम से कर सकते हैं और स्कूल के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकते हैं।

देर से उठने वाले बच्चों में अक्सर सुबह चिड़चिड़ापन देखा जाता है। वो जल्दबाजी में नाश्ता छोड़ देते हैं या आधा-अधूरा खाते हैं, जिसका सीधा असर उनकी एकाग्रता और ऊर्जा पर पड़ता है। इसलिए पेरेंट्स को रात में बच्चों का सोने का समय भी तय करना चाहिए ताकि सुबह जल्दी उठना उनके लिए मुश्किल न हो।

चेहरा और हाथ-पांव धोना: छोटी आदत, बड़ा फायदा

Parenting Tips

उठते ही बच्चों को हाथ-पांव और चेहरा धोने की आदत डालनी जरूरी है। यह आदत सुनने में बेहद सामान्य लगती है लेकिन इसके फायदे काफी गहरे हैं। ठंडे पानी से चेहरा धोने पर नींद तुरंत भाग जाती है और दिमाग सतर्क हो जाता है। इससे बच्चा तरोताजा महसूस करता है और उसका मूड भी अच्छा हो जाता है।

इसके अलावा यह आदत बच्चों में साफ-सफाई के प्रति जागरूकता पैदा करती है जो उनके पूरे जीवन में काम आती है। बचपन में सिखाई गई साफ-सफाई की आदत बड़े होकर स्वास्थ्य और स्वच्छता की समझ बन जाती है।

हल्की स्ट्रेचिंग या योग: शरीर और मन दोनों के लिए जरूरी

सुबह सिर्फ 5 से 10 मिनट की हल्की स्ट्रेचिंग, योग या व्यायाम बच्चों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस उम्र में बच्चों की हड्डियां और मांसपेशियां तेजी से विकसित हो रही होती हैं। सुबह के हल्के व्यायाम से उनकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं, शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और पूरे दिन एक अलग किस्म की स्फूर्ति बनी रहती है।

बच्चों को अनुलोम-विलोम जैसी सांस लेने की सरल क्रियाएं भी सिखाई जा सकती हैं। इससे उनकी सोचने की क्षमता तेज होती है। आजकल कई स्कूल भी बच्चों को सुबह योग और व्यायाम के लिए प्रेरित कर रहे हैं क्योंकि इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ता है।

दांत और जीभ की सफाई: जो आदत जिंदगीभर काम आए

सुबह उठकर ब्रश करना और जीभ साफ करना एक ऐसी आदत है जो बचपन में ही पक्की हो जानी चाहिए। दांतों और मसूड़ों की अच्छी सेहत पूरे शरीर की सेहत से जुड़ी होती है। जो बच्चे नियमित रूप से सुबह ब्रश करते हैं उनके दांत लंबे समय तक मजबूत और स्वस्थ रहते हैं।

पेरेंट्स को चाहिए कि वो बच्चों को सही तरीके से ब्रश करना सिखाएं और इसे एक रूटीन बना दें। शुरुआत में बच्चे इससे बचने की कोशिश करते हैं लेकिन अगर यह आदत 21 दिन तक लगातार डाल दी जाए तो यह खुद-ब-खुद उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है।

पौष्टिक नाश्ता: दिनभर की ऊर्जा का असली स्रोत

सुबह का नाश्ता दिन का सबसे जरूरी भोजन माना जाता है और बच्चों के लिए तो यह और भी अहम है। रात भर सोने के बाद शरीर को सुबह ऊर्जा की जरूरत होती है और यह ऊर्जा सिर्फ अच्छे नाश्ते से मिलती है। बच्चों को दलिया, फल, दूध, अंडा या हल्का सैंडविच जैसी पौष्टिक चीजें देनी चाहिए।

जो बच्चे नाश्ता छोड़ देते हैं उनकी एकाग्रता कम होती है, वो जल्दी थक जाते हैं और उनका मूड भी खराब रहता है। स्कूल में उनका मन नहीं लगता और पढ़ाई पर असर पड़ता है। इसलिए चाहे कितनी भी जल्दी हो, बच्चों को नाश्ता जरूर कराएं। अगर सुबह ज्यादा समय नहीं है तो रात में ही तैयारी कर लें।

ध्यान और गहरी सांस: दिमाग को स्कूल के लिए तैयार करें

यह आदत शायद सबसे कम लोग अपने बच्चों को सिखाते हैं लेकिन यह सबसे ज्यादा असरदार है। सुबह सिर्फ 5 मिनट आंखें बंद करके बैठना और गहरी सांसें लेना बच्चों के दिमाग को शांत करता है। इससे उनकी एकाग्रता बढ़ती है, वो बेहतर तरीके से सोच पाते हैं और स्कूल में पढ़ाई पर ध्यान दे पाते हैं।

आज के दौर में बच्चों पर भी पढ़ाई और परीक्षा का दबाव काफी होता है। ऐसे में यह छोटी सी ध्यान की आदत उनके मानसिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है। पेरेंट्स अगर खुद भी बच्चों के साथ यह करें तो यह और भी आसान हो जाता है।

स्कूल की तैयारी: जिम्मेदारी और अनुशासन की पहली पाठशाला

नाश्ते के बाद बच्चों को खुद अपना स्कूल बैग तैयार करने की आदत डालनी चाहिए। होमवर्क चेक करना, किताबें सही जगह रखना और अपनी चीजें व्यवस्थित करना ये सब छोटे काम बच्चों में जिम्मेदारी का बीज बोते हैं। जो बच्चे खुद अपना बैग तैयार करते हैं वो धीरे-धीरे अपने काम खुद करने में सक्षम हो जाते हैं।

यह आदत उन्हें समय प्रबंधन भी सिखाती है। जब बच्चा जानता है कि स्कूल जाने से पहले उसे क्या-क्या करना है तो वो खुद-ब-खुद समय पर सब कुछ कर लेता है और उसे बार-बार याद दिलाने की जरूरत नहीं पड़ती।

Parenting Tips: पेरेंट्स के लिए जरूरी बात

बच्चों में यह आदतें रातोंरात नहीं आतीं। इसके लिए पेरेंट्स को खुद भी यही रूटीन अपनाना होगा क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो वो अपने घर में देखते हैं। शुरुआत में बच्चे थोड़ा विरोध करेंगे लेकिन धीरे-धीरे जब उन्हें खुद महसूस होने लगेगा कि इन आदतों से उनका दिन बेहतर बीत रहा है, तो वो खुद ही इनसे प्यार करने लगेंगे।

सुबह की सही दिनचर्या एक बच्चे को शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से मजबूत और आत्मविश्वास से भरपूर बनाती है। यही वो नींव है जिस पर उनका पूरा भविष्य टिका होता है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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