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How to Give CPR: कार्डियक अरेस्ट आने पर संजीवनी बन सकता है CPR, जान बचाने के लिए सीखें सही तरीका, स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

How to Give CPR: दिल की धड़कन अचानक रुक जाना किसी भी उम्र के व्यक्ति के साथ हो सकता है। इस स्थिति को कार्डियक अरेस्ट कहते हैं। ऐसे में हर सेकंड कीमती होता है। अगर सही समय पर सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) दिया जाए तो व्यक्ति की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि कार्डियक अरेस्ट के पहले 4 से 6 मिनट के अंदर CPR शुरू कर दिया जाए तो दिमाग को नुकसान पहुंचने का खतरा काफी कम हो जाता है।

भारत में हर साल लाखों लोग कार्डियक अरेस्ट का शिकार होते हैं। ज्यादातर मामलों में आसपास मौजूद लोगों को CPR का सही तरीका नहीं पता होता, जिससे कीमती समय निकल जाता है। इसलिए हर व्यक्ति को CPR का बेसिक ज्ञान होना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं कि कार्डियक अरेस्ट क्या है, CPR कब और कैसे दिया जाए, बच्चों और शिशुओं के लिए क्या अंतर है और क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

कार्डियक अरेस्ट क्या होता है और क्यों है इतना खतरनाक?

कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है। यह हार्ट अटैक से अलग है। हार्ट अटैक में दिल की नसों में ब्लॉकेज हो जाता है लेकिन दिल अभी भी धड़कता रहता है। कार्डियक अरेस्ट में दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेल हो जाती है और खून पंप करना बंद हो जाता है।

इस स्थिति में दिमाग और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन और खून का बहाव रुक जाता है। 4 मिनट के बाद दिमाग की कोशिकाएं मरने लगती हैं और 10 मिनट बाद स्थायी नुकसान हो सकता है। भारत में स्ट्रेस, प्रदूषण, अनहेल्दी खान-पान और व्यायाम की कमी के कारण ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

सीपीआर कब शुरू करना चाहिए?

How to Give CPR
How to Give CPR

अगर कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाए, तो सबसे पहले उसे हिलाकर देखें और नाम लेकर पुकारें। अगर वह कोई जवाब न दे और उसकी सांस सामान्य न हो (हांफना, तेज सांस लेना या बिल्कुल सांस न लेना), तो तुरंत CPR शुरू कर दें।

पल्स चेक करने की कोशिश न करें क्योंकि आम आदमी इसे सही से पहचान नहीं पाता। अगर व्यक्ति होश में नहीं है और सांस नहीं ले रहा है, तो इंतजार न करें। तुरंत किसी को 108 या नजदीकी इमरजेंसी नंबर पर फोन करने को कहें और खुद CPR देना शुरू कर दें।

सीपीआर देने का सही तरीका: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

  1. व्यक्ति को सपाट और सख्त जगह पर पीठ के बल लिटाएं। अगर बिस्तर पर है तो उसे फर्श पर ले आएं।
  2. उसके बगल में घुटनों के बल बैठ जाएं।
  3. चेस्ट कंप्रेशन: छाती के बीच वाले हिस्से (स्टर्नम) पर एक हाथ की हथेली रखें। दूसरे हाथ को पहले हाथ पर रखकर उंगलियां आपस में जोड़ लें। कोहनियां सीधी रखें और कंधों से दबाव देते हुए छाती को 5-6 सेंटीमीटर गहराई तक दबाएं।
  4. स्पीड: हर मिनट 100 से 120 बार छाती दबाएं। रुकें नहीं, लगातार दबाव बनाए रखें।
  5. रेस्क्यू ब्रेथ: 30 बार छाती दबाने के बाद 2 बार रेस्क्यू ब्रेथ दें। व्यक्ति के सिर को हल्का पीछे झुकाएं, नाक बंद करें और अपना मुंह उसके मुंह पर रखकर 1 सेकंड तक सांस फूंकें। छाती उठनी चाहिए।
  6. चक्र जारी रखें: 30 कंप्रेशन और 2 ब्रेथ का यह चक्र तब तक दोहराते रहें जब तक मेडिकल मदद न पहुंच जाए या व्यक्ति होश में न आ जाए।

बच्चों और शिशुओं के लिए CPR में अंतर

बच्चों (1 से 8 साल) के लिए CPR थोड़ा अलग तरीके से दिया जाता है। छाती दबाने की गहराई लगभग 5 सेंटीमीटर रखें। दो उंगलियों या एक हाथ का इस्तेमाल करें। रेस्क्यू ब्रेथ देते समय मुंह और नाक दोनों को ढकें।

शिशुओं (1 साल से कम उम्र) के लिए सिर्फ दो उंगलियों से छाती के बीच वाले हिस्से पर दबाव दें। गहराई लगभग 4 सेंटीमीटर रखें। रेस्क्यू ब्रेथ बहुत हल्की और सावधानी से दें। हर उम्र के लिए 30:2 का अनुपात वही रखें, लेकिन दबाव की ताकत उम्र के हिसाब से कम रखें ताकि हड्डियां न टूटें।

सीपीआर के फायदे और महत्व

सही समय पर दिया गया CPR दिल और दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचाता रहता है। इससे व्यक्ति को अस्पताल पहुंचने तक जिंदा रखा जा सकता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि CPR देने से बचने की संभावना दोगुनी या तिगुनी हो जाती है।

भारत में CPR जागरूकता अभी बहुत कम है। स्कूलों, कॉलेजों, ऑफिसों और पब्लिक प्लेस पर CPR ट्रेनिंग अनिवार्य होनी चाहिए। सरकार और कई एनजीओ अब पब्लिक जगहों पर AED (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर) मशीन लगा रहे हैं। लेकिन मशीन के साथ CPR का ज्ञान भी जरूरी है।

सीपीआर देते समय बरतें ये सावधानियां

  • हमेशा कंधे से दबाव दें, कमर से नहीं। कोहनियां सीधी रखें।
  • छाती दबाते समय रुकें नहीं। 100-120 की स्पीड लगातार बनाए रखें।
  • रेस्क्यू ब्रेथ देते समय ज्यादा जोर न लगाएं, सिर्फ छाती हल्की उठनी चाहिए।
  • अगर व्यक्ति उल्टी कर दे तो मुंह साफ करके CPR जारी रखें।
  • खुद थक जाएं तो किसी दूसरे व्यक्ति को CPR देने को कह दें।
  • अगर AED मशीन उपलब्ध हो तो तुरंत उसका इस्तेमाल करें। मशीन खुद निर्देश देगी।

CPR सीखने के फायदे

CPR सीखना मुश्किल नहीं है। सिर्फ 2-3 घंटे की ट्रेनिंग से आप इसे अच्छे से सीख सकते हैं। कई अस्पताल, रेड क्रॉस और स्वास्थ्य विभाग नियमित ट्रेनिंग कैंप लगाते हैं। आप अपने परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों के साथ मिलकर भी प्रैक्टिस कर सकते हैं। खासकर घर में बुजुर्ग, हृदय रोगी या छोटे बच्चे हैं तो CPR जानना और भी जरूरी हो जाता है। एक छोटी सी ट्रेनिंग हजारों जानें बचा सकती है।

How to Give CPR: निष्कर्ष

कार्डियक अरेस्ट कोई चेतावनी दिए बिना आता है। ऐसे में CPR का ज्ञान हर व्यक्ति के पास होना चाहिए। सही समय पर सही तरीके से दिया गया CPR किसी की जान बचा सकता है।

आज ही अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर CPR का वीडियो देखें और प्रैक्टिस करें। डॉक्टर या ट्रेनिंग सेंटर से प्रमाणित कोर्स करके सीखें। याद रखें आपका ज्ञान किसी के लिए संजीवनी बन सकता है।

स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह है कि हर नागरिक को CPR का बेसिक प्रशिक्षण लेना चाहिए। अगर आप भी CPR सीखना चाहते हैं तो नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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