Research and Innovation Career: आज की दुनिया हर दिन बदल रही है। नई टेक्नोलॉजी, नई दवाइयां, नए ऐप और नए आइडिया, यह सब रिसर्च और इनोवेशन की ही देन हैं। जो देश और कंपनियां रिसर्च में सबसे ज्यादा निवेश कर रही हैं वे दुनिया में सबसे आगे हैं। अमेरिका, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपनी कुल आय का एक बड़ा हिस्सा रिसर्च पर खर्च करते हैं और यही उनकी तरक्की का सबसे बड़ा राज है।
भारत भी अब इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार ने रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए कई बड़ी योजनाएं शुरू की हैं। ISRO के मंगलयान से लेकर देश में बनी कोरोना वैक्सीन तक, यह सब भारतीय रिसर्चर्स की मेहनत और काबिलियत का नतीजा है। ऐसे में अगर आपको नई चीजें समझना, सवालों के जवाब खोजना और कुछ अलग करने का जुनून है तो रिसर्च और इनोवेशन का करियर आपके लिए सबसे सही रास्ता हो सकता है।
रिसर्च और इनोवेशन का मतलब क्या है, आसान भाषा में समझें
बहुत से लोग रिसर्च को सिर्फ किताबों में डूबे रहने का काम समझते हैं लेकिन असल में यह बहुत व्यापक और रोचक क्षेत्र है। रिसर्च का मतलब है किसी भी विषय को गहराई से समझना, उस पर सवाल उठाना और नई जानकारी सामने लाना। यह जानकारी विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा, समाजशास्त्र या किसी भी क्षेत्र से जुड़ी हो सकती है।
इनोवेशन उससे एक कदम आगे है। इनोवेशन का मतलब है रिसर्च से मिली जानकारी का इस्तेमाल करके कुछ नया बनाना या किसी पुरानी चीज को बेहतर बनाना। जैसे कि एक वैज्ञानिक किसी बीमारी पर रिसर्च करता है और उससे नई दवा बनती है, यह इनोवेशन है। एक इंजीनियर किसी पुरानी मशीन को और ज्यादा किफायती बना देता है यह भी इनोवेशन है।
सीधे शब्दों में कहें तो रिसर्च समस्या को समझता है और इनोवेशन उसका हल निकालता है। दोनों मिलकर दुनिया को बेहतर बनाते हैं।
इस करियर के लिए कौन सी स्किल्स होनी चाहिए
रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कुछ खास गुण और स्किल्स जरूरी होती हैं। सबसे पहले और सबसे जरूरी है विश्लेषण करने की क्षमता यानी किसी भी चीज को गहराई से सोचने और समझने की ताकत। एक अच्छा रिसर्चर हर चीज पर सवाल उठाता है और जब तक सही जवाब न मिले तब तक चैन से नहीं बैठता।
दूसरी जरूरी स्किल है समस्या सुलझाने की क्षमता। रिसर्च में हर दिन नई चुनौतियां आती हैं और हर बार एक नया रास्ता खोजना पड़ता है। जो लोग मुश्किल परिस्थितियों में भी शांत रहकर हल निकाल सकते हैं वे इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा सफल होते हैं।
तीसरी स्किल है रचनात्मकता यानी क्रिएटिविटी। इनोवेशन तभी होता है जब आप कुछ अलग सोच सकते हों। अगर आप वही करते रहें जो सब करते हैं तो नई खोज कभी नहीं होगी। इसलिए नए नजरिए से सोचने की क्षमता इस क्षेत्र में बेहद जरूरी है।
चौथी जरूरी स्किल है संवाद करने की यानी कम्युनिकेशन स्किल। रिसर्चर को अपनी खोज को दूसरों को समझाना भी आना चाहिए। चाहे वह रिपोर्ट लिखनी हो, प्रेजेंटेशन देनी हो या किसी टीम के साथ काम करना हो, संवाद के बिना रिसर्च अधूरी है।
इन सब के अलावा धैर्य और लगन भी बेहद जरूरी है। रिसर्च एक धीमी प्रक्रिया है। कई बार सालों की मेहनत के बाद ही कोई नतीजा मिलता है। जो इस धैर्य को बनाए रख सकता है वही असल में एक बेहतरीन रिसर्चर बनता है।
नौकरी के अवसर, कहाँ-कहाँ मिल सकती है जॉब
रिसर्च और इनोवेशन का क्षेत्र बेहद विस्तृत है और इसमें नौकरी के अवसर भी बहुत ज्यादा हैं। सबसे पहला और सबसे आकर्षक विकल्प है बड़ी कंपनियों के रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी R&D विभाग। Google, Microsoft, Samsung, Tata, Reliance और ऐसी तमाम कंपनियां अपने R&D विभाग के लिए हर साल बड़े पैमाने पर रिसर्चर्स को हायर करती हैं। इन कंपनियों में काम करने वाले रिसर्चर्स को न सिर्फ अच्छी सैलरी मिलती है बल्कि उन्हें दुनिया की सबसे उन्नत लैब और उपकरणों के साथ काम करने का मौका भी मिलता है।
दूसरा बड़ा विकल्प है सरकारी संस्थान। भारत में ISRO, DRDO, CSIR, ICAR और ICMR जैसे कई बड़े सरकारी रिसर्च संस्थान हैं जहाँ हर साल हजारों रिसर्चर्स की भर्ती होती है। इन संस्थानों में काम करने का एक अलग ही गर्व होता है क्योंकि यहाँ आप देश के लिए काम कर रहे होते हैं। ISRO में काम करने वाले वैज्ञानिक भारत को अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं। DRDO के रिसर्चर देश की सुरक्षा के लिए नई तकनीक बना रहे हैं।
तीसरा विकल्प है शिक्षण संस्थान यानी यूनिवर्सिटी और कॉलेज। यहाँ आप प्रोफेसर के रूप में पढ़ाने के साथ-साथ अपनी खुद की रिसर्च लैब भी चला सकते हैं। IIT, IISc, NIT और अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में रिसर्च का माहौल बेहद उम्दा है और यहाँ काम करने वाले प्रोफेसरों को सरकारी लाभों के साथ-साथ रिसर्च ग्रांट भी मिलती है।
चौथा और सबसे रोमांचक विकल्प है खुद का स्टार्टअप शुरू करना। अगर आपके पास कोई अनोखा आइडिया है और उसे आप इनोवेशन के जरिए एक प्रोडक्ट या सेवा में बदल सकते हैं तो आप अपनी खुद की कंपनी शुरू कर सकते हैं। भारत में आज स्टार्टअप इकोसिस्टम बेहद मजबूत हो गया है और सरकार भी इनोवेटिव स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की मदद देती है।
सैलरी, कितनी कमाई होती है इस क्षेत्र में
रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में सैलरी पूरी तरह आपकी डिग्री, स्किल्स और अनुभव पर निर्भर करती है। जो लोग इस क्षेत्र में नए-नए आते हैं यानी फ्रेशर हैं उन्हें शुरुआत में 20 हजार से 40 हजार रुपए प्रति माह तक मिल सकते हैं। यह सैलरी उस संस्थान और शहर पर भी निर्भर करती है जहाँ आप काम कर रहे हैं।
जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है सैलरी भी तेजी से बढ़ती है। 2 से 5 साल के अनुभव के बाद एक रिसर्चर 50 हजार से 1 लाख रुपए प्रति माह तक कमा सकता है। अगर आप किसी बड़े मल्टीनेशनल कंपनी के R&D विभाग में काम कर रहे हैं या किसी प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान में वैज्ञानिक के पद पर हैं तो यह सैलरी और भी ज्यादा हो सकती है।
विदेश में काम करने वाले भारतीय रिसर्चर्स तो लाखों रुपए प्रति माह कमाते हैं। अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में भारतीय रिसर्चर्स की बेहद मांग है और वहाँ सैलरी पैकेज करोड़ों में होते हैं।
कहाँ से करें पढ़ाई, कौन से कोर्स हैं बेस्ट
रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए सबसे पहले आपको अपना विषय चुनना होगा। विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कृषि, सामाजिक विज्ञान किसी भी क्षेत्र में रिसर्च की जा सकती है। बारहवीं के बाद आप अपनी पसंद के विषय में ग्रेजुएशन करें। उसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन और फिर PhD करें जो रिसर्च करियर की रीढ़ मानी जाती है।
IIT, IISc, NIT, AIIMS जैसे संस्थानों से PhD करने वाले छात्रों को देश और विदेश दोनों में बहुत अच्छे मौके मिलते हैं। इसके अलावा CSIR-NET, GATE और अन्य परीक्षाओं को पास करके भी आप सरकारी रिसर्च संस्थानों में जगह बना सकते हैं।
निष्कर्ष
रिसर्च और इनोवेशन का करियर उन लोगों के लिए सबसे सही है जिन्हें सवाल पूछने की, नई चीजें खोजने की और दुनिया को बेहतर बनाने की तमन्ना है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ आपका काम सिर्फ आपकी सैलरी नहीं बढ़ाता बल्कि समाज और देश को भी आगे ले जाता है। अगर आपमें जुनून है, धैर्य है और कुछ अलग करने की चाहत है तो यह करियर आपको वह सब दे सकता है जो आप चाहते हैं।
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