वाराणसी – हार्ट अटैक के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, खासकर 40 साल से कम उम्र की महिलाओं में हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है?हाल के स्टडी में यह बात साफ सामने आई है कि 40 साल से कम उम्र की महिलाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.
इसकी बड़ी वजह है लगातार तनावभरी लाइफस्टाइल, नींद की कमी और वे शुरुआती संकेत जिन्हें महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं, जैसे लगातार थकान, सांस फूलना या थोड़ा चलने पर भारीपन महसूस होना. कई बार महिलाएं इन लक्षणों को सामान्य तनाव, कमजोरी या डाइट से जुड़ी समस्या समझ लेती हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है.डॉ. नवीन भामरी, वाइस चेयरमैन एवं HOD, कार्डियोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग ने TOI में लिखे अपने लेख में बताया कि अब हार्ट अटैक सिर्फ उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रहा. डॉक्टरों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में युवा महिलाओं में हार्ट ब्लॉकेज और अटैक दोनों के मामले तेजी से बढ़े हैं. लंबे काम के घंटे, अनरेगुलर डेली रूटीन, कम नींद और शरीर के संकेतों को हल्के में लेना इस ट्रेंड की बड़ी वजहें हैं. सबसे मुश्किल बात यह है कि यंग महिलाएं अक्सर सोच भी नहीं पातीं कि जो वे महसूस कर रही हैं, उसका हार्ट से कोई संबंध हो सकता है.
किन संकेतों को महिलाएं कर देती हैं इग्नोर – बहुत ज्यादा थकान, जो वजह समझ न आए , चलते समय या सीढ़ियां चढ़ते वक्त सांस फूलना , जबड़े, गर्दन, पीठ या पेट के ऊपरी हिस्से में दबाव या तकलीफ मतली, चक्कर आना या अचानक पसीना आना , सीने में दबाव या कसावट, भले ही वह बहुत तेज न हो। ये लक्षण अक्सर गैस, एंग्जायटी या सामान्य कमजोरी जैसे लगते हैं, इसलिए महिलाएं इन्हें गंभीरता से नहीं लेतीं.
क्यों 40 से कम उम्र की महिलाएं संकेतों को समझ नहीं पातीं?
तनाव, काम का दबाव और लाइफस्टाइल में ज्यादातर महिलाएं सोचती हैं कि सारी परेशानी लंबे काम के घंटे, नींद की कमी या मानसिक तनाव की वजह से है. दूसरा सबसे बड़ा कारण है कि उनको यह गलतफहमी होती है कि “मेरी उम्र में हार्ट की दिक्कत कैसे होगी?” यह सोच उन्हें अस्पताल जाने में देर करा देती है. तीसरा कारण हार्मोनल दिक्कतें और एनीमिया. PCOS, थायरॉइड, और कम हीमोग्लोबिन यंग महिलाओं में आम हैं, ये हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं. चौथे कारण की बात करें, तो इसमें हेल्थ चेकअप न करवाना शामिल है. होता क्या है कि कई महिलाएं एक्टिव रहने को ही फिटनेस मान लेती हैं और नियमित जांचें नहीं करवातीं. स्मोकिंग और गलत फिटनेस तरीके भी इसमें शामिल हैं. सिगरेट, क्रैश डाइट और ओवर-ट्रेनिंग भी हार्ट के लिए जोखिम बढ़ाते हैं.
यह ट्रेंड क्यों चिंता बढ़ा रहा है?
भारत में युवाओं में हार्ट अटैक के मामलों में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है. यंग महिलाएं अक्सर अपने लक्षणों को तनाव या गैस समझकर टाल देती हैं, जिससे इलाज देर से मिल पाता है.
निष्कर्ष:
सांस फूलना, असामान्य थकान या सीने, ऊपरी शरीर में दबाव जैसे संकेतों को कभी न नजरअंदाज करें, समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराएं, तनाव, नींद और लाइफस्टाइल को संतुलित रखें और कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.



