वाराणसी: 9 दिसंबर 2025। टाटा इंटरनेशनल की स्ट्राइडर साइकिल ने फर्स्टक्राय.कॉम पर अपनी पूरी किड्स मोबिलिटी रेंज लॉन्च कर दी। अब 2 साल से 10 साल तक के बच्चों के लिए साइकिल, ट्राइसाइकिल, किक स्कूटर, राइड-ऑन – सब एक ही जगह मिलेंगे। “बच्चे की पहली सवारी भरोसे की होनी चाहिए – टाटा ने ये वादा पूरा कर दिया।”
सेफ्टी पहले, मज़ा बाद में नहीं – दोनों साथ-साथ
स्ट्राइडर ने हर प्रोडक्ट में वो छोटी-छोटी बातें डालीं जो माँ-बाप की रातों की नींद उड़ा देती थीं – कोई नुकीला कोना नहीं, एंटी-स्लिप पैडल और हैंडल, स्टेबल जियोमेट्री ताकि बच्चा गिरे नहीं, चटक रंग जो बच्चे को पसंद आएं। “सुरक्षा वो नहीं जो लिखी हो, वो जो महसूस हो।”
फर्स्टक्राय से बेहतर कुछ नहीं पैरेंट्स के लिए
फर्स्टक्राय आज भारत का सबसे भरोसेमंद पैरेंटिंग प्लेटफॉर्म है। लाखों मम्मी-पापा पहले ही वहाँ से डायपर से लेकर खिलौने तक खरीदते हैं। अब स्ट्राइडर की पूरी किड्स रेंज भी वहीं। राहुल गुप्ता (बिज़नेस हेड, स्ट्राइडर) ने कहा – “फर्स्टक्राय की पैरेंट कम्युनिटी हमारे लिए सबसे सही जगह है। हम यहाँ सिर्फ़ प्रोडक्ट नहीं, भरोसा बेच रहे हैं।”
टाटा का नाम और स्ट्राइडर का विश्वास – अब बच्चों के साथ
स्ट्राइडर पहले ही दो साल लगातार “Most Trusted Brand” रह चुकी है। 2024 में “India’s Leading Brands – Rising Star” और 2025 में “India’s Most Preferred Brand”। अब बच्चों के लिए भी वही भरोसा – राउंडेड फ्रेम, सॉफ्ट ग्रिप, हल्का वज़न। “टाटा का मतलब सिर्फ़ बड़ा नाम नहीं, बड़ा दिल भी है।”
अब खरीदना और आसान, डिलीवरी और तेज़
पहले पैरेंट्स को अलग-अलग वेबसाइट्स या दुकानों में भटकना पड़ता था। अब फर्स्टक्राय पर एक ही जगह – स्ट्राइडर की पूरी किड्स रेंज, ईएमआई ऑप्शन, फास्ट डिलीवरी, आसान रिटर्न। “बच्चे का मज़ा एक क्लिक दूर कर दिया हमने।”
बच्चों की मुस्कान से बड़ा कोई बिज़नेस नहीं
स्ट्राइडर का मकसद सिर्फ़ साइकिल बेचना नहीं। बच्चों का बैलेंस, कॉन्फिडेंस, मोटर स्किल्स डेवलप करना है। हर साइकिल में वो सोच है कि बच्चा गिरे नहीं, डरे नहीं, बस हँसे और सीखे। “जब बच्चा पहली बार पैडल मारता है और मुस्कुराता है – वो पल पैसों से नहीं खरीदा जा सकता।”
आखिरी बात –
अगर तुम भी अपने बच्चे के लिए पहली साइकिल या स्कूटर लेने का सोच रहे हो तो अब सोचने की ज़रूरत नहीं। स्ट्राइडर + फर्स्टक्राय = टाटा का भरोसा + पैरेंट्स का चैन। आज रात बच्चे को सुलाने से पहले उससे पूछो – “कल नई साइकिल चलाएगा?” और उसकी चमकती आँखें देखो। “बचपन छोटा होता है, यादें बड़ी बनानी पड़ती हैं।” स्ट्राइडर ने वो मौका दे दिया। अब तुम्हारी बारी है।
हैप्पी राइडिंग। हैप्पी पैरेंटिंग।



