नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (TASMAC) से जुड़े 1000 करोड़ रुपये के घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश CJI बी आर गवई ने कहा कि वह ईडी की जांच पर कुछ नहीं कहना चाहते, वरना यह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन जाएगा।
मंगलवार (14 अक्टूबर, 2025) को CJI बी आर गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। मार्च में ईडी ने TASMAC के चेन्नई हेडक्वार्टर में छापेमारी की थी। इस छापेमारी में शराब की कीमतों में हेराफेरी, टेंडर घोटाला और रिश्वतखोरी के आरोपों के तहत कंप्यूटर और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए थे।
कोर्ट ने ईडी से पूछा, “क्या आप राज्य पुलिस के अधिकारों में दखल नहीं दे रहे हैं? क्या राज्य पुलिस इस घोटाले की जांच नहीं कर सकती है?” CJI ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था कौन देखता है, और ईडी का हस्तक्षेप संघीय ढांचे पर असर डाल सकता है।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने ईडी का पक्ष रखते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर एजेंसी की ओर से कम ही चर्चा होती है और यही उनकी शिकायत है।
TASMAC की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकारी संस्था पर ईडी द्वारा छापेमारी कैसे हो सकती है, जबकि कार्रवाई का आदेश TASMAC ने ही दिया था। उन्होंने कहा कि मैनेजिंग डायरेक्टर्स के यहां छापेमारी और कंप्यूटर जब्त करना अत्यधिक है।
एसवी राजू ने जवाब में कहा कि TASMAC में बड़े स्तर पर धोखाधड़ी हो रही थी और 47 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इस पर CJI गवई ने टिप्पणी की कि ईडी की कार्रवाई क्या राज्य के अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर रही है।
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