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डार्विन को हमने गलत समझा – क्रूर नहीं, सबसे दयालु वैज्ञानिक

डेस्क: वो दिन जब डार्विन ने दुनिया को हिला दिया 12 फरवरी 1809 को पैदा हुए चार्ल्स डार्विन ने 1859 में “ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज़” लिखी। दुनिया सोचती थी भगवान ने हर प्रजाति अलग-अलग बनाई। डार्विन ने कहा – नहीं, सब एक ही जड़ से आए हैं, बस समय के साथ बदलते गए। “हम बंदर से नहीं, एक कॉमन एंसिस्टर से आए हैं। ये बात उस ज़माने में ईशनिंदा मानी गई। आज भी कुछ लोग गुस्सा करते हैं।

सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट – डार्विन ने कभी नहीं कहा

ये वाक्य हर्बर्ट स्पेंसर ने गढ़ा। डार्विन ने सिर्फ़ इस्तेमाल किया – और वो भी बाद में। उनका असली मैसेज था – “सबसे ज़्यादा बच्चे पैदा करने वाली प्रजाति नहीं, सबसे ज़्यादा सहयोग करने वाली प्रजाति बचती है।” जिसने प्यार किया, मदद की, समूह में रहा – वही आगे बढ़ा।

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डार्विन का सबसे खूबसूरत ऑब्जर्वेशन – कुत्ते का इंसान से प्यार

डार्विन ने लिखा – कुत्ता इंसान को देखकर पूँछ हिलाता है, खुशी से कूदता है। ये भावना किसी और जानवर में नहीं। “सहानुभूति ही वो चीज़ है जिसने हमें इंसान बनाया।” आज का न्यूरोसाइंस भी यही कहता है – मिरर न्यूरॉन्स।

डार्विन बीमार थे, लेकिन कभी शिकायत नहीं की

ज़िंदगी भर पेट की बीमारी, उल्टी, कमज़ोरी। डॉक्टरों ने कहा – “आराम करो।” वो 50 साल तक रोज़ 16-18 घंटे काम करते रहे। “दर्द ने मुझे इंसान बनाया, क्योंकि मैंने दूसरों का दर्द समझा।” उनकी डायरी में लिखा है – “मैं कमज़ोर हूँ, इसलिए मुझे मालूम है कमज़ोर होना क्या है।”

वो आखिरी किताब जो कोई नहीं पढ़ता

डार्विन की आखिरी किताब थी – “The Expression of the Emotions in Man and Animals” वहाँ उन्होंने साबित किया – हँसी, रोना, डर, प्यार – ये सब भावनाएँ हर इंसान में एक समान हैं, हर जानवर में भी मिलती हैं। “हम अलग नहीं, जुड़े हुए हैं।” ये किताब आज भी इमोशनल इंटेलिजेंस की बुनियाद है।

डार्विन को क्यों बदनाम किया गया

चर्च को डर था – अगर विकास सच्चा है तो बाइबिल गलत। बिजनेसमैन को अच्छा लगा – “सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट” कहकर लूट को जायज़ ठहराया। लेकिन डार्विन ने लिखा था – “सबसे दयालु प्रजाति सबसे लंबे समय तक जीवित रहती है।” उन्होंने क्रूरता नहीं, करुणा को विकास का इंजन बताया।

आज रात सिर्फ़ एक बात याद रखो

तुम जब किसी की मदद करते हो, जब किसी को माफ करते हो, जब किसी के दर्द को अपना दर्द समझते हो – तुम डार्विन के सिद्धांत को सच कर रहे हो। “डार्विन ने कहा था – हमारा विकास सहानुभूति से हुआ। तो आज जब तुम किसी से नफरत करते हो, तुम विकास को पीछे धकेल रहे हो।” डार्विन को बदनाम करने वालों ने जीत लिया लगता है। लेकिन सच हमेशा बच जाता है। आज रात किसी एक इंसान को मैसेज करो – “तुम ठीक हो ना?” बस इतना।क्योंकि यही डार्विन का असली मैसेज था।

“हम इसलिए बचे, क्योंकि हमने एक-दूसरे का हाथ थामा।”

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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