West Bengal Annapurna Yojana: पश्चिम बंगाल में अन्नपूर्णा योजना और विधवा पेंशन का लाभ उठा रहे लाभार्थियों के लिए एक बेहद जरूरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने दोनों योजनाओं को लेकर नई गाइडलाइंस जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई भी लाभार्थी इन दोनों योजनाओं का लाभ एक साथ नहीं उठा सकेगा। जो लोग फिलहाल दोनों योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें इनमें से किसी एक योजना को चुनना अनिवार्य होगा। इसके लिए राज्य सरकार ने 29 सितंबर 2026 तक की समय सीमा तय की है, जिसके भीतर लाभार्थियों को अपना विकल्प स्पष्ट करना होगा। ऐसा न करने की स्थिति में उनकी पेंशन या आर्थिक सहायता रुक सकती है। यह निर्देश महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण विभाग की सचिव की ओर से कोलकाता नगर निगम के कमिश्नर और सभी जिलाधिकारियों को भेजा गया है। अन्नपूर्णा योजना के तहत लाभार्थियों को हर महीने 3,000 रुपये मिलते हैं, जबकि विधवा पेंशन के अंतर्गत 1,500 रुपये की सहायता राशि दी जाती है।
सरकार ने जारी किया औपचारिक निर्देश
पश्चिम बंगाल सरकार के महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण विभाग की सचिव की तरफ से यह निर्देश सीधे कोलकाता नगर निगम यानी केएमसी के कमिश्नर और राज्य के सभी जिलाधिकारियों को भेजा गया है। निर्देश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि अन्नपूर्णा योजना के तहत लाभार्थियों को प्रतिमाह 3,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है, जबकि विधवा पेंशन योजना के अंतर्गत हर महीने 1,500 रुपये दिए जाते हैं। चूंकि अब दोनों योजनाओं का लाभ एक साथ नहीं मिल सकेगा, इसलिए प्रशासन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह लाभार्थियों तक यह जानकारी पहुंचाए और उनसे उनका पसंदीदा विकल्प प्राप्त करे। इस पूरी प्रक्रिया को समय रहते पूरा करने के लिए प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं।
समर्थ पोर्टल पर उपलब्ध है लाभार्थियों की सूची
सरकार ने यह भी बताया है कि जो लाभार्थी फिलहाल अन्नपूर्णा योजना और विधवा पेंशन दोनों का लाभ ले रहे हैं, उनकी पूरी सूची ‘समर्थ’ पोर्टल पर पहले से मौजूद है। ऐसे सभी लाभार्थियों को लिखित रूप में यह बताना होगा कि वे इन दोनों में से किस योजना की सहायता आगे भी जारी रखना चाहते हैं और किस योजना का लाभ छोड़ने के इच्छुक हैं। इसके लिए एक निर्धारित फॉर्म भरना अनिवार्य होगा, जिसे संबंधित विभाग या कार्यालय में जमा करना होगा। केएमसी कमिश्नर और सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे लाभार्थियों से उनका विकल्प प्राप्त कर उसे 29 सितंबर तक समर्थ पोर्टल पर अपलोड कराना सुनिश्चित करें, ताकि प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
समय सीमा चूकने पर रुक सकती है सहायता राशि
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम बात यह है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर विकल्प न देने वाले लाभार्थियों को आर्थिक सहायता मिलनी बंद हो सकती है। यही वजह है कि प्रशासन की ओर से लगातार यह अपील की जा रही है कि लाभार्थी बिना देरी किए अपना फॉर्म भरकर संबंधित कार्यालय में जमा करें। खासकर उन परिवारों के लिए यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है, जो इन दोनों योजनाओं की आर्थिक सहायता पर निर्भर हैं और जिनके लिए यह राशि जीवनयापन में सहायक होती है। समय पर विकल्प न देने की स्थिति में होने वाली परेशानी से बचने के लिए लाभार्थियों को जल्द से जल्द जरूरी प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए।
अन्नपूर्णा योजना के साथ किन योजनाओं का मिल सकता है लाभ
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि अन्नपूर्णा योजना का लाभ विधवा भत्ते के साथ भले ही न मिल सके, लेकिन इसे दिव्यांग पेंशन और कृषक बंधु जैसी अन्य निर्धारित योजनाओं के साथ लिया जा सकता है। इस विषय पर पहले भी स्पष्टीकरण दिया जा चुका था, और अब सरकार ने औपचारिक रूप से इसे दोबारा स्पष्ट कर दिया है। इससे उन लाभार्थियों को राहत मिलेगी, जो अन्नपूर्णा योजना के साथ अन्य योजनाओं का लाभ लेने के इच्छुक हैं, लेकिन उन्हें यह समझना जरूरी है कि विधवा पेंशन और अन्नपूर्णा योजना को एक साथ जारी रखने की अनुमति अब नहीं दी जाएगी।
लाभार्थियों के लिए क्या करना जरूरी
जो भी लाभार्थी फिलहाल दोनों योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, उन्हें सबसे पहले यह तय करना होगा कि उनके लिए कौन सी योजना ज्यादा उपयुक्त है। इसके बाद उन्हें निर्धारित फॉर्म भरकर अपना विकल्प संबंधित प्रशासनिक कार्यालय में जमा कराना होगा। स्थानीय प्रशासन इस जानकारी को इकट्ठा कर समर्थ पोर्टल पर अपलोड करेगा, जिसके बाद संबंधित योजना के अनुसार आगे की सहायता राशि जारी की जाएगी। लाभार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और जितनी जल्दी हो सके, यह प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके।
पश्चिम बंगाल सरकार का यह कदम राज्य की कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है। अन्नपूर्णा योजना और विधवा पेंशन जैसी योजनाएं राज्य के लाखों जरूरतमंद परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बनी हुई हैं, इसलिए इनके सुचारू संचालन के लिए स्पष्ट नियम बनाना जरूरी हो गया था। लाभार्थियों को चाहिए कि वे 29 सितंबर की समय सीमा को गंभीरता से लें और समय रहते अपना विकल्प स्पष्ट करें। ऐसा करने से न केवल उनकी सहायता राशि निर्बाध रूप से जारी रहेगी, बल्कि प्रशासन को भी योजनाओं के सही क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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