Wholesale Inflation: भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर नवंबर 2025 में घटकर 1.89% पर आ गई है। अक्टूबर में यह 2.36% थी। यह लगातार दूसरा महीना है जब थोक महंगाई में गिरावट दर्ज की गई है। मुख्य वजह सब्जियों, फलों और कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को आंकड़े जारी किए। छोटे शहरों और गांवों के व्यापारी जो थोक बाजार से सामान लाते हैं, उनके लिए यह राहत की खबर है। महंगाई कम होने से खुदरा कीमतों पर भी असर पड़ेगा और आम आदमी की जेब पर बोझ कम होगा। हालांकि, ईंधन और बिजली की महंगाई अभी भी ऊंची बनी हुई है।
नवंबर WPI के मुख्य आंकड़े
नवंबर में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर (-)0.62% पर आ गई, जबकि अक्टूबर में यह 7.67% थी। सब्जियों की कीमतों में 22.3% की भारी गिरावट दर्ज की गई। आलू में 34% और प्याज में 18% की कमी आई। फलों में भी 5% गिरावट हुई। प्राथमिक वस्तुओं (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई 2.48% से घटकर 0.32% हो गई। ईंधन और बिजली में महंगाई 5.84% से बढ़कर 6.15% हो गई। निर्मित उत्पादों (मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स) में महंगाई 1.37% रही। कुल WPI 1.89% पर आया, जो पिछले साल नवंबर के 0.26% से ज्यादा है, लेकिन महीने-दर-महीने गिरावट है।
महंगाई घटने की वजहें, सब्जियों की बंपर पैदावार और मौसम
इस बार सब्जियों की अच्छी पैदावार और अनुकूल मौसम मुख्य वजह रहे। सर्दी शुरू होने से बाजार में सप्लाई बढ़ी। फसलों की अच्छी आवक से कीमतें नियंत्रित हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य महंगाई कम होने से कुल WPI पर सकारात्मक असर पड़ा। हालांकि, क्रूड ऑयल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंची रहने से ईंधन महंगाई बढ़ी। RBI के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि खुदरा महंगाई (CPI) भी नियंत्रण में आएगी।
अर्थव्यवस्था पर असर: खुदरा कीमतें घटेंगी
थोक महंगाई घटने से खुदरा बाजार में भी कीमतें कम होंगी। उपभोक्ताओं को सब्जियां, फल और खाद्य वस्तुएं सस्ती मिलेंगी। RBI की मौद्रिक नीति पर भी असर पड़ेगा। अगर महंगाई 4% के लक्ष्य के करीब रहती है तो ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ेगी। व्यापारियों का कहना है कि यह गिरावट अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है। दिसंबर में त्योहारों की मांग से थोड़ी बढ़ोतरी संभव है, लेकिन कुल मिलाकर राहत बनी रहेगी।



