New Employment Scheme: केंद्र सरकार मनरेगा को निरस्त कर नया विधेयक ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G बिल 2025 ला रही है। इसमें रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 करने, साप्ताहिक मजदूरी और कृषि मौसम में अवकाश जैसे प्रावधान हैं। लेकिन फंड साझाकरण 60:40 (केंद्र:राज्य) होने से राज्यों पर बोझ बढ़ेगा। भाजपा की सहयोगी TDP ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री पय्यावुला केशव ने कहा कि TDP विधेयक का समर्थन और कार्यान्वयन करेगी, लेकिन फंड बंटवारा चिंताजनक है। नकदी की कमी वाले राज्य पर बोझ पड़ेगा। छोटे शहरों और गांवों के लोग जो ग्रामीण रोजगार पर निर्भर हैं, उनके लिए यह विधेयक फायदेमंद लेकिन फंडिंग मुद्दा चुनौती बन सकता है।
TDP मंत्री का बयान: ‘फंड शेयरिंग चिंताजनक, राज्य पर बोझ पड़ेगा’
पय्यावुला केशव ने कहा, “फंड का बंटवारा चिंताजनक है। अगर हमें योजना के लिए बड़ी राशि देनी पड़ी तो राज्य पर बहुत बोझ पड़ेगा। हालांकि, हमने अभी योजना के पूरे विवरण का अध्ययन नहीं किया है।” वित्त विभाग अधिकारियों ने कहा कि आंध्र प्रदेश जैसे नकदी संकट वाले राज्य के लिए यह चिंता का विषय है। लेकिन 125 दिन रोजगार, साप्ताहिक भुगतान और कृषि मौसम में ब्रेक जैसे प्रावधान उत्साहजनक हैं। ये कृषि क्षेत्र में श्रमिक उपलब्धता बढ़ाएंगे। TDP ने कहा कि वे विधेयक का समर्थन करेंगे, लेकिन राज्य हित में फंडिंग पर बात करेंगे।
नए विधेयक के मुख्य प्रावधान
विधेयक मनरेगा की जगह लेगा। मुख्य बदलाव: रोजगार 125 दिन, साप्ताहिक मजदूरी, कृषि मौसम में 60 दिन तक ब्रेक। फंड शेयरिंग: सामान्य राज्यों के लिए 60:40 (केंद्र:राज्य), पूर्वोत्तर, हिमालयी और केंद्रशासित के लिए 90:10। पहले मनरेगा में केंद्र पूरी मजदूरी देता था। अब राज्यों को हिस्सा देना होगा, जिससे बोझ बढ़ेगा। विधेयक विकसित भारत 2047 विजन से जुड़ा है।
राजनीतिक असर: सहयोगी TDP की चिंता, विपक्ष का विरोध
TDP भाजपा की सहयोगी है, फिर भी फंडिंग पर चिंता जताना गठबंधन में तनाव दिखाता है। विपक्ष ने नाम बदलने और गांधी नाम हटाने पर हमला बोला है। प्रियंका गांधी ने कहा कि यह फिजूलखर्ची है। लेकिन TDP ने सकारात्मक रुख अपनाया, सिर्फ फंडिंग पर सवाल उठाया। यह विधेयक ग्रामीण रोजगार को मजबूत करेगा, लेकिन राज्यों की वित्तीय स्थिति पर असर डालेगा।



