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सीयूजे में कार्यशाला: संथाली भाषा में लिखी जाएंगी पाठ्यपुस्तकें

रांची: उच्च शिक्षा के लिए संथाली भाषा में पाठ्यपुस्तक विकसित करने के लिए झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय में संथाली लेखकों की दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन भारतीय भाषा समिति (बीबीएस), शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से उच्च शिक्षा के लिए संथाली भाषा में पाठ्यपुस्तक विकसित करने के लिए किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के विज्ञान भवन के सभागार में आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न संथाली भाषा बोलने वाले राज्यों के 15 संस्थानों से 50 संथाली लेखकों और लेखकों ने भाग लिया। एकत्रित हुए शिक्षाविद, लेखक और लेखक पाठ्यपुस्तक लिखने का काम करेंगे। उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. दमयंती बेसरा ने विद्यार्थियों को समाज की रीढ़ बताते हुए कहा कि संथाली विद्यार्थी संथाली भाषा की रीढ़ हैं। भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए उनकी भागीदारी और प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। संथाली में पाठ्यपुस्तक विकसित करने की भारत सरकार की पहल हर बच्चे को भाषा की सहजता के साथ शिक्षित करने की दिशा में बुनियादी कदम है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर क्षिति भूषण दास जो भारतीय भाषा समिति-संथाली के नोडल समन्वयक भी हैं ने अपने अध्यक्षीय भाषण में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के चार स्तंभों पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से यूजीसी के उस मिशन पर प्रकाश डाला जिसमें केवल कुछ अभिजात्य वर्ग के लिए नहीं बल्कि आम लोगों के लिए शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे राज्य में विश्वविद्यालयों को इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा के अवसर पैदा करने होंगे। उन्होंने कहा कि संथाली पाठ्यपुस्तक लेखन के लिए नोडल केंद्र के रूप में सीयूजे संथाली लेखकों और इस क्षेत्र के विभिन्न संस्थानों के लेखकों के साथ मिलकर उच्च शिक्षा के लिए संथाली में पचास पाठ्यपुस्तकें तैयार करेगा।

बीबीएस-संथाली के नोडल प्रतितिधि डॉ. रजनीकांत पाण्डेय ने कार्यशाला की रूपरेखा पर चर्चा की तथा विज्ञान, सामाजिक एवं मानविकी विषयों के लिए संथाली भाषा की पाठ्यपुस्तक बनाने के शिक्षा मंत्रालय के उद्देश्यों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों से वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में एक-एक पुस्तक लिखने का लक्ष्य रखने का अनुरोध किया। यह आयोजन संथाली भाषा में उच्च शिक्षा के प्रचार-प्रसार में मील का पत्थर साबित होगा। शैक्षणिक सत्र में सीयूजे के प्रो बसंतिया एवं एनआईटी जमशेदपुर के प्रो केके सिंह ने संथाली में पाठ्यपुस्तक विकास के तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की। कार्यशाला में प्रो ए के पाढ़ी, प्रो श्रेया भट्टाचार्य, डॉ प्रज्ञा शुक्ला, श्री मुकेश जायसवाल, डॉ सुधांशु शेखर उपस्थित थे। डॉ शशि मिश्रा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ सत्र का समापन हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा इस प्रयास को संथाली भाषा एवं साहित्य के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

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