लखनऊ – उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हाल ही में विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुपूरक बजट पेश किया है। इस बजट में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मजबूती देने का प्रावधान किया गया है। खास तौर पर पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर विशेष ध्यान दिया गया है। अनुपूरक बजट में इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। इससे न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों को रफ्तार मिलेगी, बल्कि आम लोगों को सस्ती और प्रदूषण मुक्त यात्रा का लाभ भी मिलेगा।
अनुपूरक बजट का कुल आकार
योगी सरकार ने 24,497 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया है। यह बजट मुख्य रूप से विकास कार्यों को गति देने और जरूरी क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने के लिए लाया गया है। इसमें औद्योगिक विकास के लिए 4,874 करोड़, बिजली क्षेत्र के लिए 4,521 करोड़ और स्वास्थ्य के लिए 3,500 करोड़ रुपये जैसे बड़े प्रावधान शामिल हैं। कुल मिलाकर, इस बजट से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और जनकल्याण की योजनाओं को तेज करने का लक्ष्य है।
इलेक्ट्रिक वाहनों पर फोकस क्यों जरूरी?
आज के समय में प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। पेट्रोल-डीजल वाहनों से निकलने वाला धुआं शहरों की हवा को खराब कर रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन बिजली से चलते हैं, इसलिए इनसे कोई प्रदूषण नहीं होता। केंद्र सरकार भी ईवी को बढ़ावा दे रही है, और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यह कदम बहुत महत्वपूर्ण है। पहले से चल रही ईवी नीति में सब्सिडी और टैक्स छूट दी जा रही है, लेकिन चार्जिंग की सुविधा कम होने से लोग हिचकिचाते हैं। अब 50 करोड़ रुपये की इस अतिरिक्त व्यवस्था से चार्जिंग स्टेशनों का जाल बढ़ेगा।
50 करोड़ रुपये से क्या होगा?
यह 50 करोड़ रुपये मुख्य रूप से मध्यम श्रेणी की इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और उनके लिए चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना पर खर्च किए जाएंगे। सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसें आने से शहरों में ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों कम होंगे। उदाहरण के लिए, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी जैसे शहरों में ज्यादा चार्जिंग पॉइंट बनेंगे। इससे निजी इलेक्ट्रिक कार और दोपहिया वाहन चलाने वाले लोगों को भी आसानी होगी। पहले से चल रही योजनाओं में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई जा रही है, और यह अतिरिक्त बजट उन योजनाओं को नई रफ्तार देगा।
आम लोगों को क्या फायदा?
सस्ती यात्रा: इलेक्ट्रिक बसें आने से बस किराया कम हो सकता है, क्योंकि बिजली का खर्च डीजल से कम पड़ता है।
प्रदूषण में कमी: स्वच्छ हवा से स्वास्थ्य बेहतर होगा, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
रोजगार के अवसर: चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण और रखरखाव से नए रोजगार पैदा होंगे।
ईवी खरीदने में आसानी: ज्यादा चार्जिंग पॉइंट होने से लोग बिना डर के इलेक्ट्रिक कार या स्कूटी खरीदेंगे। पहले से मिल रही सब्सिडी (दोपहिया पर 5,000 रुपये, चार पहिया पर 1 लाख तक) का लाभ ज्यादा लोग ले सकेंगे।
पर्यावरण बचाओ: पेड़-पौधों और प्रकृति को बचाने में सबका योगदान बढ़ेगा।
राज्य की ईवी नीति का योगदान
उत्तर प्रदेश की इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2022 को 2027 तक बढ़ाया गया है। इसमें दोपहिया वाहनों पर 5,000 रुपये, चार पहिया पर 1 लाख रुपये तक सब्सिडी और रोड टैक्स में छूट दी जा रही है। अब अनुपूरक बजट में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर 50 करोड़ जोड़ने से यह नीति और मजबूत हो गई है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक ज्यादा से ज्यादा वाहन इलेक्ट्रिक हों। इससे न सिर्फ पर्यावरण बचेगा, बल्कि पेट्रोल-डीजल पर विदेशी निर्भरता भी कम होगी।
अन्य क्षेत्रों में भी प्रावधान
इस अनुपूरक बजट में सिर्फ ईवी ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया गया है। उदाहरण के लिए, शहरी विकास के लिए 1,758 करोड़ और तकनीकी शिक्षा के लिए 640 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इससे समग्र विकास होगा, जो ईवी अपनाने की राह को और आसान बनाएगा।
निष्कर्ष :
योगी सरकार का यह अनुपूरक बजट उत्तर प्रदेश को स्वच्छ और विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था से चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार होगा, जिससे ईवी को असली रफ्तार मिलेगी। आम आदमी को सस्ती, सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त यात्रा मिलेगी, साथ ही पर्यावरण भी बचेगा। यह बजट दिखाता है कि सरकार जनकल्याण और भविष्य की सोच के साथ काम कर रही है। अगर हम सब मिलकर ईवी अपनाएं, तो उत्तर प्रदेश जल्द ही स्वच्छ ऊर्जा का मॉडल राज्य बन सकता है। यह बदलाव न सिर्फ आज के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।



