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झारखंड में टीईटी की अनिवार्यता से 30 हजार शिक्षक हो सकते हैं प्रभावित, केंद्र सरकार ने मांगी रिपोर्ट

Jharkhand News: झारखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी की अनिवार्यता को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राज्य सरकार से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार टीईटी की अनिवार्यता लागू करने से झारखंड के कितने प्रारंभिक शिक्षक प्रभावित होंगे। साथ ही केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने को लेकर राज्य स्तर पर विधि परामर्श लेने का भी निर्देश दिया है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार झारखंड में लगभग 30 हजार शिक्षक इस आदेश से प्रभावित हो सकते हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ देशभर से 39 रिव्यू पिटीशन दाखिल किए गए हैं जिससे शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

केंद्र ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने झारखंड सरकार को पत्र लिखकर इसका आकलन करने और रिपोर्ट देने को कहा है कि टीईटी उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के आदेश लागू करने से झारखंड के कितने शिक्षक प्रभावित होंगे। यह डाटा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके आधार पर ही केंद्र सरकार आगे की रणनीति तय करेगी।

केंद्र ने यह भी निर्देश दिया है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने को लेकर राज्य स्तर पर विधि परामर्श ले। इससे यह स्पष्ट होगा कि आदेश को किस रूप में लागू किया जा सकता है और क्या कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है। राज्यों को रिपोर्ट देने के लिए बकायदा एक फार्मेट भी भेजा गया है ताकि सभी राज्यों से एक समान डाटा प्राप्त हो सके।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने अपने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पिछले वर्ष एक सितंबर 2025 को पारित उस आदेश का हवाला दिया है जिसमें सभी प्रारंभिक शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया गया है। यह नियम उन शिक्षकों पर भी लागू होता है जो आरटीई यानी शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले भी नियुक्त हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह भी कहा गया है कि दो वर्ष में टीईटी उत्तीर्ण नहीं करने वाले शिक्षकों को सरकार सेवा से हटा सकती है। यह प्रावधान बेहद कठोर है और इससे हजारों शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। साथ ही शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए भी टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा। इसका मतलब है कि जो शिक्षक टीईटी पास नहीं करेंगे उन्हें पदोन्नति भी नहीं मिलेगी।

शिक्षकों और संगठनों की चिंताएं

Jharkhand News: Teacher Teaching in Classroom
Jharkhand News: Teacher Teaching in Classroom

केंद्रीय मंत्रालय ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि उक्त आदेश से छूट दिलाने को लेकर मंत्रालय को कई शिक्षकों, शिक्षक संघों तथा सांसदों आदि के ज्ञापन मिले हैं। इन ज्ञापनों में कहा गया है कि कई शिक्षक अब इस आयु तक पहुंच चुके हैं कि उनके लिए टीईटी उत्तीर्ण होना आसान नहीं होगा।

वरिष्ठ शिक्षकों का तर्क है कि उन्होंने दशकों तक शिक्षण कार्य किया है और अब 50 या 55 वर्ष की आयु में एक नई परीक्षा देना और उसे उत्तीर्ण करना बेहद कठिन है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश लागू करने से उनके समक्ष गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है। अगर वे टीईटी पास नहीं कर पाते हैं तो उनकी नौकरी चली जाएगी और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके इन शिक्षकों के लिए नई नौकरी पाना असंभव होगा।

मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि वह उक्त आदेश को लेकर सही निष्कर्ष पर तब तक नहीं पहुंच सकता जब तक कि सभी राज्यों से डाटा नहीं मिल जाए कि इस आदेश से कितने शिक्षक प्रभावित होंगे। यह एक सकारात्मक संकेत है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।

39 रिव्यू पिटीशन दाखिल

सर्वोच्च न्यायालय के उक्त आदेश के विरुद्ध कुल 39 रिव्यू पिटीशन दाखिल किए गए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, त्रिपुरा और केरल राज्य के अलावा विभिन्न शिक्षक संगठनों के पिटीशन सम्मिलित हैं। यह बड़ी संख्या दर्शाती है कि यह मुद्दा पूरे देश में कितना गंभीर है।

इतनी बड़ी संख्या में रिव्यू पिटीशन दाखिल होने से यह संभावना बढ़ गई है कि सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश पर पुनर्विचार कर सकता है या कम से कम कुछ राहत प्रदान कर सकता है। इस बीच एक संगठन ने रिट पिटीशन भी दाखिल किया था जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष 25 दिसंबर 2025 को अस्वीकार कर दिया।

झारखंड में 30 हजार शिक्षक प्रभावित होने की संभावना

झारखंड में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा टीईटी उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता लागू होने से लगभग 30 हजार शिक्कर प्रभावित हो सकते हैं। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने यह अनुमान लगाया है। यह एक बहुत बड़ी संख्या है और इससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक जिलों से इसकी आधिकारिक रिपोर्ट नहीं मंगाई है। जब केंद्र के निर्देश के बाद राज्य सरकार जिलों से डाटा मांगेगी तो सटीक आंकड़े सामने आएंगे। साथ ही राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश लागू करने या नहीं करने को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। यह स्थिति शिक्षकों के लिए अनिश्चितता का कारण बन रही है।

एनसीटीई के रेगुलेशन के अनुपालन के भी निर्देश

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राज्य सरकार को राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद यानी एनसीटीई द्वारा शिक्षक नियुक्ति को लेकर गठित विभिन्न रेगुलेशनों के अनुपालन के भी निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि राज्य में गठित या गठित होने वाली शिक्षक नियुक्ति नियमावलियों में एनसीटीई के रेगुलेशनों को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।

यह निर्देश शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक मानकीकृत और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से दिया गया है। एनसीटीई ने शिक्षकों की योग्यता, प्रशिक्षण और नियुक्ति को लेकर कई मानदंड निर्धारित किए हैं जो सभी राज्यों को लागू करने होंगे।

शिक्षा की गुणवत्ता बनाम शिक्षकों की नौकरी

यह विवाद शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा के बीच संतुलन का मामला है। एक ओर यह तर्क दिया जाता है कि टीईटी शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक बेहतर शिक्षण विधियों से परिचित होंगे और बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकेंगे।

दूसरी ओर शिक्षक संगठनों का तर्क है कि अनुभवी शिक्षकों ने दशकों तक बिना टीईटी के सफलतापूर्वक पढ़ाया है। उनका व्यावहारिक अनुभव किसी भी परीक्षा से अधिक मूल्यवान है। अब उन्हें टीईटी पास करने के लिए मजबूर करना अन्यायपूर्ण है।

Jharkhand News: क्या होगी आगे की राह?

केंद्र सरकार सभी राज्यों से डाटा एकत्र करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेगी। सुप्रीम कोर्ट में लंबित 39 रिव्यू पिटीशनों की सुनवाई भी महत्वपूर्ण होगी। अगर सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश में कुछ राहत देता है या आदेश को संशोधित करता है तो हजारों शिक्षकों को राहत मिल सकती है।

झारखंड सरकार को भी जल्द ही स्थिति स्पष्ट करनी होगी। शिक्षक संगठन सरकार से मांग कर रहे हैं कि वह इस मामले में शिक्षकों के पक्ष में खड़ी हो और केंद्र तथा सुप्रीम कोर्ट से राहत दिलाने का प्रयास करे।

निष्कर्ष: झारखंड में टीईटी की अनिवार्यता का मुद्दा शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। 30 हजार शिक्षकों की नौकरी दांव पर है। केंद्र सरकार द्वारा रिपोर्ट मांगना और 39 रिव्यू पिटीशन दाखिल होना शिक्षकों के लिए राहत की किरण है। अब देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या निर्णय लेते हैं।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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