Kidney Transplant in Jharkhand: झारखंड के किडनी रोगियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य में पहली बार सरकारी और निजी दोनों स्तरों पर किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की परामर्शदात्री समिति ने 9 जनवरी 2026 को हुई बैठक में राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी रिम्स और राज अस्पताल रांची को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मंजूरी दे दी है। यह निर्णय राज्य के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम है।
अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली इस बैठक में दोनों अस्पतालों को मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत योग्य पाया गया। जल्द ही लाइसेंस जारी होंगे और इसके बाद झारखंड के हजारों किडनी रोगियों को इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई या चेन्नई जैसे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। अब वे अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय इलाज पा सकेंगे।
मरीजों के लिए गेम चेंजर फैसला

यह फैसला मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना और आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से जुड़े मरीजों के लिए गेम चेंजर साबित होगा। अब तक ऐसे मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दूसरे राज्यों में रेफर किया जाता था।
बाहर जाकर इलाज कराना बहुत महंगा पड़ता था। इलाज के खर्च के साथ साथ यात्रा, रहने और खाने का खर्च भी अलग से आता था। गरीब परिवारों के लिए यह बोझ उठाना लगभग असंभव था। अब स्थानीय स्तर पर ही उन्नत इलाज मिलने से मरीजों को बहुत राहत मिलेगी। परिवार के सदस्य भी पास रहकर मरीज की देखभाल कर सकेंगे। भावनात्मक और आर्थिक दोनों तरह से यह फायदेमंद होगा।
किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया
किडनी ट्रांसप्लांट एक जटिल सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें स्वस्थ किडनी को डोनर यानी दाता से लेकर मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। डोनर जीवित या मृत दोनों हो सकता है।
सर्जरी आमतौर पर पेट के निचले हिस्से में की जाती है। पुरानी खराब किडनी को निकालने की जरूरत नहीं होती। नई किडनी को उसी जगह लगा दिया जाता है जहां वह अच्छे से काम कर सके। भारत में यह प्रक्रिया काफी सुरक्षित और सफल है। सफल ट्रांसप्लांट के बाद मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। डायलिसिस की जरूरत खत्म हो जाती है। जीवन की गुणवत्ता में बहुत सुधार होता है।
सर्जरी के बाद मरीज को जीवन भर दवाएं लेनी पड़ती हैं ताकि शरीर नई किडनी को अस्वीकार न करे। नियमित जांच और फॉलोअप भी जरूरी है।
भारत में किडनी ट्रांसप्लांट के नियम
ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यूज एक्ट यानी THOA 1994 के तहत भारत में किडनी ट्रांसप्लांट के सख्त नियम हैं। इस कानून को 2011 और 2014 में संशोधित किया गया। इसका उद्देश्य अंगों के अवैध व्यापार को रोकना है।
जीवित डोनर के मामले में वह निकट संबंधी होना चाहिए। माता पिता, पति पत्नी, भाई बहन, बच्चे, दादा दादी या पोते पोतियां इसमें शामिल हैं। अगर डोनर निकट संबंधी नहीं है तो अफेक्शन यानी लगाव का सबूत देकर अप्रूवल कमेटी से मंजूरी लेनी पड़ती है।
डोनर की उम्र 18 साल से ऊपर होनी चाहिए। वह स्वस्थ होना चाहिए और स्वेच्छा से किडनी दान करना चाहिए। किसी तरह का दबाव या लालच नहीं होना चाहिए।
मृत डोनर के मामले में ब्रेन डेथ के बाद परिवार की सहमति से किडनी ली जा सकती है। केवल रजिस्टर्ड अस्पताल और डॉक्टर ही ट्रांसप्लांट कर सकते हैं। नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन यानी NOTTO इसे मॉनिटर करता है।
स्वैप डोनेशन की सुविधा
अगर ब्लड ग्रुप मैच न हो तो स्वैप डोनेशन की सुविधा है। इसमें दो जोड़ियों में किडनी की अदलाबदली होती है। मान लीजिए एक परिवार में पति को किडनी चाहिए और पत्नी देना चाहती है लेकिन ब्लड ग्रुप मैच नहीं हो रहा। दूसरे परिवार में भी यही स्थिति है। तो पहले परिवार की पत्नी दूसरे परिवार के पति को किडनी देती है और दूसरे परिवार की पत्नी पहले परिवार के पति को देती है। इस तरह दोनों को फायदा होता है।
अवैध व्यापार पर सख्त सजा का प्रावधान है। 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है। भारत में सालाना हजारों किडनी ट्रांसप्लांट होते हैं। सफलता दर 90 से 95 प्रतिशत तक है।
रिम्स रांची में मुफ्त इलाज
राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति मिलना एक ऐतिहासिक कदम है। यहां आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत मरीजों को पूरी तरह मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी।
रिम्स में पहले से ही अत्याधुनिक डायलिसिस यूनिट है। नेफ्रोलॉजी विभाग में अनुभवी डॉक्टरों की टीम है। अब इन सुविधाओं के साथ किडनी ट्रांसप्लांट भी शुरू होगा।
गरीब से गरीब मरीज भी दिल्ली या चंडीगढ़ जाए बिना विश्वस्तरीय सर्जरी करा सकेंगे। सरकारी दर पर इलाज होने से मध्यम वर्ग के परिवारों पर भी आर्थिक बोझ कम होगा। रिम्स में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। ट्रांसप्लांट के लिए विशेष वार्ड और ऑपरेशन थियेटर तैयार किए जाएंगे। पोस्ट ऑपरेटिव केयर के लिए भी व्यवस्था होगी।
राज अस्पताल में निजी सुविधा
निजी क्षेत्र में राज अस्पताल को ट्रांसप्लांट के लिए योग्य पाया गया है। यह उन मरीजों के लिए बड़ा विकल्प होगा जो कम वेटिंग पीरियड और अत्याधुनिक सुविधाओं को प्राथमिकता देते हैं।
मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के कड़े मानकों पर खरा उतरने वाले इस अस्पताल में पोस्ट ऑपरेटिव केयर के लिए विशेष आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था है। संक्रमण नियंत्रण के लिए सभी जरूरी सुविधाएं हैं। यहां निजी स्तर पर इलाज के साथ साथ गंभीर बीमारी योजनाओं के लाभार्थियों को भी नियमानुसार लाभ मिल सकेगा। अस्पताल में अनुभवी सर्जनों की टीम है।
राज अस्पताल में आधुनिक तकनीक और उपकरण उपलब्ध हैं। मरीजों की सुविधा और आराम का पूरा ध्यान रखा जाता है।
ट्रांसप्लांट से पहले की तैयारी
किडनी ट्रांसप्लांट से पहले कुछ जरूरी तैयारी करनी पड़ती है। सबसे पहले ब्लड ग्रुप मैचिंग होती है। डोनर और रिसीवर का ब्लड ग्रुप मैच होना पहली प्राथमिकता है।
अगर डोनर परिवार का सदस्य है तो रिलेशनशिप प्रूफ चाहिए। आधार कार्ड, वंशावली या अन्य कानूनी दस्तावेज तैयार रखने होते हैं। दोनों अस्पतालों में ट्रांसप्लांट से पहले एथिक्स कमेटी की मंजूरी अनिवार्य होगी। यह कमेटी यह सुनिश्चित करती है कि सब कुछ कानूनी तरीके से हो रहा है।
मरीजों को नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन यानी NOTTO के पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा। यह जरूरी प्रक्रिया है। डोनर और रिसीवर दोनों की पूरी मेडिकल जांच होती है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि दोनों सर्जरी के लिए फिट हैं।
झारखंड के लिए गेम चेंजर
एक अनुमान के मुताबिक झारखंड से हर साल लगभग 200 से 300 मरीज किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दक्षिण भारत या दिल्ली जाते हैं। अब यह संख्या शून्य हो जाएगी। बाहर जाने पर इलाज के साथ साथ रहने खाने का खर्च भी 3 से 5 लाख रुपये अतिरिक्त बढ़ जाता है। अब यह खर्च बचेगा। परिवार की आर्थिक स्थिति पर भारी बोझ नहीं पड़ेगा।
ट्रांसप्लांट के बाद हर महीने डॉक्टर को दिखाना पड़ता है। फॉलोअप बहुत जरूरी है। स्थानीय सुविधा होने से मरीजों को सफर की थकान और जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा। दिल्ली या चेन्नई के लिए हर महीने यात्रा करना महंगा और थकाऊ है। बुजुर्ग मरीजों के लिए यह और मुश्किल होता है। अब रांची में ही फॉलोअप हो जाएगा।
स्वास्थ्य सेवा में सुधार
यह कदम झारखंड के स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई देगा। राज्य में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं का विकास हो रहा है। किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जटिल प्रक्रिया राज्य में संभव होना बड़ी उपलब्धि है। इससे स्थानीय डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को भी प्रशिक्षण और अनुभव मिलेगा। नई तकनीकें सीखने का मौका मिलेगा। मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
अन्य राज्यों से भी मरीज झारखंड आ सकते हैं। बिहार और ओडिशा के नजदीकी इलाकों के मरीज रांची में इलाज करा सकते हैं। झारखंड सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विकास पर फोकस कर रही है। किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Kidney Transplant in Jharkhand: ऑर्गन डोनेशन की जागरूकता जरूरी
किडनी ट्रांसप्लांट की सफलता के लिए ऑर्गन डोनेशन बहुत जरूरी है। लोगों को ऑर्गन डोनेशन के बारे में जागरूक करना होगा। एक डोनेशन कई जिंदगियां बचा सकता है। मृत्यु के बाद अंगदान करने का संकल्प लेना चाहिए। अपने परिवार को भी बताना चाहिए। ताकि समय आने पर वे आपकी इच्छा का सम्मान करें।
जीवित रहते भी एक स्वस्थ व्यक्ति अपनी एक किडनी दान कर सकता है। एक किडनी से भी व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। सरकार और समाज दोनों को मिलकर ऑर्गन डोनेशन को बढ़ावा देना होगा। जागरूकता अभियान चलाने होंगे। मीडिया की भी बड़ी भूमिका है।
किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा झारखंड में शुरू होना एक ऐतिहासिक कदम है। यह राज्य के मरीजों के लिए वरदान साबित होगा। अब उन्हें इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। घर के पास ही विश्वस्तरीय इलाज मिलेगा। यह स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में झारखंड की एक बड़ी छलांग है।



