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5 दिसंबर 1906 – जब भारत ने पहली बार अपना बीमा कंपनी बनाया – नेशनल इंश्योरेंस की अनकही स्वदेशी कहानी

डेस्क: 5 दिसंबर 1906 में कलकत्ता के एक छोटे से ऑफिस में कुछ बंगाली वकील और व्यापारी बैठे। उन्होंने कहा – “हम अपनी बीमारी, अपनी मृत्यु का बीमा खुद करेंगे, अंग्रेज़ों से क्यों लें?” उस दिन नेशनल इंश्योरेंस कंपनी पैदा हुई – और भारत का पहला स्वदेशी बीमा आंदोलन शुरू हो गया। यह सिर्फ एक व्यापारिक निर्णय नहीं था; यह उस समय चल रहे व्यापक स्वदेशी आंदोलन की भावना का प्रतिबिंब था। स्वदेशी आंदोलन का उद्देश्य आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त करना और ब्रिटिश वस्तुओं और सेवाओं का बहिष्कार करना था।

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वो 5 लोग जिन्होंने अंग्रेज़ों को चकमा दे दिया:

  1. ज्ञानचंद्र घोष – कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील, सबसे पहले आइडिया दिया
  2. सुरेंद्रनाथ बनर्जी – स्वदेशी आंदोलन के अगुआ, पॉलिसी बेचने के लिए अपने भाषणों का इस्तेमाल किया
  3. रासबिहारी घोष – बैरिस्टर, कानूनी ढांचा तैयार किया
  4. देवीप्रसाद खेतान – मारवाड़ी व्यापारी, पहला 10 लाख रुपये का कैपिटल जुटाया
  5. अमृत बाजार पत्रिका – हर अंक में विज्ञापन छापकर लोगों को समझाया – “अंग्रेज़ों को प्रीमियम मत दो”

आज भी ज़िंदा है वो कंपनी: आज वो कंपनी न्यू इंडिया एश्योरेंस के नाम से जानी जाती है –

  • भारत की सबसे पुरानी जनरल इंश्योरेंस कंपनी
  • 2025 में मार्केट कैप: 55,000 करोड़+
  • अभी भी कंपनी – 100% भारत सरकार के पास

बिज़नेस करने वाले को फ़ायदा?

  1. सबसे पुराना और मज़बूत बैकअप 119 साल पुरानी कंपनी, 100% भारत सरकार की – दिवालिया होने का रिस्क शून्य। विदेशी कंपनियाँ भाग सकती हैं, ये कभी नहीं भागेगी।
  2. बेस्ट कमर्शियल इंश्योरेंस रेट्स दुकान, गोदाम, फ़ैक्ट्री, व्हीकल फ्लीट बीमा में न्यू इंडिया का प्रीमियम अक्सर बजाज, ICICI लोम्बार्ड से 12-20% सस्ता पड़ता है (2025 ब्रोकर डेटा)।
  3. सरकारी टेंडर में फ़ायदा ज्यादातर सरकारी ठेके में “पब्लिक सेक्टर इंश्योरेंस” को प्राथमिकता मिलती है – न्यू इंडिया चुनोगे तो टेंडर जीतने की संभावना 30-40% बढ़ जाती है।
  4. क्लेम में “देशी” सपोर्ट विदेशी कंपनियाँ दिल्ली-मुंबई से बाहर सर्वेक्षक नहीं भेजतीं – न्यू इंडिया के 2000+ ब्रांच पूरे गाँव-कस्बे में हैं। छोटे-मोटे क्लेम 3-7 दिन में सेटल।
  5. सस्ता और भरोसेमंद ऑप्शन न्यू इंडिया आज भी ज्यादातर पॉलिसी में प्रीमियम विदेशी कंपनियों से 8-15% कम रखती है, और क्लेम सेटलमेंट रेशियो 94%+ है (IRDAI 2025 डेटा)। यानी पैसा भी बचता है, क्लेम भी जल्दी मिलता है।

  6. स्वदेशी को मज़बूत करने का आसान तरीक़ा अगली बार बीमा रिन्यू कराते वक्त बस एक ऑप्शन चुनना है – न्यू इंडिया। न कोई अतिरिक्त मेहनत, न अतिरिक्त खर्चा – फिर भी आप स्वदेशी आंदोलन का हिस्सा बन जाते हैं।

निष्कर्ष:

1906 में कुछ बंगाली और मारवाड़ी व्यापारियों ने जो सपना देखा था – कि हमारी कमाई विदेश न जाए, हमारी सुरक्षा अपने हाथ में हो – आज वो सपना 1.4 अरब भारतीयों का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। हर बार जब आप न्यू इंडिया की पॉलिसी लेते हैं, बिना जाने आप 1906 के उन स्वदेशी सिपाहियों को सैल्यूट कर रहे होते हैं।

“1906 में शुरू हुआ एक छोटा सा बीमा ऑफिस आज 55,000 करोड़ की कंपनी है – ये है असली स्वदेशी की ताकत।”

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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