रांची। सीपीआई राज्य कार्यालय में सीपीआई के पूर्व महासचिव कॉम ए बी बर्धन की 9वीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया गया और उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।
राज्य कार्यकारणी सदस्य सह जिला सचिव अजय सिंह ने कहा कि कॉम वर्धन सीपीआई के बौद्धिक और सांगठनिक स्तंभ थे। उन्होंने अपनी वैचारिक लड़ाई के साथ कभी समझौता नहीं किया।झारखंड से उनका विशेष लगाव था,उन्होंने 1939 में मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के साथ मिलकर अखिल भारतीय आदिवासी महासभा का गठन किया और आदिवासी समाज के हितों को लेकर कई योजनाएं बनाई ,देश में उद्योगों ,बैंकों, एल आई सी,कोयला खनन के राष्ट्रीयकरण के समय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई,।उन्होंने लम्बे समय तक पार्टी का नेतृत्व किया। वे लाल झंडे के एकीकरण के समर्थक थे।उन्होंने यूपीए 1 की सरकार के समय कई जनहित कानूनों को लागू कराने की पहल किया।
कॉमरेड वर्धन की प्रासंगिता आज और बढ़ जाती हैं जब देश के संवैधानिक संस्थाओं और अधिकारों का हनन हो रहा है।वो चाहे किसानों के मांग हो या मजदूरों के लेबर कानूनों में संशोधन का मामला हो,कॉम वर्धन मजदूरों किसानों और इस देश के शोषित वंचितों के आवाज़ थे।इसलिए कॉम वर्धन को सच्ची श्रद्धांजलि तब होगी जब उनके विचारधारा को मजबूती से आत्मसात कर जनता की लड़ाई को तेज करें।
इस कार्यकर्म में मुख्य रूप से ,मनोज ठाकुर,किरण कुमारी, श्यामल ,राजेश, फरजाना फारूकी,सफरूदीन,सहित कई लोग शामिल थे.

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