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मकबरे की जमीन पर विवाद: दस्तावेजों से खुला मालिकाना हक, मंदिर-मकबरे की पहचान पर टकराव जारी

14 अगस्त 2025
मकबरे की जमीन पर विवाद: दस्तावेजों से खुला मालिकाना हक, मंदिर-मकबरे की पहचान पर टकराव जारी

आबूनगर स्थित मकबरे की जमीन को लेकर सोमवार को हुए बवाल के बाद मंगलवार को दिनभर सरकारी रिकॉर्ड खंगाले गए। जांच में सामने आया कि 1359 फसली (1952) की खतौनी में यह जमीन जमींदार के बागान के नाम दर्ज थी। बाद में यह विरासत में नरेश्वर मान सिंह को मिली और 1970 में उनकी बेटी शकुंतला मान सिंह के नाम हो गई। शकुंतला ने यह जमीन असोथर के रामनरेश को बेच दी, जिन्होंने 34 प्लॉट बेचकर कानपुर में बस गए।

विवाद की शुरुआत 2007 में हुई जब तत्कालीन मुतवल्ली मोहम्मद अनीश ने मुकदमा दायर किया। 2010 में अदालत के आदेश के आधार पर 2012 में गाटा संख्या 753 में मकबरा मंगी का नाम दर्ज हो गया। इसके बाद हाई कोर्ट में भी याचिका दायर हुई, जिसमें दावा किया गया कि जमीन का नाम शकुंतला मान सिंह के नाम गलत तरीके से चढ़ाया गया था।

डीएम रविंद्र सिंह ने बताया कि दस्तावेजों की जांच जारी है और पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर मकबरे के ऐतिहासिक दर्जे की पुष्टि मांगी गई है।

दोनों पक्षों के दावे
सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा नियुक्त मुतवल्ली अबू हुरेरा का कहना है कि मकबरा 1611 में बना था और यह राष्ट्रीय संपत्ति घोषित है। वहीं, मठ-मंदिर संरक्षण संघर्ष समिति के धनंजय द्विवेदी का दावा है कि गुंबद पर कमल का आकार, भगवा रंग की पुरानी पोताई और घंटा बांधने के लिए जंजीर जैसे संकेत बताते हैं कि यह स्थान पहले मंदिर था।

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कवरेज: Krishan Mohan shukla, News Media Kiran

Krishan Mohan shukla

News Media Kiran के लिए लिखते हैं।

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