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नकली दवाइयाँ: बीमारी से भी बड़ा खतरा — क्या हम सच में सुरक्षित हैं?

डेस्क: कई बार बीमारी से लड़ते हुए हम भरोसा दवाइयों पर करते हैं — कि ये हमें बचाएंगी, ठीक करेंगी, राहत देंगी।
लेकिन अगर वही दवा बीमारी नहीं बल्कि ज़हर बन जाए, तो? भारत में तेज़ी से फैला “फेक मेडिसिन मार्केट” अब सिर्फ एक हेल्थ इश्यू नहीं, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी का खतरा बन चुका है।

क्योंकि असली डर बीमारी का नहीं …
गलत दवा से धीरे-धीरे मौत का है — वो भी बिना किसी को पता चले।

नकली दवाओं का बाज़ार कितना बड़ा है?

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में मिलने वाली 3–5% दवाएँ या तो नकली हैं, या घटिया क्वालिटी की।
यानी हर 20 में से 1 दवा आपके शरीर को ठीक नहीं, बल्कि नष्ट कर सकती है।

खतरा असर
नकली एंटीबायोटिक्स शरीर में रेज़िस्टेंस बढ़ता है, दवाइयाँ असर करना बंद कर देती हैं
नकली दर्दनिवारक किडनी फेलियर, लिवर डैमेज का जोखिम
नकली डायबिटीज/हार्ट दवाएँ स्ट्रोक, हार्ट अटैक, कोमा तक का खतरा
गलत मात्रा या मिलावट धीरे-धीरे शरीर को ज़हर जैसा नुकसान

मनोवैज्ञानिक प्रभाव: यह डर असली बीमारी से भी बड़ा है

एक सच्चाई समझो—
जब इंसान दवा पर भरोसा खो देता है, वह डॉक्टर पर भी भरोसा खो देता है।

और जब भरोसा टूटता है, तो शरीर आधा बीमार हो ही जाता है।

एक उदाहरण जो लोगों की सोच हिला देता है:

मान लो किसी परिवार में बुज़ुर्ग माँ को दिल की दवा दी जा रही है, दवा नकली निकलती है, लक्षण बिगड़ते जाते है , परिवार को लगता है कि डॉक्टर अच्छे नहीं थे, माँ को लगता है शायद अब उम्र ही हो गई है, लेकिन असल अपराधी था — एक छोटा सा दिखने वाला नकली टैबलेट

यही मानसिक बोझ असली बीमारी से भी ज़्यादा घातक होता है।

क्यों बढ़ रहा है नकली दवाओं का कारोबार?

  • ऑनलाइन अनरेगुलेटेड सेल
  • छोटे शहरों में दवा सप्लाई चैन का कंट्रोल न होना
  • महंगी दवाओं की डुप्लीकेट सप्लाई
  • सरकारी सैंपल टेस्टिंग की कमी
  • नकली पैकिंग को असली जैसा बनाना आसान

लोग कैसे पहचानें कि दवा असली है या नहीं?

  1. STRIP पर QR कोड स्कैन करें (सरकार ने यह अनिवार्य किया है)

  2. केवल विश्वसनीय मेडिकल स्टोर से दवा खरीदें

  3. ऑनलाइन मेडिसिन सिर्फ ऑथोराइज़्ड ऐप से लें

  4. स्ट्रिप पर

  • spelling mistake
  • रंग अलग
  • बैच नंबर mismatch
    कुछ भी मिले… दवा तुरंत बदलें

निष्कर्ष:

नकली दवाइयों का खतरा सिर्फ मेडिकल नहीं— यह भरोसे, उम्मीद और जान—तीनों पर हमला है। जब दवा भरोसे की हो और बाज़ार बेईमानी का… तो मरीज नहीं, देश बीमार होता है।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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