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‘युवा साथी’ योजना पर BJP का ममता सरकार पर तीखा प्रहार, 48 घंटे में 13 लाख रजिस्ट्रेशन को बताया बेरोजगारी का सबूत, पुरानी ‘युवाश्री’ स्कीम से जोड़ा कनेक्शन

West Bengal News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी घमासान और तेज होता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जहां अपनी योजनाओं को जनता के सामने उपलब्धि के रूप में पेश कर रही हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इन्हीं योजनाओं को हथियार बनाकर तृणमूल कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोल दिया है। ताजा विवाद ‘युवा साथी’ योजना को लेकर खड़ा हुआ है। BJP के आईटी सेल प्रमुख और बंगाल के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने इस योजना में महज 48 घंटों में 13 लाख रजिस्ट्रेशन होने पर ममता सरकार को जमकर घेरा है और इसे प्रदेश में फैली बेरोजगारी का जीता-जागता सबूत करार दिया है।

क्या है ‘युवा साथी’ योजना?

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव से पहले राज्य के बेरोजगार युवाओं के लिए ‘युवा साथी’ योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को हर महीने 1,500 रुपये का भत्ता देने का प्रावधान है। योजना शुरू होते ही इसमें पंजीकरण की होड़ मच गई और महज 48 घंटों के भीतर 13 लाख से अधिक युवाओं ने इस योजना में रजिस्ट्रेशन करा लिया। तृणमूल कांग्रेस सरकार इस भारी भागीदारी को अपनी लोकप्रियता का प्रमाण बता रही है, लेकिन BJP ने इसी आंकड़े को अपने हमले का आधार बना लिया है।

अमित मालवीय का तीखा हमला: दावा 2 करोड़ नौकरियों का, हकीकत कुछ और

BJP नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए ममता सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार पिछले एक दशक से बंगाल में 2 करोड़ नौकरियां पैदा करने के बड़े-बड़े दावे करती आई है। लेकिन जब इसी सरकार की बेरोजगारी भत्ता योजना में 48 घंटे के भीतर 13 लाख युवा पंजीकरण कराते हैं तो यह खुद-ब-खुद साबित कर देता है कि रोजगार सृजन के दावे महज जुमले थे। मालवीय ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन ममता सरकार की नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण है।

टैक्सपेयर के पैसे और विदेश यात्राओं पर उठाए सवाल

अमित मालवीय ने अपने हमले में यहीं नहीं रुके। उन्होंने सवाल उठाया कि करदाताओं के करोड़ों रुपये विदेशी यात्राओं और बड़े-बड़े ‘बिस्वा बंगा’ जैसे भव्य आयोजनों पर खर्च करने के बाद अब सरकार बंगाल के युवाओं को 1,500 रुपये की मासिक सहायता देकर उन्हें संतुष्ट करना चाहती है। उनका तर्क था कि यह रकम असली रोजगार का विकल्प नहीं हो सकती और यह युवाओं की महत्वाकांक्षाओं के साथ एक तरह का मजाक है। उन्होंने कहा कि बंगाल के युवा दिखावे से कहीं अधिक की उम्मीद रखते हैं।

‘युवाश्री’ का रीसायकल वर्जन है ‘युवा साथी’

BJP नेता ने ममता सरकार पर पुरानी योजनाओं को नया नाम देकर पेश करने का भी गंभीर आरोप लगाया। मालवीय ने याद दिलाया कि 2013 में भी तृणमूल सरकार ने बड़े तामझाम के साथ ‘युवाश्री’ योजना की शुरुआत की थी जिसमें बेरोजगार युवाओं को हर महीने 1,500 रुपये देने का वादा किया गया था। लेकिन 2017-18 के बाद इस योजना के लिए आवंटन लगभग बंद हो गया। उन्होंने कहा कि 2013-14 में आवेदन करने वाले हजारों युवा आज भी अपने हक के इंतजार में बैठे हैं। मालवीय के मुताबिक ‘युवा साथी’ कुछ और नहीं बल्कि उसी पुरानी और विफल ‘युवाश्री’ योजना का नया रूप है।

नाम बदलने से नौकरियां नहीं बनतीं: मालवीय

BJP नेता ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि रुकी हुई योजना का केवल नाम बदल देने से बेरोजगारी की समस्या हल नहीं होती और वादों को दोहराने से युवाओं का भविष्य नहीं बनता। उन्होंने कहा कि बंगाल के युवाओं को चुनाव से पहले घोषित होने वाले भत्तों की नहीं बल्कि अच्छी शिक्षा, वास्तविक रोजगार के अवसर और सम्मान के साथ जीवन यापन करने के साधनों की जरूरत है। मालवीय ने यह भी कहा कि बंगाल का भविष्य पुरानी स्कीमों और हेडलाइन मैनेजमेंट के दम पर नहीं बनाया जा सकता।

चुनाव से पहले राजनीतिक दांव-पेंच

पश्चिम बंगाल में आने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों प्रमुख दलों के बीच जनता को लुभाने की कोशिश तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस जहां अपनी कल्याणकारी योजनाओं को आगे रखकर जनता से समर्थन मांग रही है, वहीं BJP हर योजना में खामियां ढूंढकर ममता सरकार को कटघरे में खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रही है। युवा मतदाता बंगाल में एक निर्णायक वर्ग है और दोनों दल इस वर्ग को अपने पाले में करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।

West Bengal News: बंगाल में बेरोजगारी की असली तस्वीर

देश के अन्य राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल में भी बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। शिक्षित युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार न मिलना और उद्योग-धंधों का पर्याप्त विकास न होना लंबे समय से बंगाल की राजनीति में एक केंद्रीय मुद्दा रहा है। ऐसे में जब किसी योजना में 48 घंटों में लाखों आवेदन आते हैं तो यह आंकड़ा अपने आप में प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों की एक स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करता है। बंगाल के युवा इस बार के चुनाव में रोजगार और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए अपना फैसला करेंगे, यह बात दोनों दलों को भली-भांति पता है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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