West Bengal Election: पश्चिम बंगाल में बेरोजगारी की बढ़ती समस्या को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ एक नया और व्यापक जन-अभियान शुरू किया है। ‘हमें रोजगार चाहिए बंगाल’ नाम से शुरू किए गए इस अभियान के जरिए भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है।
‘हमें रोजगार चाहिए बंगाल’ अभियान क्या है और क्यों हुई इसकी शुरुआत?
भाजपा द्वारा शुरू किए गए ‘हमें रोजगार चाहिए बंगाल’ अभियान की पृष्ठभूमि पश्चिम बंगाल में लगातार गहराती बेरोजगारी की स्थिति है। राज्य में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सिकुड़ते जा रहे हैं, जिसके चलते बड़ी संख्या में युवा अपने घर-परिवार छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन करने पर मजबूर हो रहे हैं।
पार्टी के अनुसार, यह अभियान केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं की आवाज है जो शिक्षित होने के बावजूद अपने ही प्रदेश में नौकरी पाने में असमर्थ हैं। अभियान के तहत राज्यभर में जनसभाएं, पदयात्राएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें आम नागरिकों को सरकार की नाकामियों से अवगत कराया जा रहा है।
सांसद रजु बिस्ता का ममता सरकार पर सीधा हमला
दार्जिलिंग से भाजपा सांसद रजु बिस्ता इस अभियान में सबसे मुखर नेताओं में से एक हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। बिस्ता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में, खासकर उत्तर बंगाल के जिलों में, बेरोजगारी की दर चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। स्थानीय युवा रोजगार की तलाश में असम, गुजरात, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में जाने को मजबूर हो रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ममता सरकार ने न तो राज्य में नए उद्योग स्थापित करने के लिए अनुकूल माहौल बनाया और न ही सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू रखा। शिक्षक भर्ती घोटाला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसने हजारों योग्य उम्मीदवारों के सपनों को चकनाचूर कर दिया।
उत्तर बंगाल में अवैध घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया
रजु बिस्ता ने बेरोजगारी के साथ-साथ उत्तर बंगाल में अवैध घुसपैठ के मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार बांग्लादेश से हो रही अवैध घुसपैठ को रोकने में पूरी तरह विफल रही है, बल्कि तुष्टीकरण की राजनीति के चलते इसे प्रश्रय दिया जा रहा है।
सांसद का कहना है कि अवैध घुसपैठियों की बढ़ती संख्या से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और भी कम होते जा रहे हैं। छोटे व्यवसाय, दिहाड़ी मजदूरी और ठेका-आधारित कामों में स्थानीय लोगों की जगह बाहरी लोग ले रहे हैं, जिससे मूल निवासियों में असंतोष और आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर सख्त कदम उठाने और राज्य सरकार को जवाबदेह बनाने की मांग भी की।
TMC सरकार पर भ्रष्टाचार और नियुक्तियों में भेदभाव के आरोप

भाजपा नेताओं ने इस अभियान के दौरान यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में सरकारी नौकरियां योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस की पार्टी सदस्यता और ‘कटमनी’ संस्कृति के आधार पर दी जा रही हैं। जो युवा सत्ताधारी दल के करीबी नहीं हैं, उन्हें जानबूझकर नौकरियों से वंचित रखा जाता है।
पार्टी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल उन राज्यों में शामिल हो गया है जहां निवेशक आने से कतराते हैं क्योंकि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है और उद्योगों को सुरक्षित वातावरण मिलना मुश्किल हो गया है। इससे न केवल नए रोजगार पैदा नहीं हो रहे, बल्कि मौजूदा उद्योग भी राज्य से पलायन कर रहे हैं।
युवाओं का पलायन
‘हमें रोजगार चाहिए बंगाल’ अभियान में भाजपा ने एक भावनात्मक मुद्दा भी उठाया है — बंगाल के युवाओं का पलायन। एक समय जो बंगाल देश का सांस्कृतिक और बौद्धिक केंद्र माना जाता था, आज वहां के पढ़े-लिखे युवा रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं। चाय बागान क्षेत्र, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और दार्जिलिंग जैसे इलाकों में युवाओं का पलायन सबसे अधिक है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक राज्य सरकार बेरोजगार युवाओं को उनके ही प्रदेश में रोजगार देने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती। उन्होंने मांग की कि राज्य में जल्द से जल्द सरकारी नौकरियों की लंबित भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए उद्योग-अनुकूल नीतियां बनाई जाएं।
TMC का पलटवार – भाजपा पर राजनीतिक मंशा का आरोप
दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के इस अभियान को एक राजनीतिक नौटंकी करार दिया है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने राज्य को उसके उचित हिस्से के फंड नहीं दिए, जिससे राज्य का विकास बाधित हुआ है। उनका तर्क है कि ममता सरकार ने ‘लक्ष्मीर भंडार’, ‘कन्याश्री’ और ‘स्वास्थ्य साथी’ जैसी योजनाओं के जरिए जनता को सीधे लाभ पहुंचाया है।
हालांकि, भाजपा ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं की रेवड़ी बांटना रोजगार का विकल्प नहीं हो सकता। स्थायी रोजगार ही किसी राज्य के आर्थिक विकास की असली कसौटी है और इस कसौटी पर ममता सरकार पूरी तरह खरी नहीं उतरी।
West Bengal Election: विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक दांव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह अभियान आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा है। बेरोजगारी, पलायन और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों को एक साथ उठाकर पार्टी न केवल शहरी मतदाताओं को, बल्कि ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों के युवाओं को भी अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश कर रही है।
‘हमें रोजगार चाहिए बंगाल’ अभियान ने बंगाल की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। अब देखना यह है कि ममता सरकार इन सवालों का जवाब कैसे देती है और क्या बेरोजगारी का यह मुद्दा 2026 के चुनावी समर में गेमचेंजर बनकर उभरेगा।



