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Raghav Chadha News: आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच बढ़ी दूरियां। अशोक मित्तल बने नए डिप्टी लीडर, जानें पूरा विवाद

Raghav Chadha News: आम आदमी पार्टी ने अपने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है और उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। इतना ही नहीं, AAP ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी कह दिया है कि राघव चड्ढा को पार्टी के कोटे में से बोलने का समय आवंटित न किया जाए।

पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, जो कभी आम आदमी पार्टी के सबसे चमकदार और मुखर चेहरों में गिने जाते थे, अब पार्टी में हाशिये पर आते नजर आ रहे हैं। यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई, बल्कि पिछले कई महीनों से पार्टी और राघव चड्ढा के बीच दूरियां बढ़ती जा रही थीं।

तीन बड़ी वजहें जो बनीं इस एक्शन की जड़

सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक राघव चड्ढा के खिलाफ इस कार्रवाई के पीछे मुख्य रूप से तीन वजहें हैं।

पहली वजह यह है कि जब दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पार्टी के कई बड़े नेताओं को जमानत मिली, उस वक्त राघव चड्ढा पूरी तरह चुप रहे। पार्टी के बाकी नेता जश्न मना रहे थे, समर्थकों से मिल रहे थे, मीडिया के सामने बयान दे रहे थे, लेकिन राघव उस पूरे माहौल से गायब रहे। पार्टी को इससे गहरी नाराजगी हुई।

दूसरी वजह यह है कि राघव चड्ढा राज्यसभा में पार्टी के कोटे से मिले समय में बोलते रहे, जिसकी वजह से पार्टी के दूसरे सांसदों को या तो बोलने का मौका नहीं मिलता था या बहुत कम मिलता था। यह बात पार्टी के भीतर काफी समय से खटक रही थी।

तीसरी और सबसे बड़ी वजह यह है कि राघव चड्ढा बीते कुछ समय से पार्टी की गतिविधियों में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं ले रहे थे। पार्टी बैठकें हों, अभियान हों या कोई बड़ा राजनीतिक मौका राघव वहां नजर नहीं आ रहे थे। इस उदासीनता को पार्टी ने बहुत गंभीरता से लिया।

संजय सिंह का वह बयान जो सबको याद है

कुछ समय पहले एक कार्यक्रम में जब राज्यसभा सांसद संजय सिंह से पूछा गया कि क्या राघव चड्ढा किसी दूसरी पार्टी में जा सकते हैं, तो उनका जवाब बेहद तीखा था। संजय सिंह ने कहा था- “यह आप उनसे पूछिए, लेकिन अगर वह ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ होने वाला सबसे पहला आदमी मैं रहूंगा।

हालांकि संजय सिंह ने उस वक्त राघव के पार्टी छोड़ने की अटकलों को सीधे खारिज कर दिया था, लेकिन उनके इस जवाब ने राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा जगाई थी। यह बयान एक तरह से उस नाराजगी का संकेत था जो पार्टी के भीतर राघव को लेकर पनप रही थी।

कौन हैं राघव चड्ढा, एक नजर उनके सफर पर

राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के उन चेहरों में से हैं जो पार्टी के शुरुआती दिनों से जुड़े रहे हैं। वह पहले दिल्ली के रजिंदर नगर से विधायक थे। 2022 में जब पंजाब में आम आदमी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की और सरकार बनाई, तब पार्टी ने उन्हें पंजाब कोटे से राज्यसभा भेजा।

राज्यसभा में वह अपनी वाकपटुता और तर्कशैली के लिए जाने जाते हैं। कई मौकों पर उन्होंने ऐसे भाषण दिए जो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। लेकिन पिछले कुछ समय से उनकी यही सक्रियता पार्टी के लिए उलझन बन गई, क्योंकि पार्टी के भीतर उनकी भूमिका और उनका रुख सवालों के घेरे में आ गया।

परिणीति चोपड़ा से शादी के बाद बदली राघव की ‘इमेज’

राघव चड्ढा की बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा से शादी के बाद से उनकी सार्वजनिक छवि काफी बदली। वह अक्सर फिल्मी और ग्लैमरस दुनिया से जुड़ी खबरों में दिखने लगे। पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को लगा कि राघव की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। राजनीतिक सक्रियता की जगह अब वह एक अलग ही जीवनशैली की तरफ बढ़ रहे हैं। यह बात भी पार्टी के भीतर कहीं न कहीं चुभती रही।

अब आगे क्या होगा, यही सबसे बड़ा सवाल है

AAP के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में एक ही सवाल गूंज रहा है, राघव चड्ढा अब क्या करेंगे? क्या वह पार्टी में रहकर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेंगे, या फिर कोई और रास्ता चुनेंगे?

फिलहाल राघव चड्ढा की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। उन्होंने इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से चुप्पी साध रखी है। लेकिन राजनीति में चुप्पी भी एक बयान होती है।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि राघव चड्ढा का राज्यसभा कार्यकाल अभी बाकी है। ऐसे में पार्टी उन्हें बाहर नहीं कर सकती और राघव भी शायद इतनी जल्दी कोई बड़ा कदम नहीं उठाएंगे। लेकिन यह तो तय है कि पार्टी में उनकी भूमिका पहले जैसी नहीं रहेगी।

AAP के लिए भी यह वक्त आसान नहीं

इस पूरे प्रकरण को सिर्फ राघव चड्ढा के नजरिए से देखना ठीक नहीं होगा। आम आदमी पार्टी खुद भी इन दिनों कई चुनौतियों से जूझ रही है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार मिली, केजरीवाल की साख को चोट पहुंची है और पार्टी के कई पुराने साथी एक-एक कर किनारा करते जा रहे हैं।

ऐसे में अगर राघव चड्ढा जैसा चर्चित चेहरा पार्टी से दूर होता है, तो यह AAP के लिए और एक झटका होगा। पार्टी शायद इसीलिए सावधानी से कदम उठा रही है न तो राघव को पूरी तरह बाहर किया, न ही उनकी नाफरमानी को नजरअंदाज किया।

क्या टूट सकता है यह रिश्ता?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच का रिश्ता अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन दरार जरूर पड़ गई है। अगर आने वाले दिनों में राघव पार्टी की लाइन पर चलते हैं, सक्रिय होते हैं और अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, तो शायद यह रिश्ता बच जाए।

लेकिन अगर यह दूरी बनी रही, तो यह साफ है कि दोनों के रास्ते अलग हो सकते हैं। राघव चड्ढा युवा हैं, पढ़े-लिखे हैं, वाकपटु हैं, उनके लिए विकल्प शायद कम नहीं हैं। लेकिन AAP जैसी पार्टी के बिना उनकी राजनीतिक पहचान क्या होगी, यह भी सोचने वाली बात है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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