Jharkhand News 2026: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मार्च 2025 के आखिरी पखवाड़े में ईडी ने जो काम किया, वह राज्य में पहले कभी नहीं हुआ। सिर्फ 15 दिनों के भीतर यानी 15 मार्च से 30 मार्च के बीच एजेंसी ने सात अलग-अलग चार्जशीट दाखिल कीं, जिनमें कुल 40 व्यक्तियों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। साथ ही 97.92 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई और अदालत से 12.98 करोड़ रुपये की और संपत्ति अटैच करने की इजाजत मांगी गई।
सरकारी विभागों में घोटाला, बैंक फ्रॉड, अवैध खनन, रिश्वतखोरी इन सब मामलों पर एक साथ शिकंजा कसते हुए ईडी ने साफ संदेश दिया है कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई रुकने वाली नहीं है।
ग्रामीण कार्य विभाग: 14 इंजीनियर कठघरे में
17 मार्च को ईडी ने ग्रामीण कार्य विभाग के 14 इंजीनियरों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। आरोप है कि सरकारी ठेकों के आवंटन में एक पूरी व्यवस्था बनाई गई थी, जिसमें कमीशन नीचे से ऊपर तक पहुंचता था। यानी छोटे स्तर से लेकर बड़े अधिकारियों तक सभी इस भ्रष्ट तंत्र का हिस्सा थे। टेंडर मिलने के बदले पैसा, और वह पैसा ऊपर तक जाता था, यही इस पूरे खेल का सार है। ईडी का दावा है कि मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (PMLA) के तहत इन सभी के खिलाफ पर्याप्त सबूत जुटाए जा चुके हैं।
SBI शाखा प्रबंधक पर गिरी गाज, 97.92 लाख की संपत्ति जब्त
उसी दिन यानी 17 मार्च को ईडी ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एक शाखा प्रबंधक मनोज कुमार और उनके परिवार से जुड़ी दो अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त कीं। इन संपत्तियों की कुल कीमत 97.92 लाख रुपये बताई गई है।
बाद में 26 मार्च को ईडी ने SBI में 5.40 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले में मनोज कुमार और उनकी पत्नी नीतू कुमारी उर्फ नीतू देवी के खिलाफ पीएमएलए के तहत चार्जशीट भी दाखिल की। बैंक के किसी अधिकारी का इस तरह बड़े पैमाने पर घोटाले में नाम आना और फिर उसकी संपत्ति जब्त होना, यह मामला राज्य में खासा चर्चित रहा।
KVIC घोटाला: खादी संस्था में करोड़ों की हेराफेरी
24 मार्च को ईडी की रांची जोनल ऑफिस ने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) रांची से जुड़े 3.89 करोड़ रुपये के घोटाले में चार्जशीट दाखिल की। इसमें तत्कालीन कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार, तत्कालीन सीनियर कार्यपालक अधिकारी (प्रशासन एवं HR) अमन कुमार समेत शाहिल, प्रिया, बिनोद कुमार बैठा और बंकु निषाद को आरोपी बनाया गया।
KVIC जैसी संस्था, जो गरीब और ग्रामीण उद्यमियों की मदद के लिए बनी है, उसी में करोड़ों का घोटाला होना यह बताता है कि भ्रष्टाचार का दायरा कितना बड़ा है।
CCL अधिकारी और ट्रांसपोर्टर पर रिश्वतखोरी का आरोप
26 मार्च को ईडी ने रिश्वतखोरी के एक मामले में CCL (सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड) के सहायक सुरक्षा उप-निरीक्षक संजीव कुमार सिंह, उनकी पत्नी पूनम देवी, उनके छोटे भाई गोपाल कुमार और एक निजी ट्रांसपोर्टर राहुल कुमार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
आरोप है कि अवैध तरीके से कोयला खनन और उसके परिवहन के लिए रिश्वत ली जाती थी। कोयले की चोरी और उसमें अधिकारियों की मिलीभगत यह झारखंड के लिए कोई नई बात नहीं, लेकिन इस बार ईडी ने सीधे PMLA के तहत शिकंजा कसा है।
पेयजल विभाग में 22.86 करोड़ की हेराफेरी
29 मार्च को एक और बड़ा मामला सामने आया। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में 22.86 करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में विभाग के कैशियर-सह-उच्च श्रेणी लिपिक संतोष कुमार, उनकी पत्नी ललिता सिन्हा और उनकी शेल कंपनी, मेसर्स राकड्रील कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।
एक कैशियर स्तर का कर्मचारी और इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, यह मामला बताता है कि सरकारी तंत्र में नीचे से ऊपर तक किस तरह पैसे की हेरफेर होती रही। शेल कंपनी बनाकर पैसे को सफेद करने की कोशिश भी उजागर हुई।
अवैध खनन: तुलस्यान परिवार और उनकी कंपनियां निशाने पर
29 मार्च को ही ईडी ने अवैध खनन और परिवहन के एक और बड़े मामले में कार्रवाई की। मेसर्स CTS इंडस्ट्रीज लिमिटेड, अशोक कुमार तुलस्यान, सिद्धार्थ तुलस्यान, चमन तुलस्यान, पुरुषोत्तम कुमार तुलस्यान और मेसर्स इको फ्रेंडली इंफ्रा टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। इस मामले में ईडी ने अदालत से 5.39 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने की अनुमति भी मांगी।
अवैध खनन झारखंड की एक पुरानी समस्या रही है। इस बार एक पूरे परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों पर एक साथ शिकंजा कसा गया, जो ED की रणनीति का हिस्सा नजर आता है।
मनरेगा घोटाला: जमीन जब्त करने की मांग
29 मार्च को ही मनरेगा घोटाले से जुड़े एक मामले में ईडी ने पूरक चार्जशीट दाखिल की और अदालत से बोड़ेया में 17 डिसमिल जमीन जब्त करने की इजाजत मांगी। इस जमीन की कीमत करीब 1.33 करोड़ रुपये बताई गई है।
मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, जो गरीबों और मजदूरों के लिए बनी है, उसमें भी घोटाला। यह सबसे चिंताजनक पहलू है।
क्या है PMLA और ट्रायल का अगला कदम?
ईडी जिन मामलों में चार्जशीट दाखिल करती है, वे PMLA यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत आते हैं। इस कानून के तहत आरोपियों को अपनी बेगुनाही खुद साबित करनी होती है। अब इन सातों मामलों में विशेष PMLA अदालत में ट्रायल चलेगा।
ED की इस कार्रवाई के मायने
झारखंड में ईडी की यह ताबड़तोड़ कार्रवाई राज्य के इतिहास में अपनी तरह की पहली है। 15 दिनों में सात चार्जशीट, 40 आरोपी, लगभग एक करोड़ की संपत्ति जब्त और 13 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति अटैच करने की मांग यह सब मिलकर एक बड़ी तस्वीर पेश करते हैं।
सरकारी विभागों से लेकर बैंक, कोयला खनन से लेकर खादी संस्था हर जगह भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। ईडी की इस कार्रवाई से राज्य के भ्रष्ट तंत्र में हलचल जरूर मची होगी। लेकिन असली परीक्षा अब अदालत में होगी, जहां ट्रायल के दौरान तय होगा कि दोषी कौन है और उसे सजा मिलती है या नहीं।
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