डेस्क: दक्षिण एशिया में युवा आक्रोश की लहर तेज हो रही है। नेपाल में हाल ही में छात्रों के बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों ने वहां की राजनीतिक व्यवस्था को हिला दिया था, उसी तर्ज पर अब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में Gen-Z की पीढ़ी ने विद्रोह का बिगुल फूंक दिया है। बढ़ती फीस, डिजिटल शिक्षा में सुधारों की आड़ में लगाए जा रहे अतिरिक्त बोझ और आर्थिक संकट के खिलाफ हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। ये आंदोलन न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं, बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की साझा सत्ता को गंभीर चुनौती दे रहे हैं। क्या ये युवा उभार पाकिस्तान की अस्थिर राजनीति को पूरी तरह ढहा देगा?
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की राजधानी मीरपुर और मुजफ्फराबाद जैसे शहरों में पिछले तीन दिनों से चला आ रहा यह आंदोलन तेजी से पूरे क्षेत्र में फैल चुका है। छात्र संगठनों के अनुसार, स्थानीय सरकार द्वारा हाल ही में घोषित शिक्षा सुधारों में फीस में 30% से अधिक की वृद्धि की गई है, जबकि डिजिटल शिक्षा के नाम पर ऑनलाइन कोर्सेस के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है। PoK में पहले से ही आर्थिक मंदी और बेरोजगारी की मार झेल रही जनता के लिए यह फैसला आग में घी डालने जैसा है। आंदोलन की शुरुआत मीरपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों से हुई, जहां एक साधारण विरोध मार्च ने जल्द ही बड़े पैमाने पर धरना और रोड ब्लॉक में बदल लिया।
युवा शक्ति का उदय – दक्षिण एशिया में Gen-Z की राजनीतिक जागृति
दक्षिण एशिया की राजनीति हमेशा से ही युवा ऊर्जा से प्रभावित रही है, लेकिन आज का Gen-Z कुछ अलग है। सोशल मीडिया की ताकत से लैस यह पीढ़ी न केवल जागरूक है, बल्कि कार्रवाई करने को तैयार भी। नेपाल में कोविड के बाद शिक्षा और रोजगार पर सवाल उठाने वाले छात्र आंदोलनों ने वहां की सरकार को घुटनों पर ला दिया था। अब PoK में वैसा ही दृश्य दिख रहा है। यहां के छात्रों का कहना है कि शिक्षा सुधारों का नाम लेकर सरकारें अपना खर्चा जनता पर थोप रही हैं। शहबाज शरीफ की सरकार, जो पहले से ही आर्थिक संकट और आईएमएफ ऋणों के जाल में फंसी है, अब इस युवा विद्रोह से जूझ रही है। आसिम मुनीर की सेना, जो पाकिस्तान की सत्ता की रीढ़ मानी जाती है, इस बार सैन्य दखल के बिना स्थिति संभालने की कोशिश कर रही है, लेकिन क्या यह रणनीति कामयाब होगी? इतिहास गवाह है कि दबाए गए गुस्से का विस्फोट हमेशा विनाशकारी होता है। Gen-Z अब सत्ता के गलियारों को चुनौती दे रहा है – यह केवल शिक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि समग्र सिस्टम चेंज की मांग है। यदि शहबाज-मुनीर जोड़ी ने तुरंत संवाद नहीं शुरू किया, तो यह आग पूरे पाकिस्तान में फैल सकती है।
नेपाल का सबक: क्या PoK दोहराएगा इतिहास?
नेपाल में अक्टूबर 2025 में Gen-Z छात्रों ने शिक्षा बजट कटौती के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध किया था, जिसके परिणामस्वरूप सरकार को इस्तीफा देना पड़ा। वहां के प्रदर्शनकारियों ने ‘युवा क्रांति’ का नारा दिया था, और सोशल मीडिया ने इसे वैश्विक स्तर पर फैलाया। PoK में भी यही पैटर्न दिख रहा है। स्थानीय एनजीओ ‘यंग कश्मीर वॉयस’ के अनुसार, प्रदर्शन में 80% से अधिक युवा 18-25 साल के हैं, जो Gen-Z की श्रेणी में आते हैं। वे पाकिस्तानी सेना के कब्जे और आर्थिक शोषण से तंग आ चुके हैं।
पाकिस्तानी सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। शहबाज शरीफ ने संसद में एक बयान जारी कर कहा, “शिक्षा सुधार PoK के भविष्य के लिए जरूरी हैं। हम छात्रों की चिंताओं को समझते हैं और जल्द वार्ता करेंगे।” लेकिन आलोचकों का मानना है कि यह सिर्फ देरी का बहाना है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर, जो वास्तविक सत्ता के धनी माने जाते हैं, ने चुप्पी साध रखी है। विशेषज्ञों का कहना है कि PoK में अशांति पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती है, खासकर जब इमरान खान समर्थक पीटीआई पार्टी पहले से ही असंतुष्ट है।
निष्कर्ष: सत्ता का संकट या सुधार का अवसर?
PoK में Gen-Z का यह गुस्सा महज एक स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सत्ता की कमजोरी का आईना है। शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की जोड़ी, जो आर्थिक संकट से जूझ रही है, अब युवा विद्रोह का सामना कर रही है। नेपाल का उदाहरण साफ संदेश देता है कि दबाई गई आवाजें अंततः विस्फोटक बन जाती हैं। सरकार को चाहिए कि वह फीस वृद्धि रद्द करे, डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करे और छात्रों से संवाद करे। अन्यथा, यह आंदोलन PoK से निकलकर इस्लामाबाद तक पहुंच सकता है, जो शहबाज-मुनीर राज की नींव हिला देगा।



