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ट्रंप की चेतावनी के बाद अमेरिका ने रूस के पास तैनात की न्यूक्लियर सबमरीन

3 अगस्त 2025
ट्रंप की चेतावनी के बाद अमेरिका ने रूस के पास तैनात की न्यूक्लियर सबमरीन

दुनिया एक बार फिर परमाणु तनाव की आहट सुन रही है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस की सीमाओं के करीब दो परमाणु-सक्षम पनडुब्बियों को भेजने का निर्देश दिया है। यह फैसला रूस के पूर्व राष्ट्रपति और व्लादिमीर पुतिन के करीबी दिमित्री मेदवेदेव के “डेड हैंड” संबंधी बयान के बाद लिया गया है।

अमेरिका का सख्त संदेश

ट्रंप ने दो टूक कहा कि उन्होंने परमाणु शक्ति से लैस पनडुब्बियों को “संबंधित क्षेत्रों” में रवाना कर दिया है ताकि अमेरिका हर परिस्थिति में जवाब देने के लिए तैयार रहे। हालांकि, अमेरिका ने इन पनडुब्बियों की सटीक लोकेशन का खुलासा नहीं किया है।

क्या है ‘डेड हैंड’?

‘डेड हैंड’ सोवियत युग की एक रणनीतिक न्यूक्लियर सिस्टम थी, जिसे इस तरह डिज़ाइन किया गया था कि अगर रूस के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पर हमला हो और वो निष्क्रिय हो जाएं, तब भी यह सिस्टम अपने आप परमाणु हमला कर सकता था। मेदवेदेव ने ट्रंप को चेताते हुए कहा कि ‘डेड हैंड’ भले अब सक्रिय नहीं है, लेकिन उसकी ताकत को कम नहीं आंका जाना चाहिए।

बयानबाजी से शुरू हुआ विवाद

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत ट्रंप के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने रूस को चेताया था कि यूक्रेन में जारी युद्ध खत्म करने के लिए उसके पास सिर्फ 10-12 दिन हैं। ट्रंप का यह बयान स्कॉटलैंड दौरे के दौरान आया था। जवाब में मेदवेदेव ने अमेरिकी चेतावनी को खारिज करते हुए कहा कि रूस कोई कमजोर देश नहीं है, जो अमेरिकी दबाव में आ जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को यह समझना चाहिए कि अब की बार उसका सामना किसी ईरान या इज़राइल से नहीं, बल्कि रूस से है – और यह टकराव अमेरिका को खुले युद्ध की ओर ले जा सकता है।

ट्रंप की प्रतिक्रिया

ट्रंप ने भी पलटवार करते हुए कहा कि मेदवेदेव जैसे नेता जिन्होंने अपनी सत्ता गंवा दी है, उन्हें इस तरह की भाषा नहीं बोलनी चाहिए। उन्होंने मेदवेदेव को एक “फेल्ड प्रेसीडेंट” कहा और सलाह दी कि वे खुद को फिर से राष्ट्रपति समझने की भूल न करें।

न्यूक्लियर पनडुब्बियां: क्या होती हैं इनकी ताकत?

परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां सामान्य डीज़ल पनडुब्बियों की तुलना में अधिक शक्तिशाली होती हैं। इनमें यूरेनियम आधारित न्यूक्लियर रिएक्टर लगे होते हैं जो इन्हें लंबे समय तक बिना ईंधन भरे संचालन की क्षमता देते हैं।

इन सबमरीन को सतह पर आने की ज़रूरत नहीं होती, जिससे ये महीनों तक गहरे समुद्र में दुश्मन के इलाके के पास खुफिया मिशनों को अंजाम दे सकती हैं। हालांकि इनकी लागत काफी अधिक होती है – एक न्यूक्लियर पनडुब्बी पर अरबों डॉलर खर्च होते हैं।

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कवरेज: Krishan Mohan shukla, News Media Kiran

Krishan Mohan shukla

News Media Kiran के लिए लिखते हैं।

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