डेस्क: पश्चिम अफ्रीकी देश Benin में रविवार, 7 दिसंबर को अचानक राजनीतिक भूचाल तब आया जब राजधानी Cotonou में सुबह-सुबह गोलियों की आवाज़ गूंजने लगी। कई इलाकों में लोग डर के माहौल में घरों के भीतर कैद हो गए। इसी बीच, कम से कम आठ सैनिक राज्य टीवी पर दिखाई दिए और उन्होंने खुद को “Military Committee for Refoundation” बताते हुए राष्ट्रपति Patrice Talon की सरकार को भंग करने का ऐलान कर दिया। उन्होंने दावा किया कि देश का संविधान निलंबित किया जा रहा है और सभी सीमाएँ बंद कर दी गई हैं।
यह घटनाक्रम और भी गंभीर इसलिए हो गया क्योंकि सैनिकों ने कहा कि वे देश को “नई शुरुआत” देना चाहते हैं और उत्तरी क्षेत्रों में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति सरकार की विफलता है। उन्होंने सीमा सुरक्षा से लेकर आतंकवाद के मुद्दे तक कई मामलों पर शासन को निशाने पर लिया। टीवी पर हथियारों से लैस सैनिकों की उपस्थिति ने पूरे देश में अस्थिरता की हवा फैला दी।
कुछ ही घंटों बाद, देश के गृह मंत्री Alassane Seidou ने फेसबुक पर एक वीडियो जारी करते हुए जनता को भरोसा दिलाया कि तख्तापलट की कोशिश नाकाम कर दी गई है। हालांकि उन्होंने राष्ट्रपति Talon की लोकेशन पर कोई जानकारी साझा नहीं की, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई। देशभर में अफवाहों और डर का माहौल फैल चुका था।
करीब 12 घंटे बाद, राष्ट्रपति Patrice Talon आखिरकार सामने आए और उन्होंने राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने साफ कहा कि यह “धोखा और गद्दारी” है और इसके जिम्मेदार “बख्शे नहीं जाएंगे।” Talon ने दावा किया कि वफादार सेनाओं ने सभी रणनीतिक ठिकानों पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया है। उनका संदेश साफ और सख्त था— “ये विश्वासघात बिना सज़ा नहीं रहेगा।”
Nigerian Air Force ने भी Benin का साथ दिया और फाइटर जेट्स भेजकर विद्रोहियों को TV नेटवर्क और सैन्य कैंप से हटाने में मदद की। इसके साथ ही, ECOWAS ने भी अपनी standby force तैनात की, जिसमें Ghana, Sierra Leone और Ivory Coast के जवान शामिल थे। इससे यह साफ हो गया कि पश्चिम अफ्रीका अब तख्तापलटों के खिलाफ क्षेत्रीय मोर्चा बना रहा है।
Benin में इससे पहले भी कई बार सत्ता पलट की कोशिशें हुई हैं। 1960 में स्वतंत्रता मिलने के बाद से देश में कई तख्तापलट हुए, हालांकि 1991 के बाद देश ने अपेक्षाकृत स्थिरता देखी। लेकिन हाल ही में सुरक्षा हालात और राजनीतिक खींचतान ने तनाव बढ़ा दिया है। इस साल जनवरी में Talon के दो करीबी सहयोगियों को भी 2024 के कथित तख्तापलट में शामिल होने के आरोप में बीस साल की सज़ा मिली थी।
यह ताजा घटना चुनावों से ठीक पहले हुई है। अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं और Talon का कार्यकाल लगभग समाप्त होने को है। इस राजनीतिक पृष्ठभूमि ने हालिया तख्तापलट को और भी संवेदनशील बना दिया है। अमेरिका ने हालात पर नज़र रखते हुए Cotonou स्थित दूतावास में अपनी सेवाएँ अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं।
यह स्पष्ट है कि Benin फिलहाल एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ राजनीतिक अस्थिरता, दूसरी तरफ क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ—देश के लिए आने वाले महीने आसान नहीं होने वाले।



