Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है और इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को अपना चुनावी घोषणापत्र यानी ‘संकल्प पत्र’ जारी कर दिया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में यह घोषणापत्र जारी किया। इस संकल्प पत्र में 31 बड़े वादे किए गए हैं जिनमें समान नागरिक संहिता यानी UCC को तीन महीने में लागू करना, बांग्लादेशी घुसपैठियों से अतिक्रमित जमीन वापस लेना, युवाओं के लिए 2 लाख सरकारी नौकरियां और बुनियादी ढांचे के लिए 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का संकल्प शामिल है। यह घोषणापत्र असम की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे रहा है।
तीन महीने में लागू होगा UCC, हिमंत का बड़ा ऐलान
इस पूरे घोषणापत्र में सबसे ज्यादा चर्चा समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड के वादे की हो रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने साफ कहा कि अगर भाजपा एक बार फिर सत्ता में आई तो सरकार बनने के तीन महीने के भीतर असम में UCC लागू कर दिया जाएगा।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि UCC को राज्य के आदिवासी और अन्य जातीय समुदायों के अधिकारों को ध्यान में रखकर लागू किया जाएगा। यानी जिन समुदायों के अपने पारंपरिक रीति-रिवाज और कानून हैं, उन पर UCC का बोझ नहीं डाला जाएगा। यह एक राजनीतिक रूप से संतुलित बयान है क्योंकि असम में आदिवासी समुदायों की आबादी बड़ी है और उनके वोट किसी भी पार्टी की जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
UCC का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का एक प्रमुख एजेंडा रहा है। उत्तराखंड ने पहले ही UCC लागू किया है और अब असम में इसका वादा करके भाजपा ने इस मुद्दे को एक बार फिर चुनावी केंद्र में ला दिया है।
मियांओं से जमीन वापसी, जमीन का एक-एक इंच छीनेंगे
संकल्प पत्र का दूसरा सबसे बड़ा और विवादास्पद वादा है बांग्लादेशी घुसपैठियों यानी मियांओं से अतिक्रमित जमीन वापस लेना। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मुद्दे पर बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि भाजपा जंगलों और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी और जमीन का एक-एक इंच वापस लिया जाएगा।
सरमा ने यह भी कहा कि पिछले पांच सालों में बांग्लादेशी घुसपैठियों की राजनीतिक ताकत को काफी कमजोर किया जा चुका है। उनका दावा था कि जो लोग पहले राज्य की राजधानी दिसपुर के आसपास ताकत का केंद्र बने हुए थे, वे अब वहां नजर नहीं आते। इस बार का वादा और भी सख्त है, भाजपा घुसपैठियों की राजनीतिक कमर पूरी तरह तोड़ देगी।
जब उनसे पूछा गया कि घुसपैठियों को हटाने में कितना समय लगेगा, तो सरमा ने साफ कहा कि जब तक बांग्लादेश का अस्तित्व है और वह भारत का पड़ोसी देश है, यह चुनौती बनी रहेगी। उन्होंने इसे किसी इमारत के निर्माण से अलग बताया और कहा कि इस लड़ाई की कोई निश्चित समय सीमा नहीं होती। यह एक लंबी और लगातार चलने वाली लड़ाई है।
‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ कड़े कानून का वादा
घोषणापत्र में एक और अहम वादा किया गया है। सीएम सरमा ने कहा कि भाजपा सरकार ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ सख्त कानून लाएगी। इसके साथ ही राज्य के जिला आयुक्तों को ‘अवैध प्रवासी निष्कासन अधिनियम, 1950’ लागू करने का सीधा अधिकार दिया जाएगा। इस अधिकार के तहत जिला आयुक्त 24 घंटे के भीतर किसी विदेशी को निष्कासित करने का आदेश दे सकेंगे।
यह प्रावधान प्रशासनिक स्तर पर घुसपैठ रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहे हैं कि इतने बड़े अधिकार का दुरुपयोग न हो, इसके लिए क्या सुरक्षा उपाय होंगे।
युवाओं के लिए 2 लाख सरकारी नौकरियां और 8वां वेतन आयोग
रोजगार के मुद्दे पर भाजपा ने युवाओं को सीधे लुभाने की कोशिश की है। संकल्प पत्र में वादा किया गया है कि अगले पांच सालों में राज्य में 2 लाख सरकारी नौकरियां दी जाएंगी। असम में युवा बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा रही है और यह वादा उन हजारों युवाओं को निशाने पर रखकर किया गया है जो सरकारी नौकरी की तलाश में हैं।
इसके अलावा केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए भी 8वां वेतन आयोग लागू करने का वादा किया गया है। यह वादा सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है और इनकी संख्या भी राज्य में कम नहीं है।
महिलाओं के लिए ‘ओरुनोदोई’ योजना में बढ़ोतरी
महिला वोटरों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने ‘ओरुनोदोई’ योजना के तहत दी जाने वाली मासिक आर्थिक मदद को बढ़ाने का वादा किया है। अभी तक इस योजना में जो राशि दी जाती थी उसे बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करने का संकल्प लिया गया है। यह योजना असम की उन महिलाओं के लिए है जो आर्थिक रूप से कमजोर तबके से आती हैं।
असम में महिला मतदाताओं की संख्या बड़ी है और पिछले चुनावों में भी महिलाओं ने भारी संख्या में मतदान किया है। इस तबके को सीधे आर्थिक लाभ देने का वादा भाजपा की एक समझदार राजनीतिक चाल मानी जा रही है।
5 लाख करोड़ का निवेश और KG से PG तक मुफ्त शिक्षा
बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर भाजपा ने एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। संकल्प पत्र में कहा गया है कि राज्य में अगले पांच सालों में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इसमें नए एक्सप्रेसवे बनाने और वंदे भारत ट्रेन परियोजनाओं को असम तक पहुंचाने का वादा भी शामिल है।
शिक्षा के मोर्चे पर भाजपा ने गरीब परिवारों के बच्चों के लिए KG यानी नर्सरी से PG यानी पोस्ट ग्रेजुएशन तक मुफ्त शिक्षा का वादा किया है। यह एक बहुत बड़ा वादा है क्योंकि आज भी असम में कई परिवार अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में आर्थिक परेशानियों का सामना करते हैं। अगर यह वादा पूरा हुआ तो यह शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव होगा। इसके अलावा बाढ़ की पुरानी समस्या से राज्य को पूरी तरह मुक्त करने के लिए ठोस कदम उठाने का भी भरोसा दिलाया गया है।
सीतारमण बोलीं, ‘कांग्रेस 60 साल में नहीं कर पाई जो BJP ने 10 साल में किया’
घोषणापत्र जारी करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह संकल्प पत्र असम में पिछले एक दशक में हुए बदलाव की नींव पर खड़ा है और यह बदलाव वह है जो कांग्रेस 60 साल की सत्ता में भी नहीं ला पाई।
सीतारमण ने दावा किया कि असम में भाजपा के शासन में जो स्थिरता और विकास आया, उसका नतीजा यह हुआ कि विदेश में काम कर रहे असमिया युवा वापस लौटने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग मजबूरी में बाहर जाते थे लेकिन अब वे अवसरों की वजह से वापस आ रहे हैं। AFSPA यानी सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीतियों की वजह से असम 32 साल तक इस कानून के साये में रहा जबकि भाजपा ने अधिकांश इलाकों से इसे हटवाया।
9 अप्रैल को मतदान, 4 मई को नतीजे
असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है और 4 मई को मतगणना होगी। भाजपा के इस संकल्प पत्र के बाद अब सभी की नजरें यह देखने पर हैं कि विपक्षी दल इन वादों का जवाब कैसे देते हैं और असम की जनता इन्हें किस तरह लेती है। चुनाव का नतीजा बताएगा कि असम की जनता ने इन 31 संकल्पों पर कितना भरोसा किया।
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