West Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, राज्य में प्रशासनिक और सुरक्षा तैयारियां भी तेज होती जा रही हैं। इसी कड़ी में कोलकाता पुलिस ने मंगलवार को एक अहम अधिसूचना जारी की जिसमें चार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति कोलकाता पुलिस आयुक्त की मंजूरी से हुई है और इसकी औपचारिक सूचना भवानी भवन से जारी की गई है। इन अधिकारियों को कोलकाता उत्तर, कोलकाता दक्षिण और दक्षिण 24 परगना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
क्यों जरूरी होते हैं नोडल अधिकारी?
चुनाव के दौरान नोडल अधिकारियों की भूमिका बेहद अहम होती है। ये अधिकारी चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इनका काम सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं होता, बल्कि ये पूरी चुनावी प्रक्रिया में एक समन्वयक की भूमिका निभाते हैं।
चुनाव के दौरान सबसे बड़ी चुनौती होती है भीड़ को नियंत्रित करना, प्रत्याशियों और मतदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसी भी तरह की अफवाह या उकसावे की स्थिति से तुरंत निपटना और यह देखना कि चुनाव आयोग के नियमों का पालन हर स्तर पर हो। नोडल अधिकारी इन सभी जिम्मेदारियों का केंद्र होते हैं। इनके बिना चुनाव प्रबंधन अधूरा माना जाता है।
पश्चिम बंगाल में पहले भी चुनावों के दौरान हिंसा और गड़बड़ी की घटनाएं सामने आई हैं। इसीलिए इस बार प्रशासन पहले से ही हर इंतजाम को कसकर तैयार करना चाहता है ताकि कोई भी अनचाही घटना न हो और चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
किन अधिकारियों को मिली कौन सी जिम्मेदारी?
कोलकाता पुलिस की ओर से जारी अधिसूचना में चार अधिकारियों के नाम और उनकी जिम्मेदारियां साफ-साफ बताई गई हैं। संयुक्त आयुक्त नीलांजन विश्वास को कोलकाता उत्तर क्षेत्र का नोडल अधिकारी बनाया गया है। कोलकाता उत्तर एक घनी आबादी वाला इलाका है जहां चुनाव के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती होती है। नीलांजन विश्वास एक अनुभवी अधिकारी हैं और उन्हें इस क्षेत्र की बारीकियां अच्छी तरह मालूम हैं।
कोलकाता दक्षिण की जिम्मेदारी संयुक्त आयुक्त अजय प्रसाद को दी गई है। कोलकाता दक्षिण शहर का वह हिस्सा है जहां कई महत्वपूर्ण विधानसभा सीटें आती हैं। यहां व्यापारिक इलाके, आवासीय क्षेत्र और भीड़-भाड़ वाली जगहें एक साथ हैं। इसीलिए यहां के नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी बहुत विस्तृत है।
दक्षिण 24 परगना जिले के लिए संयुक्त आयुक्त सुभंकर भट्टाचार्य को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। दक्षिण 24 परगना बंगाल का एक बड़ा और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील जिला है। सुंदरबन के आसपास का यह इलाका चुनाव के वक्त हमेशा से खास निगरानी में रहता है।
चौथे अधिकारी उपायुक्त विदित राज भुंदेश हैं जिन्हें कोलकाता उत्तर की नोडल जिम्मेदारी के साथ-साथ कोलकाता दक्षिण और दक्षिण 24 परगना का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। यानी वे तीन क्षेत्रों में एक साथ काम करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि चुनाव नियमों का हर जगह पूरी तरह पालन हो।
पहले भी हो चुकी है आठ अधिकारियों की नियुक्ति
यह पहली बार नहीं है जब चुनाव को लेकर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। कुछ दिन पहले ही महानिदेशक के आदेश पर भवानी भवन ने आठ नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की थी। इनमें सात अधिकारी डीआईजी यानी पुलिस उप महानिरीक्षक के रैंक के थे और एक अधिकारी आईजी यानी पुलिस महानिरीक्षक के रैंक का था।
उन आठ अधिकारियों को चुनाव प्रचार के दौरान कई तरह की जिम्मेदारियां दी गई थीं। इनमें वीआईपी नेताओं की सुरक्षा का प्रबंधन करना, सोशल मीडिया पर चुनाव से जुड़ी किसी भी भड़काऊ या गलत सामग्री की निगरानी करना और पुलिस बल को चुनाव के दौरान की जरूरतों के लिए प्रशिक्षण देना शामिल था।
अब इन चार नए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के साथ कुल 12 वरिष्ठ अधिकारी चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यह अपने आप में बताता है कि इस बार प्रशासन किस स्तर की गंभीरता से चुनाव को लेकर तैयार है।
सोशल मीडिया निगरानी पर खास जोर
इस चुनाव में सोशल मीडिया निगरानी एक बहुत अहम पहलू बन गया है। पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें, भड़काऊ वीडियो और गलत जानकारियां बहुत तेजी से फैलती हैं। इनसे जमीनी स्तर पर तनाव बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।
इसीलिए नोडल अधिकारियों की टीम में सोशल मीडिया की निगरानी को खास तवज्जो दी गई है। एक अलग टीम 24 घंटे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नजर रखेगी। अगर कोई आपत्तिजनक सामग्री मिलती है तो उसे तुरंत संबंधित प्लेटफॉर्म से हटवाने और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार इन अधिकारियों के पास होगा।
कोलकाता में चुनाव का माहौल और सुरक्षा की जरूरत
कोलकाता और उसके आसपास के जिले पश्चिम बंगाल की राजनीति का केंद्र हैं। यहां की विधानसभा सीटें अक्सर राज्य की सत्ता तय करने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। इसीलिए यहां हर पार्टी अपनी पूरी ताकत लगाती है और चुनावी प्रतिस्पर्धा बेहद तीखी होती है।
ऐसे माहौल में सुरक्षा बलों और प्रशासन की तैयारी का मजबूत होना बहुत जरूरी है। नोडल अधिकारियों की यह नियुक्ति इसी दिशा में एक ठोस कदम है। इससे यह उम्मीद बंधती है कि इस बार चुनाव में किसी भी तरह की अनियमितता या हिंसा को रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम मौजूद हैं।
पुलिस बल को प्रशिक्षण भी जारी
नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के साथ-साथ पुलिस बल को विशेष प्रशिक्षण देने का काम भी जारी है। इस प्रशिक्षण में पुलिसकर्मियों को यह बताया जा रहा है कि चुनाव के दौरान किसी भी विवादास्पद स्थिति में कैसे व्यवहार करना है, भीड़ को किस तरह नियंत्रित किया जाए और मतदाताओं के साथ किस तरह का व्यवहार उचित है।
यह प्रशिक्षण इसलिए भी जरूरी है क्योंकि चुनाव के दौरान पुलिसकर्मियों पर बहुत ज्यादा दबाव होता है। कई बार उन्हें ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जहां गलत फैसला बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है। इसीलिए प्रशिक्षण के जरिए उन्हें पहले से तैयार किया जा रहा है।
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