India’s 1st Dengue Vaccine: देश में हर साल मानसून के साथ डेंगू का कहर शुरू हो जाता है और लाखों लोग इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। अब तक इस बीमारी का कोई पक्का इलाज नहीं था, सिर्फ लक्षणों के आधार पर दवाएं दी जाती थीं। लेकिन अब इस तस्वीर के बदलने की उम्मीद जग गई है। भारत की पहली स्वदेशी डेंगू वैक्सीन ‘डेंगीआल’ का तीसरे और आखिरी चरण का क्लिनिकल ट्रायल अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो दिसंबर 2026 तक यह वैक्सीन देश के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध हो सकती है।
क्या है ‘डेंगीआल’ और किसने बनाई है यह वैक्सीन?
‘डेंगीआल’ को देश की जानी-मानी दवा कंपनी पैनासिया बायोटेक ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर के सहयोग से तैयार किया है। यह पूरी तरह भारत में विकसित वैक्सीन है, इसीलिए इसे देश की पहली स्वदेशी डेंगू वैक्सीन का दर्जा मिला है।
इस वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि यह टेट्रावैलेंट है, यानी यह डेंगू वायरस के चारों प्रकारों के खिलाफ एक साथ काम करती है। डेंगू वायरस के चार सीरोटाइप होते हैं जिन्हें डीईएनवी-1, डीईएनवी-2, डीईएनवी-3 और डीईएनवी-4 के नाम से जाना जाता है। अब तक यही सबसे बड़ी चुनौती रही थी कि एक ही वैक्सीन से चारों सीरोटाइप से सुरक्षा कैसे मिले। ‘डेंगीआल’ इस चुनौती को पार कर चुकी है।
इसके अलावा यह एक सिंगल डोज वैक्सीन है, मतलब एक ही बार लगवाने से काम हो जाएगा। यह इसे बाकी वैक्सीनों से अलग और व्यावहारिक बनाता है, खासकर भारत जैसे देश में जहां बड़े पैमाने पर टीकाकरण करना होता है।
कहां-कहां हुआ ट्रायल और कितने लोग शामिल हुए?

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी यानी केजीएमयू, लखनऊ समेत देश के 19 प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में यह ट्रायल किया गया है। तीसरे चरण का यह परीक्षण अगस्त 2024 में शुरू हुआ था। इसमें पूरे देश से 10 हजार से ज्यादा स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया।
ट्रायल में भाग लेने वाले लोगों को दो हिस्सों में बांटा गया था। एक समूह को असली वैक्सीन दी गई जबकि दूसरे समूह को प्लेसीबो यानी एक डमी डोज दी गई। यह तरीका वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद जरूरी होता है क्योंकि इससे यह पता चलता है कि वैक्सीन सच में कितनी असरदार है। 2025 के अंत तक सभी प्रतिभागियों का पंजीकरण पूरा कर लिया गया।
अकेले केजीएमयू में 300 से ज्यादा वयस्कों को इस ट्रायल में शामिल किया गया। केजीएमयू के प्रवक्ता प्रोफेसर केके सिंह ने बताया कि परिणाम उत्साह बढ़ाने वाले हैं और संस्थान की तरफ से रिपोर्ट आईसीएमआर को भेज दी गई है।
अक्टूबर तक आएंगे फाइनल नतीजे, फिर मिलेगी मंजूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक तीसरे चरण के ट्रायल का पूरा डेटा अक्टूबर 2026 तक आने की पूरी संभावना है। एक बार यह डेटा सामने आ जाए और सब कुछ सही रहे तो इसे ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी डीसीजीआई के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। डीसीजीआई की हरी झंडी मिलने के बाद यह वैक्सीन देशभर के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध कराई जा सकेगी।
इस पूरी प्रक्रिया को देखते हुए विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिसंबर 2026 तक ‘डेंगीआल’ आम लोगों तक पहुंच सकती है। यह भारत के स्वास्थ्य इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर होगा।
डेंगू का खतरा कितना बड़ा है भारत में?
केजीएमयू में संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख और इस ट्रायल की निगरानी करने वाले प्रोफेसर डी. हिमांशु ने बताया कि भारत में हर साल मानसून के मौसम में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ते हैं। साल 2024 में ही देश में सवा दो लाख से ज्यादा डेंगू के मामले सरकारी आंकड़ों में दर्ज किए गए, हालांकि असली संख्या इससे कहीं ज्यादा मानी जाती है क्योंकि बहुत से मामले रिपोर्ट ही नहीं होते।
डेंगू एक ऐसी बीमारी है जिसका अभी तक कोई पक्का इलाज नहीं है। जब कोई इससे बीमार पड़ता है तो डॉक्टर सिर्फ बुखार, दर्द और कमजोरी जैसे लक्षणों का इलाज कर सकते हैं। गंभीर मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है और कुछ मामलों में मौत भी हो जाती है। ऐसे में एक असरदार वैक्सीन का होना देश के लिए कितना जरूरी है, यह बात खुद इन आंकड़ों से साफ हो जाती है।
पहले से मौजूद वैक्सीनों से कितनी अलग है ‘डेंगीआल’?
दुनिया में डेंगू के खिलाफ पहले से कुछ वैक्सीनें मौजूद हैं लेकिन उनकी अपनी सीमाएं हैं। कुछ वैक्सीनें सिर्फ उन लोगों के लिए सुरक्षित मानी जाती हैं जो पहले डेंगू से संक्रमित हो चुके हों। नए मरीजों में इन वैक्सीनों से उलटा खतरा बढ़ सकता है।
‘डेंगीआल’ इस मामले में एक अलग और ज्यादा सुरक्षित विकल्प बनकर उभरी है। यह चारों सीरोटाइप को एक साथ कवर करती है और सिर्फ एक डोज में काम करती है। भारत की जलवायु और यहां पाए जाने वाले डेंगू वायरस के प्रकारों को ध्यान में रखकर बनाई गई यह वैक्सीन हमारी जरूरतों के हिसाब से कहीं ज्यादा उपयुक्त है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
‘डेंगीआल’ की यह सफलता सिर्फ एक वैक्सीन की कहानी नहीं है। यह इस बात का सबूत है कि भारत अब अपनी स्वास्थ्य जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। कोरोना महामारी के दौरान देश ने कोवैक्सीन जैसी स्वदेशी वैक्सीन बनाकर दुनिया को चौंका दिया था। अब डेंगू के मोर्चे पर भी भारत खुद अपना हल निकाल रहा है।
पैनासिया बायोटेक और आईसीएमआर की यह साझेदारी दिखाती है कि जब सरकारी संस्थान और निजी कंपनियां मिलकर काम करें तो नतीजे कितने बेहतर हो सकते हैं। इस वैक्सीन का सफल होना न सिर्फ भारत के लिए बल्कि दुनिया के उन तमाम देशों के लिए भी अच्छी खबर होगी जहां डेंगू एक बड़ी समस्या है।
आम लोगों के लिए क्या मायने रखती है यह खबर?
अगर ‘डेंगीआल’ को डीसीजीआई की मंजूरी मिल जाती है और यह बाजार में आ जाती है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को होगा जो हर साल मानसून में डेंगू के डर से परेशान रहते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी को इस वैक्सीन से सुरक्षा मिल सकती है। एक ही डोज की जरूरत होने से यह वैक्सीन लगवाना भी आसान होगा और खर्च भी कम आएगा।
सरकारी टीकाकरण अभियान में इस वैक्सीन को शामिल करने से देश में डेंगू के मामलों में बड़ी गिरावट आ सकती है। अस्पतालों पर बोझ कम होगा और डेंगू से होने वाली मौतों की संख्या भी काफी हद तक घटाई जा सकती है।
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