डेस्क –बांग्लादेश में शेख हसीना विरोधी नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद तनाव फैल गया। देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन, हिंसा और तोड़फोड़ हुई। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के घर में तोड़फोड़ की। चट्टोग्राम में असिस्टेंट इंडियन हाई कमिश्नर के घर पर पत्थर फेंके गए। प्रदर्शनकारियों ने भारत विरोधी नारे लगाए और भारतीय हाई कमीशन को बंद करने की मांग की।बांग्लादेश में एक बार फिर सड़कें गुस्से से गूंज रही हैं। जुलाई क्रांति के प्रमुख नेता शरीफ ओसमान हादी की मौत के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने आवामी लीग के दफ्तरों को निशाना बनाया, मीडिया हाउस में आग लगाई और भारतीय मिशनों पर पत्थरबाजी की। यह हिंसा 18 दिसंबर 2025 की रात से शुरू हुई और कई शहरों में फैल गई। आइए जानते हैं क्या हुआ और क्यों।
शरीफ ओसमान हादी की मौत: हिंसा की शुरुआत
शरीफ ओसमान हादी बांग्लादेश की 2024 की छात्र क्रांति के प्रमुख चेहरे थे। वे इनकिलाब मंच के नेता थे और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की आवामी लीग के कट्टर विरोधी। हादी भारत विरोधी बयानों के लिए भी जाने जाते थे। 12 दिसंबर को ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान उन पर गोली चलाई गई। गंभीर हालत में उन्हें सिंगापुर ले जाया गया, जहां 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई।मौत की खबर फैलते ही ढाका में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारी हादी के हत्यारों को भारत में छिपा बताकर गुस्सा जता रहे थे। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने हादी की मौत पर शोक जताया और 20 दिसंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया। लेकिन इससे प्रदर्शन नहीं रुके।
भारतीय मिशन पर हमला: भारत विरोधी नारे
हिंसा में भारत को निशाना बनाया गया। चटगांव (चिटागांव) में भारतीय सहायक हाई कमिश्नर डॉ. राजीव रंजन के आवास पर देर रात प्रदर्शनकारी पहुंचे। उन्होंने पत्थर फेंके और भारत विरोधी नारे लगाए। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और 12 लोगों को गिरफ्तार किया। कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन तनाव बढ़ गया। राजशाही में भी भारतीय सहायक हाई कमिश्नर के दफ्तर को घेरने की कोशिश हुई। प्रदर्शनकारी भारत पर आरोप लगा रहे थे कि हादी के हत्यारे वहां छिपे हैं। भारत ने बांग्लादेशी राजदूत को तलब किया और अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी।
आवामी लीग के दफ्तर जलाए और तोड़े
प्रदर्शनकारियों का मुख्य गुस्सा आवामी लीग पर था। राजशाही में पार्टी दफ्तर को बुलडोजर से गिरा दिया गया और आग लगा दी। बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के घर को भी नुकसान पहुंचाया गया। ढाका में धानमंडी 32 नंबर स्थित मुजीब का ऐतिहासिक घर फिर से तोड़फोड़ का शिकार हुआ। कई जगहों पर पूर्व आवामी लीग मंत्रियों के घरों में आग लगाई गई। प्रदर्शनकारी आवामी लीग को ‘फासीवादी’ बता रहे थे और पार्टी पर स्थायी बैन की मांग कर रहे थे। आवामी लीग पहले से ही बैन है और उसके नेता छिपे हुए हैं।
मीडिया ऑफिस में आग: पत्रकारों का बुरा हाल
हिंसा में मीडिया को भी नहीं बख्शा गया। ढाका में प्रमुख अखबार ‘प्रथम आलो’ और ‘डेली स्टार’ के दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी। पत्रकार अंदर फंस गए थे। एक रिपोर्टर ने सोशल मीडिया पर लिखा, “धुआं इतना है कि सांस नहीं ले पा रही।” फायर ब्रिगेड ने उन्हें बचाया। इन अखबारों को आवामी लीग समर्थक माना जाता है, इसलिए वे निशाने पर थे। कई जगहों पर सांस्कृतिक केंद्रों जैसे छायानट को भी नुकसान पहुंचा।
पूरे देश में फैली अशांति
हिंसा सिर्फ ढाका तक सीमित नहीं रही। राजशाही, चटगांव, खुलना समेत कई शहरों में सड़कें जाम की गईं, हाईवे ब्लॉक किए गए। कुछ जगहों पर पूर्व मंत्रियों के घर जलाए गए। पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की गई। अंतरिम सरकार ने शांति की अपील की, लेकिन प्रदर्शन जारी रहे। एक अलग घटना में हिंसा के बीच एक हिंदू व्यक्ति की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या की खबर आई, लेकिन यह मुख्य रूप से राजनीतिक हिंसा का हिस्सा लगती है।
निष्कर्ष: शांति की जरूरत
बांग्लादेश में शरीफ ओसमान हादी की मौत ने पुराने घाव खोल दिए हैं। 2024 की क्रांति के बाद देश अभी स्थिर नहीं हुआ है। आवामी लीग पर गुस्सा, भारत विरोधी भावनाएं और राजनीतिक अस्थिरता मिलकर बड़ा बवाल पैदा कर रही हैं। अंतरिम सरकार पर दबाव है कि वह हत्यारों को पकड़े और शांति बहाल करे। यह हिंसा देश के लिए नुकसानदेह है। आम लोग डरे हुए हैं, अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। भारत-बांग्लादेश संबंध भी तनाव में हैं। उम्मीद है कि बातचीत से मामला शांत होगा और बांग्लादेश जल्द स्थिरता की राह पर लौटेगा। हिंसा से किसी का भला नहीं होता, जरूरत है संयम और न्याय की।



