नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में अनुशासन और एकजुटता को बढ़ावा देने के लिए 10 सूत्रीय सख्त नीति लागू की है। इन नीतियों के तहत घरेलू क्रिकेट खेलना अनिवार्य कर दिया गया है। खिलाड़ियों के विदेशी दौरों पर परिवार और निजी स्टाफ की उपस्थिति पर पाबंदी लगा दी गई है। साथ ही, सीरीज के दौरान विज्ञापन शूट या फोटोशूट पर भी रोक लगा दी गई है।
घरेलू क्रिकेट अनिवार्य और परिवार के साथ रहने पर समयसीमा
बीसीसीआई ने खिलाड़ियों के लिए घरेलू क्रिकेट खेलना अनिवार्य कर दिया है, चाहे वे सीनियर हों या जूनियर। इसके अलावा, विदेशी दौरों पर खिलाड़ियों के परिवार केवल 15 दिनों के लिए ही साथ रह सकते हैं। यह अवधि कोच और कप्तान की सहमति के अनुसार तय की जाएगी।
विज्ञापन और निजी स्टाफ पर प्रतिबंध
सीरीज के दौरान खिलाड़ियों द्वारा किसी भी विज्ञापन शूट में हिस्सा लेने पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही, खिलाड़ियों को अपने निजी स्टाफ को विदेशी दौरों पर साथ ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
अनुशासन न मानने पर होगी कार्रवाई
बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें केंद्रीय अनुबंधों से फीस में कटौती और आईपीएल में भागीदारी पर रोक जैसे सख्त कदम शामिल हो सकते हैं।
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की हार के बाद कार्रवाई
यह फैसला ऑस्ट्रेलिया में शर्मनाक तरीके से बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी हारने के बाद लिया गया है। बीसीसीआई का मानना है कि इन नियमों से टीम में अनुशासन और प्रदर्शन में सुधार होगा।
इस नई नीति का उद्देश्य न केवल खिलाड़ियों में जिम्मेदारी का भाव जगाना है, बल्कि टीम को बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करना भी है।

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