चंबा/भरमौर: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में देर रात बादल फटने से हालात भयावह हो गए। बडग्राम क्षेत्र में पलानी नाला अचानक उफान पर आ गया और देखते ही देखते तेज बहाव ने नाले को मौत की धारा में बदल दिया। इस दौरान एक बारात और स्थानीय ग्रामीण नाले के दोनों ओर फंस गए। उफनते पानी और रात के अंधेरे के बीच लोगों के लिए नाला पार करना बेहद खतरनाक हो गया।
सुरेश कुमार ने दिखाई अदम्य हिम्मत
मुश्किल की इस घड़ी में मलकौता निवासी सुरेश कुमार ने साहस और इंसानियत की अनोखी मिसाल पेश की। जान की परवाह किए बिना सुरेश कुमार ने दूल्हे को अपनी पीठ पर उठाया और तेज बहाव वाले नाले को पार कराकर सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाया। उफनते पानी के बीच उनका यह कदम बेहद जोखिम भरा था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने सुरेश कुमार के साहस की जमकर सराहना की। उनका यह प्रयास दूल्हे और उसके साथ मौजूद लोगों के लिए राहत लेकर आया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पानी का बहाव इतना तेज था कि नाले के बीच एक-एक कदम बढ़ाना भी जान जोखिम में डालने जैसा था।
कैमरे में कैद हुईं भयावह तस्वीरें
रात के अंधेरे में हुई इस पूरी घटना की मार्मिक और भयावह झलकियां मंजु क्षत्रिय ने अपने कैमरे में कैद की हैं। सामने आए दृश्य पलानी नाले के विकराल रूप और उस समय पैदा हुए खतरे को साफ बयां कर रहे हैं। वीडियो और तस्वीरों में लोग तेज बहाव के बीच एक-दूसरे की मदद करते दिखाई दे रहे हैं।
फिर उजागर हुई पुल निर्माण की पुरानी मांग
इस घटना ने बडग्राम पंचायत के लोगों की वर्षों पुरानी समस्या को एक बार फिर सामने ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पलानी नाले पर स्थायी पुल न होने के कारण बरसात के मौसम में आवाजाही बेहद जोखिम भरी हो जाती है। बारिश और अचानक आने वाले तेज बहाव के दौरान लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है।
ग्रामीण लंबे समय से यहां स्थायी पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बादल फटने और भारी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। पुल बनने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को भी सुरक्षित आवाजाही की सुविधा मिल सकेगी।
फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा के दौरान बुनियादी ढांचे की अहमियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरेश कुमार की बहादुरी ने जहां एक संभावित बड़े हादसे को टालने में मदद की, वहीं पलानी नाले पर स्थायी पुल निर्माण की मांग को भी नई मजबूती मिली है।


