Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही भारतीय जनता पार्टी की चुनावी रणनीति में एक उल्लेखनीय बदलाव देखा जा रहा है। लंबे समय से ‘जय श्री राम’ के नारे के साथ बंगाल के चुनावी मैदान में उतरने वाली BJP अब ‘जय मां काली’ और ‘जय मां दुर्गा’ के नारों पर जोर देती दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया जनसभाओं और संदेशों में ‘जय मां काली’ के आह्वान ने इस बदलाव को और स्पष्ट कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे केवल शब्दों का परिवर्तन नहीं बल्कि बंगाल की सामाजिक-सांस्कृतिक संवेदनाओं से गहरा जुड़ाव स्थापित करने की सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं।
बाहरी छवि से स्थानीय पहचान की ओर
बंगाल की राजनीति में BJP को लंबे समय से बाहरी पार्टी के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है। ‘जय श्री राम’ का नारा उत्तर और पश्चिम भारत में भले ही व्यापक रूप से गूंजता रहा हो लेकिन बंगाल में इसे अक्सर राजनीतिक टकराव का प्रतीक माना गया। ऐसे में ‘जय मां काली’ का प्रयोग बंगाल की सांस्कृतिक विरासत से खुद को जोड़ने का एक सचेत प्रयास दिखता है। मां काली और मां दुर्गा बंगाल के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। दुर्गा पूजा और काली पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक और भावनात्मक एकजुटता के प्रतीक हैं। BJP की नई रणनीति इन्हीं प्रतीकों के माध्यम से बंगाली जनमानस से सीधा संवाद स्थापित करने की कोशिश करती दिखती है।
महिला वोटर बन सकती हैं निर्णायक
BJP नेता और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कोलकाता में महिला मोर्चा के कार्यक्रम में महिलाओं से अपने भीतर की दुर्गा शक्ति को जगाने की अपील की। यह संदेश केवल धार्मिक भावनाओं तक सीमित नहीं रखा गया बल्कि इसे महिला सशक्तिकरण के व्यापक राजनीतिक विमर्श से जोड़ा गया। बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की तरह बंगाल में भी महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। देवी काली और दुर्गा के प्रतीकों के माध्यम से BJP महिलाओं में शक्ति, आत्मसम्मान और सुरक्षा की भावना को संबोधित करने का प्रयास कर रही है।
महिला सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा
बंगाल में हाल ही में सामने आए कुछ दर्दनाक मामलों जैसे RG Kar मेडिकल कॉलेज रेप-मर्डर केस और दुर्गापुर मेडिकल कॉलेज गैंगरेप मामले ने महिला सुरक्षा को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। BJP नेताओं ने इन घटनाओं का जिक्र करते हुए शक्ति और न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस तरह BJP ने अपने धार्मिक प्रतीकों को सामाजिक न्याय और महिला सुरक्षा के व्यापक नजरिए से जोड़कर एक नया राजनीतिक विमर्श खड़ा करने की कोशिश की है।
वैचारिक बदलाव नहीं, रणनीतिक लचीलापन

विश्लेषकों का मानना है कि ‘जय श्री राम’ से ‘जय मां काली’ की ओर BJP का यह झुकाव वैचारिक बदलाव से ज्यादा रणनीतिक लचीलेपन को दर्शाता है। पार्टी यह स्वीकार करती दिख रही है कि राजनीतिक पहचान केवल विचारधारा से नहीं बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव से भी बनती है। बंगाल में जहां देवी पूजा सामाजिक जीवन के केंद्र में है वहां स्थानीय देवी-देवताओं का आह्वान पार्टी को जमीनी स्तर पर स्वीकार्यता दिला सकता है।
Bengal Election 2026: TMC के सामने कड़ी चुनौती
तृणमूल कांग्रेस पहले से ही बंगाली अस्मिता और स्थानीय संस्कृति को अपनी राजनीति के केंद्र में रखती है। ऐसे में BJP की असली कसौटी यही होगी कि क्या यह सांस्कृतिक अपील केवल प्रतीकात्मक स्तर पर रहती है या फिर ठोस नीतिगत कदमों और जमीनी मुद्दों के समाधान में भी बदलती है। यदि ‘जय मां काली’ का नारा महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और सांस्कृतिक सम्मान की व्यावहारिक पहल से जुड़ा तो यह BJP के लिए बंगाल में नए राजनीतिक दरवाजे खोल सकता है।
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