Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 जैसे-जैसे करीब आ रहा है वैसे-वैसे राजनीतिक बयानों की तीखी धार भी तेज होती जा रही है। इस बार मैदान में एआईएमआईएम के चीफ और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर बेहद तीखा हमला बोला है। ओवैसी ने एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में ममता बनर्जी पर कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि वो मुसलमानों के साथ ‘इस्तेमाल करो और फेंक दो’ वाला बर्ताव करती हैं।
ओवैसी ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि ममता बनर्जी मुसलमानों के वोट पाने के लिए उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव करती हैं। उनके वोट दुहती हैं और चुनाव खत्म होते ही उन्हें किनारे कर देती हैं। यह बयान बंगाल की राजनीति में एक नई आग लगाने वाला साबित हो सकता है।
ओवैसी का सबसे बड़ा आरोप: ममता ने बंगाल में बढ़ाई भाजपा की ताकत
ओवैसी ने अपने इंटरव्यू में एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा को मजबूत करने में खुद ममता बनर्जी का हाथ रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि 1977 में बंगाल में भाजपा के पास महज चार विधायक थे। आज जहां भाजपा बंगाल में एक बड़ी राजनीतिक ताकत बन चुकी है उसके लिए ओवैसी ने ममता की नीतियों और उनके शासन को जिम्मेदार ठहराया।
उनका कहना था कि ममता बनर्जी की गलत नीतियों और मुस्लिम समुदाय के साथ किए गए बर्ताव ने ही भाजपा को बंगाल में पैर जमाने का मौका दिया। उन्होंने कहा कि अगर वाकई मुसलमानों के हित में काम हुआ होता तो भाजपा को इतनी जमीन नहीं मिलती।
यह बयान बेहद अहम है क्योंकि ममता बनर्जी की सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान ही यह रही है कि वो भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत आवाज हैं। लेकिन ओवैसी ने उन्हें ही भाजपा की ताकत बढ़ाने का जिम्मेदार बताकर एक नया राजनीतिक मोड़ ला दिया है।
Bengal Election 2026: बी टीम के आरोप पर ओवैसी ने दिया तगड़ा जवाब
बंगाल में ओवैसी पर एक बड़ा आरोप लगाया जाता रहा है कि वो मुस्लिम वोटों को बांटकर दरअसल भाजपा की मदद करते हैं यानी वो भाजपा की ‘बी टीम’ का काम कर रहे हैं। इस आरोप पर ओवैसी ने पलटवार करते हुए कहा कि लोग उन्हें गालियां दे रहे हैं और सवाल कर रहे हैं कि वो चुनाव क्यों लड़ रहे हैं।
उन्होंने एक पुरानी और संवेदनशील घटना का हवाला देते हुए कहा कि जब आठ लाख मुसलमानों को पूर्वी पाकिस्तान भेज दिया गया था तब ये लोग कहां थे? तब किसी ने आवाज नहीं उठाई। और अब जब वो खुद मैदान में उतरे हैं और मुसलमानों की बात करना चाह रहे हैं तो उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। ओवैसी का यह तर्क बताता है कि वो खुद को मुस्लिम समुदाय के असली प्रतिनिधि के रूप में पेश कर रहे हैं।
Bengal Election 2026: हुमायूं कबीर के समर्थन में क्यों उतरे ओवैसी?
बंगाल में ओवैसी तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता हुमायूं कबीर का समर्थन कर रहे हैं। हुमायूं कबीर TMC छोड़कर अलग रास्ते पर चले गए हैं और अब वो ओवैसी के समर्थन से चुनाव लड़ रहे हैं। यही वजह है कि TMC उन पर ‘बी टीम’ का ठप्पा लगा रही है।
लेकिन ओवैसी इसे पूरी तरह से गलत बताते हैं। उनका कहना है कि वो किसी की बी टीम नहीं हैं बल्कि वो अपना स्वतंत्र राजनीतिक रास्ता चुन रहे हैं। उनका दावा है कि बंगाल में मुस्लिम समुदाय को एक ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो सच में उनके हित में काम करे न कि सिर्फ वोट के वक्त उनका इस्तेमाल करे।
ममता के ‘सोनार बांग्ला’ पर ओवैसी ने उठाए सवाल

ओवैसी ने ममता बनर्जी से एक तीखा सवाल भी पूछा। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी बंगाल में SEZ यानी विशेष आर्थिक क्षेत्र क्यों नहीं बनातीं? अगर सोनार बांग्ला का सपना सच में पूरा करना है तो औद्योगिक विकास जरूरी है जिससे लोगों को रोजगार मिले। लेकिन अगर SEZ नहीं बनाएंगी तो बंगाल के लोगों की गरीबी कैसे दूर होगी?
यह सवाल सिर्फ मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं है। यह बंगाल के विकास और रोजगार से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है। ओवैसी ने इसे उठाकर यह दिखाने की कोशिश की है कि ममता सरकार विकास के मोर्चे पर भी कमजोर साबित हुई है।
ममता की राजनीति और मुस्लिम वोट बैंक
बंगाल की राजनीति में मुस्लिम मतदाता हमेशा से एक बड़ा और निर्णायक वर्ग रहा है। राज्य में करीब 28 से 30 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है जो किसी भी चुनाव में जीत और हार तय करने में अहम भूमिका निभाती है। ममता बनर्जी की राजनीति इस मुस्लिम वोट बैंक पर काफी हद तक टिकी रही है।
ओवैसी का आरोप यह है कि ममता ने इस समुदाय का इस्तेमाल तो किया लेकिन उनके वास्तविक विकास के लिए कुछ खास नहीं किया। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के मामलों में मुस्लिम समुदाय अभी भी पिछड़ा हुआ है, यह ओवैसी का बड़ा तर्क है।
बंगाल में AIMIM की मौजूदगी कितनी असरदार?
यह सवाल स्वाभाविक है कि बंगाल में ओवैसी की पार्टी AIMIM का कितना असर होगा। बंगाल में AIMIM नई पार्टी है और उसका संगठन अभी उतना मजबूत नहीं है। लेकिन ओवैसी की आक्रामक बयानबाजी और मुस्लिम समुदाय के बीच उनकी स्वीकार्यता यह सुनिश्चित करती है कि उनकी मौजूदगी पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं की जा सकती।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर AIMIM कुछ सीटों पर भी अच्छा प्रदर्शन करती है तो इससे TMC के वोट बैंक पर सीधा असर पड़ सकता है। और अगर TMC के वोट कटे तो इसका फायदा किसे होगा यह बंगाल की राजनीतिक जटिलता में बहुत कुछ तय करेगा।
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