असम – असम पुलिस ने नशे के खिलाफ अपनी मुहिम में एक बड़ी सफलता हासिल की है। कछार जिले में पुलिस ने करीब 90 हजार याबा टैबलेट्स जब्त कीं, जिनकी बाजार कीमत लगभग 26-27 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई राज्य में ड्रग्स तस्करी पर लगाम कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
याबा टैबलेट्स क्या होती हैं?
याबा टैबलेट्स एक खतरनाक नशीली दवा है, जिसे थाई भाषा में ‘पागल करने वाली दवा’ कहा जाता है। यह मेथामफेटामाइन और कैफीन के मिश्रण से बनती है। मेथामफेटामाइन एक शक्तिशाली उत्तेजक (स्टिमुलेंट) होता है, जो दिमाग पर सीधा असर करता है। इससे व्यक्ति को कुछ समय के लिए ज्यादा ऊर्जा महसूस होती है, भूख कम लगती है और खुशी का अहसास होता है। लेकिन यह बहुत जल्दी लत लगा देती है और इसके सेवन से दिल की धड़कन तेज हो जाना, बेचैनी, नींद न आना, चिड़चिड़ापन और गंभीर मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक इस्तेमाल करने से यह व्यक्ति को पागलपन की हालत में पहुंचा सकती है। याबा टैबलेट्स आमतौर पर लाल या नारंगी रंग की छोटी गोलियां होती हैं, जिन पर ‘WY’ या ‘R’ जैसे निशान होते हैं। भारत में यह पूरी तरह प्रतिबंधित है।
ये टैबलेट्स कहां से आईं?
ये याबा टैबलेट्स मुख्य रूप से म्यांमार में बनाई जाती हैं। म्यांमार दुनिया में मेथामफेटामाइन का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। वहां से ये टैबलेट्स सीमा पार करके मिजोरम के चंफाई जिले में आती हैं। इस बार पुलिस को खबर मिली थी कि मिजोरम से एक बड़ा ट्रक असम की ओर आ रहा है। ट्रक गुवाहाटी जा रहा था। कछार जिले के रोंगपुर इलाके में पुलिस ने ट्रक को रोका और तलाशी ली। ट्रक के एक गुप्त डिब्बे में 90 हजार याबा टैबलेट्स छिपी हुई मिलीं। पुलिस का मानना है कि ये टैबलेट्स म्यांमार से मिजोरम होते हुए असम में लाई गई थीं। असम अक्सर इन नशीली दवाओं का ट्रांजिट पॉइंट बनता है, यानी यहां से ये आगे अन्य राज्यों या देशों में भेजी जाती हैं।
पुलिस ने कैसे की जब्ती?
कछार पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मिजोरम से एक ट्रक में बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ लाए जा रहे हैं। पुलिस ने रोंगपुर में नाका लगाया और ट्रक (नंबर AS-01FC-0018) को रोक लिया। ट्रक की अच्छी तरह तलाशी लेने पर गुप्त जगह से 90 हजार टैबलेट्स बरामद हुईं। पुलिस ने ट्रक चालक दलिम उद्दीन लस्कर और अबेद सुल्तान बरभुइया को गिरफ्तार कर लिया। दोनों कछार जिले के धोलाई इलाके के रहने वाले हैं। कछार के पुलिस अधीक्षक पार्थ प्रतिम दास ने बताया कि जब्त टैबलेट्स की कीमत काले बाजार में करीब 26 करोड़ रुपये है। मामले की आगे जांच चल रही है ताकि तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पुलिस की तारीफ की और कहा कि यह ‘असम अगेंस्ट ड्रग्स’ अभियान का हिस्सा है।
असम में ड्रग्स की समस्या क्यों बढ़ रही है?
असम उत्तर-पूर्व का एक महत्वपूर्ण राज्य है, जो म्यांमार और बांग्लादेश से लगा हुआ है। म्यांमार में ड्रग्स बनाने की फैक्टरियां आसानी से चलती हैं, क्योंकि वहां कानून कमजोर है। वहां से हेरोइन, याबा और अन्य नशीले पदार्थ आसानी से सीमा पार आ जाते हैं। मिजोरम, मणिपुर और असम जैसे राज्य इनके रास्ते बन जाते हैं। युवा पीढ़ी में ये टैबलेट्स ‘पार्टी ड्रग्स’ के नाम से लोकप्रिय हो रही हैं, क्योंकि ये सस्ती और आसानी से मिल जाती हैं। लेकिन ये युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रही हैं। असम सरकार ने ‘ड्रग्स मुक्त असम’ बनाने का अभियान चलाया है, जिसमें पुलिस लगातार छापे मार रही है। हाल ही में दिसंबर में ही कछार से 10 हजार टैबलेट्स भी जब्त की गई थीं, जिनकी कीमत 3 करोड़ थी।
निष्कर्ष:
यह बड़ी जब्ती असम पुलिस की सतर्कता और मेहनत का नतीजा है। इससे साफ होता है कि राज्य ड्रग्स तस्करों के खिलाफ कितनी सख्ती से काम कर रहा है। लेकिन समस्या की जड़ म्यांमार में है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास करने की जरूरत है। युवाओं को जागरूक करना सबसे जरूरी है, क्योंकि याबा जैसी दवाएं शुरू में मजा देती हैं, लेकिन बाद में पूरी जिंदगी तबाह कर देती हैं। अगर हर कोई सतर्क रहे और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को दे, तो हम मिलकर असम को नशे से मुक्त बना सकते हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से तस्करों को साफ संदेश गया है कि असम में ड्रग्स का कारोबार अब आसान नहीं रहेगा।



