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बिहार: कांग्रेस में बड़ी हलचल: कृष्णा अल्लावरु को पद से हटाया गया, क्या था कारण ?

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच कांग्रेस में आंतरिक उथल-पुथल ने जोर पकड़ लिया है। AICC ने प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु को यूथ कांग्रेस के प्रभार से हटा दिया, जो कार्यकर्ताओं के लगातार बढ़ते आक्रोश और टिकट वितरण में कथित अनियमितताओं का सीधा नतीजा माना जा रहा है। सदाकत आश्रम (कांग्रेस मुख्यालय) में पिछले दो सप्ताह से चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने पार्टी हाईकमान को मजबूर कर दिया। हालांकि, कुछ वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि यह फैसला एक महीने पहले ही तय हो गया था, क्योंकि अल्लावरु के पास दोहरे प्रभार थे। लेकिन चुनावी माहौल में ऐलान की देरी ने टाइमिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नया यूथ प्रभारी तेलंगाना के राजीव सतावसे को नियुक्त किया गया है, जो संगठन को पुनर्जीवित करने का प्रयास लगता है। यह बदलाव महागठबंधन की एकता पर भी सवालिया निशान लगा रहा है, जहां RJD के साथ सीट बंटवारे की जंग पहले से चल रही है।

टिकट वितरण में भेदभाव

कृष्णा अल्लावरु के कामकाज पर न सिर्फ बड़े नेता, बल्कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ता भी आक्रोशित थे। टिकट वितरण में पैसे के दम पर नाम तय करने, भाई-भतीजावाद और संगठनात्मक उपेक्षा के आरोप लगे। पूर्व विधायक अफाक आलम ने तो ऑडियो जारी कर पैसे लेकर सीट बेचने का दावा किया, जिसमें अल्लावरु का नाम भी घसीटा गया। रिसर्च सेल अध्यक्ष आनंद माधव ने उन्हें ‘RSS एजेंट’ तक कहा। सदाकत आश्रम में 17-19 अक्टूबर को युवा कांग्रेस के सदस्यों ने ‘अल्लावरु हटाओ’ के नारे लगाते हुए धरना दिया। एक कार्यकर्ता ने कहा, “टिकटों में मनमानी से यूथ विंग टूट गया। अल्लावरु ने जमीनी नेताओं को नजरअंदाज किया।” AICC ने इसे ‘संगठन सुधार’ बताया, लेकिन आलोचक इसे चुनावी नुकसान से बचाव मान रहे हैं।

फैसले की टाइमिंग पर सवाल

पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि अल्लावरु को यूथ प्रभार से हटाने का फैसला सितंबर में ही हो गया था, क्योंकि दोहरे प्रभार (प्रदेश प्रभारी + यूथ) से फोकस बंट रहा था। लेकिन 23 अक्टूबर को ऐलान ने सवाल खड़े कर दिए। एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यदि इतना समय था, तो एक महीने पहले क्यों नहीं? और यदि आक्रोश के कारण, तो थोड़ा और इंतजार क्यों? यह चुनावी साजिश लगता है।” राजीव सतावसे की नियुक्ति को युवा संगठन को मजबूत करने का कदम बताया जा रहा है, जो OBC और युवा वोट बैंक को एकजुट करेगा। हालांकि, कार्यकर्ताओं का कहना है कि ‘देर आए दुरुस्त आए’—लेकिन नुकसान हो चुका।

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यह फैसला महागठबंधन के लिए झटका है, जहां RJD ने कई सीटों पर उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस को किनारे करने की कोशिश की। अल्लावरु की हटने से कांग्रेस का युवा वोट बैंक (18-35 वर्ष) प्रभावित हो सकता है, खासकर मुस्लिम-यादव युवाओं में। NDA ने इसे ‘कांग्रेस की कमजोरी’ बताकर प्रचार तेज कर दिया। तेजस्वी यादव ने चुप्पी साध रखी, लेकिन सूत्रों के अनुसार RJD कांग्रेस से दूरी बढ़ा रही है। चुनाव आयोग के अनुसार, पहले चरण (25 अक्टूबर) के नामांकन समाप्ति से पहले यह घटना महागठबंधन को 8-10 सीटों का नुकसान पहुंचा सकती है। AICC ने कहा कि संगठन मजबूत होगा, लेकिन कार्यकर्ता सुधार की मांग कर रहे हैं।

Vaibhav tiwari
Author: Vaibhav tiwari

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